मृत फार्मासिस्टों के लाइसेंस पर चल रहीं हैं फर्जी MEDICAL STORE, जांच शुरू

Saturday, May 20, 2017

भोपाल। स्वास्थ्य विभाग एवं ड्रग इंस्पेक्टर की जिम्मेदारी है कि वो नियमित रूप से जांच करे कि मेडिकल दुकानों का संचालन किस प्रकार से हो रहा है। जिस फार्मासिस्ट के नाम पर लाइसेंस जारी हुआ है, वहीं संचालन कर रहा है या नहीं लेकिन विभाग कितनी जिम्मेदारी से कर्तव्य निभा रहा है इसका खुलासा इस मामले से होता है कि मप्र में कई मेडिकल की दुकानें वर्षों पहले स्वर्गवासी हो चुके फार्मासिस्टों के लाइसेंस पर चल रहीं हैं। अब मेडिकल काउंसिल ने 80 साल से ज्यादा उम्र के फार्मासिस्ट की सूची बनाकर जांच के आदेश दिए हैं। 

मेडिकल दुकान चलाने के लिए रजिस्ट्रर्ड फार्मासिस्ट होना जरूरी है। उसकी मौत हो जाने की स्थिति में मेडिकल दुकान बंद कर दी जाना चाहिए और इसकी जानकारी मप्र राज्य फार्मेसी काउंसिल को दी जानी चाहिए, लेकिन बहुत कम मामलों में काउंसिल को ये जानकारी दी जाती है।

पांच साल में नवीनीकरण जरूरी
नियमों के मुताबिक एक रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट की नियुक्ति करने के बाद एक आम आदमी भी मेडिकल लाइसेंस ले सकता है, लेकिन इसका संचालन फार्मासिस्ट द्वारा ही किया जाना चाहिए। इस नियम के तहत कई लोग फार्मासिस्ट रखकर मेडिकल चलाते हैं। हर पांच साल में रजिस्ट्रेशन और लाइसेंस का नवीनीकरण तो होता है लेकिन इस बीच फार्मासिस्ट की मौत होने की जानकारी कम ही मामलों में मिलती है।

50 हजार में सैकड़ों उम्रदराज
फार्मेसी काउंसिल के मुताबिक प्रदेश में फिलहाल 50 हजार से ज्यादा रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट हैं। लगभग 25 हजार मेडिकल स्टोर का संचालन हो रहा है। ड्रग एंड कॉस्मेटिक एक्ट के तहत 1970 से रजिस्ट्रेशन करने और रद्द करने का काम हो रहा है, लेकिन तब से अब तक फार्मासिस्ट की मौत के कारण कितने रजिस्ट्रेशन रद्द हुए इसकी स्पष्ट जानकारी काउंसिल के पास नहीं है।

अधिकारी खुद स्वीकार कर रहे हैं कि सैकड़ों ऐसे फार्मासिस्ट हैं जो काफी उम्रदराज हैं। इसीलिए प्रदेश भर के ड्रग इंस्पेक्टर्स को आदेश जारी कर 80 वर्ष या इससे ज्यादा उम्र के फार्मासिस्ट की सूची बनाकर जांच करने के लिए कहा गया है। इस तरह की धांधली को रोकने के लिए अब रजिस्ट्रेशन और लाइसेंस प्रक्रिया को ऑनलाइन कर दिया गया है, जिसमें फार्मासिस्ट के जीवित होने का स्वप्रमाणित दस्तावेज भी मांगा जा रहा है।

गलत दवाएं दी जा रहीं हैं
हालात यह हैं कि मेडिकल की दुकानों पर बिना डिग्री वाले नौकर काम कर रहे हैं। वो गलत दवाएं दे देते हैं। दवाओं के साथ दुकानदार बिल नहीं देते। गलत दवाओं के कारण मरीजों की मौत हो जाती है परंतु मेडिकल स्टोर संचालक के खिलाफ कभी कोई कार्रवाई नहीं की जाती। 

नकली दवाएं बिक रहीं हैं बाजार में
दवा बाजार में नकली दवाओं का कारोबार तेजी से फल फूल रहा है। कंपनियों को मालूम है कि मप्र में जांच करने के लिए पर्याप्त स्टाफ ही नहीं है। अत: जिला स्तर के अधिकारियों से मिली भगत करके कंपनियां खुलेआम नकली दवाएं सप्लाई कर रहीं हैं। ज्यादा कमीशन के लालच में 10 से 15 प्रतिशत डिस्काउंट का लालच देकर बाजार में नकली दवाएं बेची जा रहीं हैं। 

जानकारी स्पष्ट नहीं
80 वर्ष से अधिक आयु के फार्मासिस्ट की सूची बनाकर मौका निरीक्षण कर जांच के आदेश दिए हैं। रजिस्ट्रेशन ऑफिस की ओर से भी दस्तावेजों की जांच करवाई जा रही है। कितने फार्मासिस्ट की मौत के बाद जानकारी मिली या स्टोर बंद करवाए गए यह स्पष्ट नहीं है। 
प्रमोद शुक्ला, रजिस्ट्रार, फार्मेसी काउंसिल मप्र

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