युक्ति-युक्तकरण प्रक्रिया के अंतर्गत पद-स्थापना की नीति | YUKTIYUKTKARAN POLICY

Thursday, April 13, 2017

भोपाल। प्रदेश की शासकीय शालाओं में स्वीकृत शैक्षणिक पदों के अनुरूप शिक्षकों की पद-स्थापना सुनिश्चित करने के लिये युक्ति-युक्तकरण किये जाने के लिये स्कूल शिक्षा विभाग ने समय-सारणी तय की है। इस संबंध में आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित करने के लिये सचिव स्कूल शिक्षा विभाग ने आयुक्त लोक शिक्षण, आयुक्त राज्य शिक्षा केन्द्र, आयुक्त नगरपालिक निगम, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत को आवश्यक निर्देश जारी किये हैं। प्रदेश में शिक्षा का अधिकार अधिनियम में शासकीय शालाओं में छात्रों की संख्या के अनुपात में शिक्षकों की पद-स्थापना किये जाने के प्रावधान किये गये हैं। प्राथमिक शालाओं में 60 बच्चों तक 2 शिक्षक, 61 से 90 बच्चों तक 3 शिक्षक, 91 से 120 बच्चों तक 4 शिक्षक, 121 से 200 बच्चों तक 5 शिक्षक और एक प्रधानाध्यापक की पद-स्थापना का प्रावधान है। प्राथमिक शाला में 200 से अधिक बच्चे होने पर 1:40 के अनुसार प्रधानाध्यापक को छोड़कर शिक्षक रखे जाने का प्रावधान है। प्राथमिक शाला में शिक्षकों के अंतर्गत सहायक शिक्षक, सहायक प्राध्यापक, संविदा शाला शिक्षक श्रेणी-3 की स्वीकृत पदों के अनुरूप पद-स्थापना की जायेगी।

जिन शासकीय विद्यालयों में शिक्षा के अधिकार अधिनियम से अधिक शिक्षकीय अमला है, वहाँ से रिक्त पदों वाली शालाओं में पद-स्थापना की जायेगी। पद-स्थापना की कार्यवाही में अतिशेष शिक्षकों को शहरी क्षेत्र से ग्रामीण क्षेत्र में पदस्थ किया जायेगा। किसी भी स्थिति में ग्रामीण क्षेत्र से शहरी क्षेत्र में पद-स्थापना की कार्यवाही नहीं की जावेगी। अध्यापक संवर्ग को नियुक्तिकर्ता के निकाय के भीतर ही पदस्थ किया जायेगा एवं शिक्षक संवर्ग को जिलें में आवश्यकता वाली शालाओं में पदस्थ किया जायेगा। ऐसी माध्यमिक शालाएँ, जहाँ पूर्व से सहायक शिक्षक या सहायक अध्यापक पदस्थ है, उन शालाओं में विषय मान से स्नातक योग्यताधारी सहायक शिक्षक अथवा सहायक अध्यापक को माध्यमिक शालाओं में पदस्थ किया जायेगा। शासकीय माध्यमिक शाला में पदस्थ हायर सेकेण्डरी योग्यताधारी सहायक शिक्षक या सहायक अध्यापक को प्राथमिक शालाओं में रिक्त पदों पर पदस्थ किया जायेगा।

