बलात्कारियों को फांसी के लिए IPC में संशोधन जल्द

Tuesday, May 9, 2017

भोपाल। नाबालिग बालिकाओं के साथ होने वाली छेड़छाड़ और दुष्कर्म के आरोपियों को सख्त सजा मिल सके इसके लिए आईपीसी की धाराओं में जल्द ही संशोधन किए जा सकते हैं। आजीवन कारावास से लेकर मृत्यु दंड तक की सजा के लिए महिला अपराधों से जुड़ी इन धाराओं में कुछ नं धाराएं जोड़ी जाएंगी। इसके साथ ही सजा का प्रावधान भी बढ़ाने के प्रस्ताव हैं। पुलिस की महिला अपराध शाखा द्वारा तैयार किए गए ये प्रस्ताव मंजूरी के लिए केंद्र सरकार को भेजे जाएंगे।

निर्भया कांड के बाद मप्र सरकार भी बालिकाओं के साथ होने वाली घटनाओं को लेकर गंभीर हुई है। इसके अलावा प्रदेश में नाबालिग बालिकाओं के साथ वारदातों का ग्राफ भी बढ़ा है। राजगढ़ और हरदा में छेड़छाड़ की शिकार बालिकाओं ने खुदकुशी तक कर ली है।
वारदातों का ग्राफ बढ़ा... आईपीसी की प्रस्तावित धारा एवं संशोधन
धारा 354 क, ख एवं घ में संशोधन
प्रस्ताव- सात साल से लेकर 10 साल तक की सजा एवं न्यूनतम एक लाख रुपए का जुर्माना।

अभी क्या सजा है
धारा क में तीन वर्ष से कम कारावास एवं जुर्माना। ख में कम से कम तीन वर्ष का कारावास एवं जुर्माना। घ में पहली बार अपराध करने पर तीन वर्ष का कारावास तक एवं जुर्माना।
नई धारा 493 क स्थापित की जाना है..
प्रस्ताव- 493 क में कोई पुरुष किसी महिला को शादी का प्रलोभन देकर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाता है तो उसे कठोर कारावास की सजा होगी जिसकी अवधिकम से कम 3 साल और अधिकतम 7 साल होगी।
नई धारा 376 क (1)
प्रस्ताव- धारा 376 क (1) में 10 वर्ष से कम आयु की बालिकाओं के साथ बलात्कार के मामलों में कम से कम 20 वर्ष की सजा जो मृत्युदंड तक दी जाना प्रस्तावित है। साथ ही कम से कम एक लाख रुपए का जुर्माना।

नई धारा 376 घ
प्रस्ताव- एक धारा में नई उपधारा जोड़ना है। 376 घ में नवीन उपधारा को स्थापित किया जाना है। जिसमें नाबालिग 10 वर्ष या 10 वर्ष से कम आयु की बालिका के साथ सामूहिक बलात्कार के मामलों में न्यूनतम आजीवन कारावास एवं अधिकतम मृत्युदंड की सजा। न्यूनतम एक लाख रुपए।
धारा 354 क... प्रस्ताव- 354 क को फिर से अंत:स्थापित करते हुए धारा 354 क (1) किया जाना प्रस्तावित है। लैंगिक उत्पीड़न की घटनाओं की रोकथाम हेतु मप्र शासन द्वारा 2004 में अधिनियम में संशोधन कर 354 क नवीन धारा को अन्त: स्थापित किया गया, जिसमें सार्वजनिक स्थान पर स्त्री की लज्जा भंग या हमला किए जाने पर अधिकतम 10 साल की सजा का प्रावधान रखा गया है।

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