बालाघाट विस्फोट: 50kg के लाइसेंस पर 100 क्विंटल बारूद भरा था, कलेक्टर बेखबर ?

Thursday, June 8, 2017

भोपाल। बालाघाट विस्फोट इससे भी कहीं भयानक हो सकता था, यदि पटाखा फैक्ट्री रिहायशी इलाके के आसपास होती। इस पटाखा फैक्ट्री को 50 किलो बारूद संग्रह करने का लाइसेंस दिया गया था परंतु फैक्ट्री में हादसे के समय 100 क्विंटल बारूद जमा था। सवाल यह है कि कलेक्टर की सीधी निगरानी वाले विभाग इस तरह की लापरवाही कैसे कर सकते हैं। क्या उन्हे सचमुच पता नहीं था कि बालाघाट में मौत का गोदाम तैयार हो गया है या फिर कुछ और राज है जिसके चलते 25 मजदूरोें की मौत मंजूर कर ली गई। 

एक झोपड़ीनुमा परिसर में चल रही थी फैक्ट्री
पुलिस के अनुसार, लाइसेंस लेकर एक झोपड़ीनुमा परिसर में चल रही फैक्ट्री में बुधवार दोपहर करीब तीन बजे धमाका हुआ। यह इतना जोरदार था कि 5 किमी दूर तक आवाज सुनाई दी। सूचना पर कलेक्टर भरत यादव और एसपी अमित सांघी भी मौके पर पहुंचे। इससे पहले वर्ष 2015 में भी जिले के किरनापुर में पटाखा फैक्ट्री में विस्फोट हुआ था। इसमें तीन श्रमिकों की मौत हो गई थी।

फैक्ट्री में थे 47 मजदूर, इनमें ज्यादातर महिलाएं
झोपड़ी में चलाई जा रही इस फैक्ट्री में हादसे के वक्त 47 मजदूर काम कर रहे थे। इनमें ज्यादातर महिलाएं थीं। हादसे से फैक्ट्री के परखच्चे उड़ गए। 25 मृतकों में 16 महिलाएं हैं। पटाखा फैक्ट्री में हुए धमाके से 22 लोग जिंदा जल गए। गंभीर रूप से घायल तीन लोगों को नागपुर, जबकि आठ अन्य को बालाघाट के अस्पताल में भर्ती कराया गया हैं। घायलों में से तीन ने गुरुवार को इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। इस तरह से मरने वालों की संख्या 25 हो गई हैं। गुरुवार को हीरापुर में एक साथ 24 लोगों का अंतिम संस्कार किया गया।

पूरे गांव में नहीं जला चूल्हा, महिलाएं भी गई श्मशान घाट तक
बुधवार को विस्फोट के बाद से ही पूरे गांव में मातम पसरा रहा। गुरुवार को एक साथ 24 शवों की अंतिम यात्रा निकाली गई, जिसमें गांव की महिलाओं सहित हर शख्स शामिल हुआ। इस दौरान गांव के किसी भी घर में चूल्हा नहीं जला। उधर, श्रमिकों की शव यात्रा में मप्र के कृषि मंत्री गौरीशंकर बिसेन, सांसद बोध सिंह भगत, कलेक्टर भरत यादव सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे। मंत्री बिसेन ने मृतकों के परिजनों से मुलाकात कर उन्हें सांत्वना दी।

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