कुलभूषण जाधव केस: इंटरनेशनल कोर्ट में क्या क्या हुआ | INDIA vs PAKISTAN

Monday, May 15, 2017

नई दिल्ली। कुलभूषण जाधव (46) को पाक में सुनाई गई फांसी के खिलाफ सोमवार को नीदरलैंड्स स्थित इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस (ICJ) में सुनवाई हुई। भारत की ओर से दलीलें पेश किए जाने के बाद पाकिस्तान की बारी आई। पाकिस्तान जाधव के कबूलनामे का वीडियो दिखाना चाहता था। एक न्यूज एजेंसी के मुताबिक, इंटरनेशनल कोर्ट ने पाकिस्तान को इसकी इजाजत नहीं दी। बता दें कि पाक ने पिछले साल जाधव की गिरफ्तारी के वक्त यह वीडियो जारी किया था। पाकिस्तान इसे ही सबसे बड़ा सबूत बताकर पेश कर रहा था। यह वीडियो पूरी तरह फर्जी है क्योंकि 6 मिनट के फुटेज में 105 कट हैं। कबूलनामे को देखकर ऐसा लग रहा था कि जाधव टेलीप्रॉम्प्टर पर बयान पढ़ रहे हों। इस बीच, सुनवाई के दौरान पाकिस्तान ने यह साफ किया कि जाधव के पास अपील के लिए 150 दिन हैं। अगस्त तक उसे फांसी नहीं चढ़ाया जाएगा। 

बता दें कि पिछले महीने पाकिस्तान की मिलिट्री कोर्ट ने इंडियन नेवी के पूर्व अफसर जाधव को जासूसी के मामले में फांसी की सजा सुनाई थी। इसी के खिलाफ भारत ने अपील की। 18 साल बाद दोनों देश इंटरनेशनल कोर्ट में आमने-सामने हैं। इंटरनेशनल कोर्ट में सोमवार सुबह 11 जजों की बेंच के सामने सुनवाई के दौरान पहले भारत ने अपना पक्ष रखा। भारत की तरफ से दलीलें पेश करने के लिए एडवोकेट हरीश साल्वे चार लोगों की टीम के साथ मौजूद थे। साल्वे ने कोर्ट को बताया, ‘हमें आशंका है कि पूरी सुनवाई होने या फैसला आने से पहले ही पाक जाधव को फांसी पर न चढ़ा दे। अगर ऐसा हुआ तो दुनिया में गलत मैसेज जाएगा। दुनियाभर में ऐसे मामलों में ह्यूमन राइट्स बेसिक प्रैक्टिस माने जाते हैं, पाक इन्हीं को हवा में उड़ा देता है।’

पाक ने वीडियो दिखाने की कोशिश की
पाकिस्तान ने जाधव को जासूस बताने के लिए उनके कबूलनामे का वीडियो दिखाने की कोशिश की। लेकिन इंटरनेशनल कोर्ट ने पाकिस्तान के वकीलों को ऐसा करने से मना कर दिया।  पाकिस्तान यह जोर देता रहा कि जिस वियना संधि का हवाला देते हुए भारत जाधव की फांसी रोकने की मांग कर रहा है, वह संधि जासूसों के मामलों में लागू नहीं होती। और जाधव जासूस है, यह उसके वीडियो से साबित होता है। बता दें कि पाकिस्तान वही वीडियो दिखाने पर जोर दे रहा था जिसमें प्रोफेशनल इंटेरोगेशन नहीं हुआ था। ऐसा लगता था कि इसे अलग-अलग एंगल से कैमरे और लाइटिंग अरेंजमेंट कर प्लानिंग के तहत शूट किया गया। वीडियो किसी इंटरव्यू की तरह लग रहा था। शायद इसे पाकिस्तान के किसी जर्नलिस्ट और कैमरामैन ने आईएसआई के सेफ हाउस में शूट किया था।

जाधव नेवी में अफसर थे
जाधव का जन्म महाराष्ट्र के सांगली में हुआ। उनके पिता सुधीर जाधव पुलिस डिपार्टमेंट में अफसर रहे। उनका परिवार पहले सांगली में रहता था, लेकिन अब मुंबई शिफ्ट हो गया है। 1991 में जाधव ने इंडियन नेवी की इंजीनियरिंग ब्रांच से कमीशन ज्वाइन किया था।

पाक ने और क्या दलीलें दीं?
1. हम कायर नहीं
- पाकिस्तान के लीगल टीम को वहां के अटॉर्नी जनरल अशहर औसाफ ने लीड किया। पाकिस्तान की तरफ से मोहम्मद फैजल ने कहा- " पाकिस्तान को रिप्रेजेंट करके खुश हूं। मैं पाकिस्तान का पक्ष ब्रीफ में रखता हूं। ये बताने की कोशिश करूंगा कि भारत की अपील क्यों बेकार है। हम साफ कर देना चाहते हैं कि पाकिस्तान खुद आतंकवाद का शिकार है। हम यहां इसलिए आए हैं क्योंकि हम कायर नहीं हैं। हम अपने देश को बचाने के लिए के लिए किसी भी हद तक जाएंगे।"

