IAS जुलानिया के मौखिक आदेश पर अधिकारी को जेल क्यों भेजा: हाईकोर्ट का नोटिस

Wednesday, June 7, 2017

भोपाल। मध्यप्रदेश के सबसे ताकतवर नौकरशाह एवं सीनियर आईएएस राधेश्याम जुलानिया अब हाईकोर्ट की कार्रवाई की जद में आ सकते हैं। उन्होंने एक अधिकारी को इसलिए जेल भेज दिया क्योंकि वो अपने निलंबन के विरुद्ध हाईकोर्ट से स्टे ले आया था। पुलिस ने बिना एफआईआर दर्ज किए, अधिकारी को हिरासत में लिया और जेल भेज दिया। अब हाईकोर्ट ने आईजी पुलिस को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। चूंकि यह जानते हुए कि एपीओ सतेन्द्र कुमार पटैल हाईकोर्ट के स्टे पर हैं, आईएएस जुलानिया ने जेल भेजने के आदेश दिए अत: अब वो भी इस कार्रवाई की जद में आ सकते हैं। 

न्यायमूर्ति जेके माहेश्वरी की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। इस दौरान याचिकाकर्ता का पक्ष अधिवक्ता अमृतलाल गुप्ता ने रखा। उन्होंने दलील दी कि जिला पंचायत सीधी में पदस्थ रहे एपीओ सतेन्द्र कुमार पटैल फिलहाल सिंगरौली में पदस्थ हैं। उनके कार्यकाल में एक व्यक्ति ने पहले मुख्यमंत्री आवास योजना का लाभ उठाया फिर प्रधानमंत्री आवास योजना का भी लाभ उठा लिया। इसी मामले में एपीओ को दोषी मानते हुए सेवा समाप्ति का नोटिस थमा दिया गया। जिसके खिलाफ एपीओ से हाईकोर्ट की शरण लेकर स्टे ऑर्डर हासिल कर लिया। इसी बीच एडीशनल चीफ सेक्रेटरी राधेश्याम जुलानिया दौरे पर पहुंचे। उन्होंने सवाल किया कि एपीओ अब तक नौकरी पर कैसे है? इसके जवाब में हाईकोर्ट से स्टे की बात सामने रखी गई। इस पर जुलानिया आगबबूला हो गए और फरमान जारी कर दिया कि इसे तुरंत जेल भेजो।

सिविल लाइन पुलिस उठाकर ले गई
हाईकोर्ट को अवगत कराया गया कि नौकरशाह जुलानिया के आदेश के बाद पुलिस इतना घबरा गई कि एफआईआर दर्ज किए बगैर एपीओ पटैल को उठाकर सिविल लाइन थाना रीवा में बैठा लिया गया। जहां से बाद में जेल भेज दिया गया। यहां तक कि सेशन कोर्ट से जमानत की कोशिश प्रबल विरोध करके नाकाम कर दी गई। लिहाजा, पटैल को हाईकोर्ट से जमानत हासिल करनी पड़ी। जमानत के बाद नौकरी पर वापस लौटे एपीओ पटैल को त्रिशंकु की हालत में डाल दिया गया। उसे न तो बर्खास्त किया गया और न ही कोई काम करने दिया गया। 

इस पर सरकार ने महाधिवक्ता से लीगल ओपीनियन मांगी कि इस केस में एपीओ को कैसे बर्खास्त करें? एजी ऑफिस की ओर से सलाह दी गई कि हाईकोर्ट में पहले स्टे हटवाने आवेदन किया जाए। बहरहाल, सवाल यह उठता है कि बिना एफआईआर के महज जुलानिया के मौखिक आदेश से जेल में कैसे डाला गया? साथ ही जिस आरोप में परेशान किया जा रहा है, उस संबंध में अन्य आरोपियों के खिलाफ अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई? महज एक कर्मचारी को टारगेट क्यों बनाया गया है? हाईकोर्ट ने पूरे मामले पर गौर करने के बाद आईजी रीवा को निर्देश दिया कि जुलानिया के दौरे, सिविल लाइन रीवा और सीधी कोतवाली की सीसीटीवी फुटेज हाईकोर्ट में पेश की जाए। इसी के साथ अवमानना मामले में भी सुनवाई की जाएगी। ऐसा इसलिए क्योंकि हाईकोर्ट के स्टे के बावजूद एपीओ को परेशान किया गया।

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