“उपवास” की नहीं “विश्वास” की दरकार

Saturday, June 10, 2017

राकेश दुबे@प्रतिदिन। रायसेन में कल एक और किसान ने आत्महत्या की। कर्जे से परेशान था। किसान पुत्र उपवास पर हैं। बयान जारी कर जमीदार पुत्र इसे नौटंकी बता रहे हैं। विधायक पत्थर चलवा रहे है, आग लगवा रहे हैं। यह सब क्या है? यह सब हथकंडे हैं। मूल बात को छिपाने के, अपनी अकर्मण्यता को एक कवच से ढंकने और कैसे भी इस मामले को अपने पक्ष में मोड़ने के।

मंदसौर की लपट मालवा में फैल गई। गुस्सा सरकारी अधिकारियों ने सहना पडा। तबादला हुआ, पिटे किसी किसी के तो हाथ पैर भी टूटे और यह सब उस किसान के मत्थे मढ़ दिया गया, जिसने विषम परिस्थिति में प्रदेश के नागरिकों को पर्याप्त अन्न दिया और सरकार के कीर्ति किरीट में “कृषि कर्मण” का सुनहरा पंख लगाया। सरकार ने उसे घोषणा के बावजूद वो सब नहीं दिया जिसकी घोषणा करते हुए किसान पुत्र अपनी पीठ थपथपाते रहे। इतराते रहे। जमीदार पुत्रों का जनाधार तो वैसे ही खिसका हुआ था। मंदसौर की आंच में उन्हें अपने डूबते भविष्य को संवारने की उम्मीद नजर आई। दोनों पिल पड़े, समाज के उस विश्वास को तोड़ने जो किसान और समाज के बीच परस्पर स्थापित था। किसान जहाँ देश की रीढ़ है तो पिटे अफसर समाज के हाथ। दोनों के हाथ आई वैमनस्यता और अविश्वास। किसान कभी हिंसक होगा ? यह बात तो समझ से परे है।

अब आत्मग्लानिवश किये जा रहे “उपवास” और आगजनी जैसे अपराध किस सभ्यता की निशनी है। यह उपवास आपके ही शब्दों में अशांति के विरुद्ध है। आपने ही प्रमाणित दिया है कि आप शांति स्थापित करने में असमर्थ रहे हैं और यह समझने का ढोंग कर रहे हैं की आप को किसान के मन की बात पता है। सच तो यह है कि मध्यप्रदेश में पक्ष और प्रतिपक्ष का किसान की पीड़ा से कोई सरोकार नही है। किसान आन्दोलन के नाम पर आगजनी कराकर कौन रोटी सेक रहा है। इन हरकतों से समाज में बिगड़ते संतुलन की सोचो। नगर और ग्राम के बीच अविश्वास की खाई पैदा कर दी है आपने। अब सडक पर चलता राहगीर किसी खेत से पानी मांगने में सशंकित रहेगा और किसान हर शहरी आदमी और सरकारी कर्मचारी को लुटेरा समझेगा। हर खेत की सुरक्षा का जिम्मा कोई भी राजनीतिक दल नही ले सकता। अब तक किसान राहगीरों को पानी पिलाना पुण्य समझते रहे हैं और राहगीर बीडी फेकने के पहले, पैरों तले कुचल कर खेत का ख्याल रखते आये हैं। उनके इस विश्वास को आप की हरकतें तोड़ रही है। जोडिये समाज में विश्वास के ताने-बने को और छोडिये “उपवास” को इसमें कुछ नही धरा है। 
श्री राकेश दुबे वरिष्ठ पत्रकार एवं स्तंभकार हैं।        
संपर्क  9425022703        
rakeshdubeyrsa@gmail.com
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