2. जाधव ने खुद कबूल किया कि वह यहां बेकसूरों मारने आया था
फैजल ने कहा- "भारत ने इसे पॉलिटिकल थिएटर बना दिया है। हमारे काउंसिल खैबर कुरैशी बताएंगे कि क्यों भारत बेकार का मुद्दा उठा रहा है। पाकिस्तान ने जो किया है, वो उसके अधिकार क्षेत्र में आता है। जाधव ने खुद कबूल किया है कि उसे भारत ने भेजा था, ताकि वहां बेकसूरों को मारा जा सके। जाधव के पास से जो पासपोर्ट पर जो नाम था वो मुस्लिम था। (स्क्रीन पर दिखाया)। भारत चुप क्यों है? हमने कमांडर जाधव के बारे में जानकारी भारत को दी थी। (वक्त नहीं बताया)। हम चाहते हैं कि कोर्ट इस मामले की मैरिट पर सुनवाई करे और भारत का झूठ सामने आना चाहिए। भारत कहता है कि हमने कुछ ही दिनों में जाधव को सजा सुना दी। हमने उसे दया याचिका के लिए 150 दिन की मोहलत दी। उसके पास अगस्त तक वक्त है। हमारे पास इस बात के लिए वक्त नहीं कि मामले को खींचा जाए। भारतीय मीडिया ने आपके (आईसीजे) साधारण बयान को जाधव की सजा पर स्टे बता दिया।

3. कोर्ट भारत की अपील को खारिज करे
खाबर कुरैशी ने कहा- " मैं चाहता हूं कि कोर्ट भारत की अपील को खारिज करे। वियना कन्वेंशन में जो एप्लीकेंट्स के लिए दी गईं सुविधाएं लिमिटेड हैं। इनका बेजा फायदा नहीं उठाया जा सकता। हम चाहते हैं कि कोर्ट इस मामले को यहीं खारिज कर दे। पाकिस्तान ने 2008 के बाइलेट्रल एग्रीमेंट का हवाला दिया। भारत ने कहा है कि जाधव को कभी भी फांसी दी जा सकती है। सरताज अजीज ने इस बारे में भारत से बात की थी। सबूत भी सौंपे थे। हमने साफ कर दिया था कि कमांडर जाधव को किसी भी हालत में काउंसलर एक्सेस नहीं दिया जा सकता।

4. जाधव पर भारत को सबूत सौंपे
"भारत ने पाकिस्तानी मीडिया के आधार पर आरोप लगाया है, जबकि हमारे यहां कोर्ट इन्हें सबूत नहीं मानते। पाकिस्तान आर्मी और फॉरेन ऑफिस ने इस बारे में तस्वीर साफ कर दी थी। फिर मीडिया रिपोर्ट्स का सहारा क्यों लिया जा रहा है? हमने 23 जनवरी 2017 को भारत को सीलबंद लिफाफे में जाधव के बारे में रिपोर्ट और आरोप सौंपे थे। उसके बैंक रिकॉर्ड भी दिए गए थे। लेकिन, भारत इस बारे में बात नहीं कर रहा है। उसके पासपोर्ट के बारे में भी बात नहीं की जा रही है।"

5. इंटरनेशनल कोर्ट पाकिस्तान की सिक्युरिटी में दखल नहीं दे सकता
कुरैशी ने कहा " अगर भारत की अपील पर जाधव को राहत नहीं मिल सकती तो फिर कोर्ट इस मामले की सुनवाई क्यों कर रहा है? भारत ने पिछले मामलों का जिक्र किया। इस कोर्ट ने तो जाधव और भारत को राहत दी थी। फिर भारत ने ये क्यों कहा कि आपने फैसले पर स्टे दे दिया है। 8 सितंबर 1974 को खुद भारत ने इस कोर्ट में कहा था कि दो देशों के नागरिकों के मामले इस कोर्ट में नहीं उठाए जा सकते। 10 अगस्त 199 को भी यही हुआ था। हम तब इस मामले को लेकर आए थे। लेकिन, तब इस कोर्ट ने कहा था कि ये दो देशों का आपसी मामला है। कोर्ट का वक्त बेहद अहम होता है। लिहाजा, अपील को एंटरटेन नहीं किया जा सकता।" 

इस मामले में एक तथ्य ये भी है कि भारत और पाकिस्तान के रिश्ते कभी बेहतर नहीं रहे। भारत जाधव पर सिर्फ मोहलत चाहता है या यूं कहें कि इसे टालना चाहता है। क्योंकि, वो जानता है कि सबूत जाधव के खिलाफ हैं। इस मामले को इस तरह देखा जाना चाहिए कि एक देश दूसरे देश में जासूस के रूप में आतंकवादी भेजता है। हम ये साफ कर देना चाहते हैं कि इंटरनेशनल कोर्ट नेशनल सिक्युरिटी के मामलों में दखल नहीं दे सकता।"

6. जाधव कांउसलर एक्सेस के लिए फिट नहीं
कुरैशी ने कहा- " भारत की टीम ने 2008 के एग्रीमेंट का जिक्र नहीं किया। यूएन के एक बड़े मेंबर के खिलाफ बड़े आरोप लगे हैं। भारत के आरोप गलत हैं कि उसे ईरान से गिरफ्तार किया गया है। भारत और पाकिस्तान के बीच भी लंबी बॉर्डर है। अगर किसी को गलत इरादे से गिरफ्तार करना था तो ये काम वहां से भी किया जा सकता था। एप्लीकेंट (भारत) को ये बताना चाहिए कि उसने आरोपों पर सफाई क्यों नहीं दी। पाकिस्तान सरकार के इरादों को गलत तरीके से पेश क्यों किया गया। हर देश के पास वो लिस्ट होती है जिसमें उसके नागरिकों की दूसरे देशों में गिरफ्तारी का जिक्र होता है। यह देखा जाना चाहिए कि गिरफ्तारी किस ग्राउंड (आधार) पर हुई है। इस कोर्ट को बताया गया कि पाकिस्तान ने काउंसलर एक्सेस देने से इनकार कर दिया। हमने कहा कि 2008 के एग्रीमेंट के मुताबिक, काउंसलर एक्सेस दिया जा सकता है। लेकिन, ये मामला उसमें फिट नहीं होता। लिहाजा, काउंसलर एक्सेस क्यों दिया जाए?

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