चीन ने कैलाश मानसरोवर यात्रा रोकी, DELHI से सिक्किम तक फंसे तीर्थ यात्री

Saturday, June 24, 2017

गंगटोक। चीन ने भारत के करीब 50 तीर्थयात्रियों को आगे बढ़ने से रोक दिया, जो सिक्किम में नाथू-ला दर्रा होते हुए कैलाश मानसरोवर की यात्रा करने वाले थे। इसके बाद भारत ने इस मुद्दे को बीजिंग के समक्ष उठाया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गोपाल बागले ने कहा कि, नाथू-ला के रास्ते तीर्थयात्रियों की आवाजाही में कुछ कठिनाइयां पेश आ रहीं हैं। एक सवाल के जवाब के बारे में गोपाल बागले ने कहा कि, हां, नाथू ला के रास्ते कैलाश मानसरोवर यात्रा के तीर्थयात्रियों के जाने में कुछ कठिनाइयां पेश आ रहीं हैं। इस बारे में चीनी पक्ष से बातचीत चल रही है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों में सीपीईसी और भारत की एनएसजी की सदस्यता के प्रयास समेत विभिन्न मुद्दों को लेकर तनाव बना हुआ है।

नाथू-ला के रास्ते जा रहे 2 जत्थों को रोका
सूत्रों के अनुसार, लगातार बारिश से हुए भूस्खलन के कारण चीन की ओर की सड़कें बह जाने के बाद 47 तीर्थयात्रियों और एक संपर्क अधिकारी को रोक दिया गया। भारतीय तीर्थयात्रियों को बताया गया कि, उन्हें मौसम और सड़क की हालत सुधरने पर चीन में प्रवेश की अनुमति दी जाएगी।

पहला जत्था 15 जून को गंगटोक पहुंचा था 
47 यात्रियों का पहला जत्था 15 जून को गंगटोक पहुंचा था। नाथू-ला के रास्ते वार्षिक तीर्थयात्रा कराने में सिक्किम पर्यटन विकास निगम नोडल एजेंसी का काम करता है। सूत्रों के अनुसार लगातार बारिश से हुए भूस्खलन के कारण चीन की ओर की सड़कें बह जाने के बाद 47 तीर्थयात्रियों और एक संपर्क अधिकारी को रोक दिया गया।

दिल्ली से लेकर सिक्किम तक फंसे यात्री
यात्रियों के लिए यह परेशानी केवल गंगटोक में नहीं बल्कि दिल्ली में भी है। दरअसल कैलाश मानसरोवर के लिए जितने भी जत्थे जाते हैं वे दिल्ली से ही रवाना होते हैं। केन्द्र सरकार लिस्ट के मुताबिक लोगों को रवाना करती है। दिल्ली में दिल्ली सरकार इन यात्रियों के लिए रहने-खाने से लेकर बुनियादी सुविधाओं का इंतजाम करती है। 

दिल्ली सरकार की तीर्थयात्रा समिती के अध्यक्ष कमल बंसल की मानें तो उन्हें विदेश मंत्रालय से इस बात की जानकारी दी गई है कि अगले आदेश तक नाथूला के रास्ते कैलाश मानसरोवर की यात्री रोक द गई है ऐसे मे जो भी यात्री आने वाले हैं उन्हें फिलहाल नहीं आने की हिदायत दी जाए और जो आए हुए हैं उन्हें घर वापसी की व्यवस्था की जाए। 30 जून को जो तीसरा जत्था जाने वाला था अभी वो यात्री दिल्ली में फंसे हुए हैं।

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