छग कर्मचारी तय करें 7वां वेतनमान कब से चाहिए: 1 जनवरी या 1 जुलाई से

Saturday, May 20, 2017

रायपुर। वित्त विभाग ने सातवें पुनरीक्षित वेतनमान का नियम जारी कर दिया है। वेतनमान 1 जनवरी 2016 से मिलना है और कर्मचारियों को विकल्प है कि वे या तो 1 जनवरी से वेतन का निर्धारण कराएं या फिर 1 जुलाई से। सातवें वेतनमान के लिए वित्त विभाग अब फार्मूला तय करेगा जिसके आधार पर क्लर्क से लेकर मुख्य सचिव तक का वेतन निर्धारित होगा। पुनरीक्षित वेतन का बुकलेट बनेगा जिसमें हर कर्मचारी के वेतन का डिटेल होगा। वर्तमान में छठवां वेतनमान लागू है, विभागाध्यक्ष सभी कर्मचारियों को यह विकल्प देंगे कि वे छठवां या सातवां वेतनमान में से कोई एक चुनें।

आमतौर पर सातवां वेतनमान ही चुना जाना है पर इक्का- दुक्का मामले ऐसे भी हो सकते हैं जिनमें कर्मचारी जल्द रिटायर होने वाला हो और उसे छठवें वेतनमान में ज्यादा लाभ हो रहा हो। इसीलिए विकल्प प्रपत्र भराने को कहा गया है। एक बार विकल्प चुन लेने के बाद उसे बदला नहीं जा सकेगा। कर्मचारी जो विकल्प चुनेंगे उसे उनकी सेवा पुस्तिका में दर्ज किया जाएगा। इंक्रीमेंट साल में दो बार मिलता है एक जुलाई या एक जनवरी को। इसीलिए इन्हीं दो तिथियों में से एक तिथि वेतन निर्धारण के लिए मांगी गई है।

प्रमोशन के मामलों में टेबल निर्धारित किया गया है। प्रमोट होने वाले कर्मचारी को निर्धारित चार्ट के मुताबिक वेतनवृद्घि मिलेगी। कर्मचारी यह तय कर पाएंगे कि वे प्रमोशन के बाद जनवरी लेंगे या जुलाई में वेतनवृद्घि लेना चाहेंगे। सातवें वेतनमान के लागू होने के बाद भी सबकी सेवा पुस्तिका जांच के लिए ट्रेजरी नहीं भेजी जाएगी।

जो रिटायर हो रहे हैं उन्हीं की सेवा पुस्तिका ट्रेजरी जाएगी। वेतन में से कटौती भी बढ़े वेतन के अनुपात में की जाएगी। जीपीएफ 12 प्रतिशत ही रहेगा, आयकर की कटौती भी पहले के अनुसार ही 10 प्रतिशत रहेगी लेकिन बढ़े हुए वेतन पर कटौती की राशि भी बढ़ जाएगी।

अंशदायी पेंशन योजना में शामिल कर्मचारियों के लिए भी पुनरीक्षित वेतनमान के मुताबिक नया चार्ट निर्धारित होगा। नवीन पे स्केल में वेतन निर्धारण के लिए 3 साल तक की सेवा वाले कर्मचारी अपने सहकर्मियों की गवाही नहीं दे पाएंगे लेकिन उनकी गवाही पुराने कर्मचारी दे सकते हैं।

रिटायर हो रहे कर्मचारियों के प्रकरणों के बचे हुए भुगतान का निर्धारण संयुक्त संचालक कोष लेखा एवं पेंशन द्वारा किया जाएगा। त्रुटिपूर्ण वेतन निर्धारण होने पर उसकी बाद में वसूली होगी। अगर कर्मचारी ने गलत जानकारी देकर ज्यादा वेतन लिया हो तो उससे 12 प्रतिशत चक्रवृद्घि ब्याज भी वसूला जाएगा। अगर त्रुटिपूर्ण वेतन विभाग द्वारा किया गया है तो जिम्मेदारी तय होगी और संबंधित अफसर से 10 प्रतिशत ब्याज लिया जाएगा।

महंगाई भत्ता सहित दूसरे देयक पूर्ववत रहेंगे
सातवें वेतनमान में यात्रा भत्ता, गृह भाड़ा भत्ता, परियोजना भत्ता, अनुसूचित क्षेत्र भत्ता, प्रतिनियुक्ति भत्ता आदि पुराने वेतन संरचना के आधार पर ही लागू होगा। इसमें सातवां वेतनमान लागू नहीं होगा। भविष्य में होने वाली सभी नियुक्तियों में सातवां वेतनमान लागू होगा। वित्त विभाग ने नियमों के साथ वेतन नियतन पत्रक और वचन पत्र भी जारी किया है। सभी विभाग प्रमुख इसे कर्मचारियों से भरवाएंगे।

अधूरा सातवां वेतन दे रहे
कर्मचारी संगठनों ने आरोप लगाया है कि सरकार इतने दिनों के बाद सातवां वेतन देने जा रही है तो भी अधूरा। कर्मचारी नेता विजय झा ने नईदुनिया को बताया कि वाहन भत्ता, एचआरए सहित सभी भत्ते इस नए वेतनमान में शामिल नहीं किए गए हैं।

कर्मचारियों की मांग है कि चार स्तरीय पदोन्नत वेतनमान दिया जाए। मध्यप्रदेश में तीन पदोन्नत वेतनमान लागू हो चुका है। यहां भी इसे लागू किया जाए फिर सातवां वेतन दें। सात प्रतिशत महंगाई भत्ता भी मध्यप्रदेश और केंद्र में लागू है। उसे भी सरकार नहीं दे रही है।

SHARE WITH YOU FRIENDS

-----------

CHOOSE YOUR FAVOURITE NEWS CATEGORY | कृपया अपनी पसंदीदा श्रेणी चुनें


खबरें जो आज भी सुर्खियों में हैं

Trending

Popular News This Week