स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा तैयार नीति में यह भी तय किया गया है कि जिन शालाओं में बच्चों के नामांकन के आधार पर स्वीकृत पद संरचना से अधिक शिक्षक कार्यरत है और जहाँ शिक्षकों की कमी है जानकारी को अद्यतन कर एजुकेशन पोर्टल पर सार्वजनिक किया जायेगा। पोर्टल पर किसी बिन्दु पर यदि कोई आपत्ति है तो उसे संबंधित शिक्षक, अध्यापक द्वारा ऑनलाइन आवेदन देना होगा तथा आवेदन की एक प्रति संकुल प्राचार्य एवं विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी को भी हार्ड कॉपी में उपलब्ध करवाना होगा। प्राप्त आपत्ति पर समिति जिसमें विकासखंड शिक्षा अधिकारी, संकुल प्राचार्य एवं बी.आर.सी. कार्यालय के एम.आई.एस. को-ऑर्डिनेटर विचार करेंगे एवं आपत्ति का निराकरण कर, लिये गये निर्णय का प्रतिवेदन जारी करेंगे। निर्णय को एजुकेशन पोर्टल पर पब्लिक डोमेन में प्रदर्शित किया जायेगा। शालाओं में अधिक संख्या में पदस्थ अतिशेष अध्यापक, शिक्षक की सर्वप्रथम कॉउंसलिंग के माध्यम से स्वेच्छा से जाने के इच्छुक शिक्षकों के रिक्त स्थानों पर पद-स्थापना की जायेगी। इसके लिये अतिशेष अध्यापक, शिक्षक से 20 रिक्त स्थानों के विकल्प ऑनलाइन प्राप्त किये जायेगें। अतिशेष की गणना के अंतर्गत वरिष्ठता एवं विषयमान के आधार पर विषय शिक्षकों की गणना की जायेगी। अतिशेष शिक्षकों की गणना संस्था में पद-स्थापना दिनांक से वरिष्ठता के आधार पर की जायेगी। संस्था में पदस्थ दिनांक से वरिष्ठ शिक्षक को अतिशेष मानते हुए हटाया जायेगा। अध्यापक संवर्ग को प्रथमत: एवं उसके बाद शिक्षक संवर्ग को अतिशेष होने पर हटाया जायेगा।

नीति के अनुसार किसी भी स्थिति में दी गई व्यवस्था से अधिक शिक्षक किसी भी शाला में पदस्थ नहीं रहेंगे। इससे अधिक शिक्षक पदस्थ होने पर इन शिक्षकों का वेतन आहरित नहीं किया जा सकेगा। अध्यापक संवर्ग के वरिष्ट अध्यापक, अध्यापक तथा सहायक अध्यापक की पद-स्थापना नियुक्तिकर्ता निकाय के भीतर अन्य शालाओं में इस प्रक्रिया के अधीन की जायेगी। किसी भी स्थिति में अध्यापक संवर्ग की पद-स्थापना एक निकाय से दूसरे निकाय में नहीं की जा सकेगी। वरिष्ठता एवं विषयमान के आधार पर अतिशेष शिक्षकों की पद-स्थापना एजुकेशन पोर्टल के माध्यम से निम्न क्रम में की जायेगी। पुरूष, महिला, ऐसे पुरूष शिक्षक जिनकी सेवानिवृत्ति में एक वर्ष से कम समय शेष है, ऐसी महिला शिक्षक जिनकी सेवानिवृत्ति में एक वर्ष से कम समय शेष है, पति-पत्नि दोनों शासकीय सेवा में कार्यरत रहने पर, विधवा अथवा वैधानिक तलाकशुदा महिला शिक्षक, नि:शक्त कोटे के अंतर्गत नियुक्त पुरूष शिक्षक, नि:शक्त कोटे के अंतर्गत नियुक्त महिला शिक्षक, कैंसर, ब्रेन ट्यूमर, गुर्दा प्रत्यारोपण, ओपन हार्ट अथवा बायपास सर्जरी एवं पेरालिसिस ग्रसित पुरूष शिक्षक। कैंसर, ब्रेन ट्यूमर, गुर्दा प्रत्यारेपण, ओपन हार्ट अथवा बायपास सर्जरी एवं पेरालिसिस ग्रसित महिला शिक्षक।

प्राथमिक क्रम में एक से अधिक एक ही श्रेणी के कर्मचारी आवेदक है, तो जिसकी उम्र कम है उसे अतिशेष मानकर हटाया जायेगा। प्रत्येक बिन्दु में पहले अध्यापक संवर्ग को एवं उसके बाद शिक्षक संवर्ग को विचार में लिया जायेगा। अतिशेष शिक्षकों की पद-स्थापना अन्य शालाओं में रिक्त स्थान पर उनके द्वारा दिये गये 20 विकल्प के आधार पर उपरोक्त प्राथमिकता के विपरीत क्रम में पद-स्थापना की जायेगी। विकल्प नहीं देने की स्थिति में शिक्षक-विहीन एवं एक शिक्षकीय शालाओं में प्राथमिकता के विपरीत क्रम में पद-स्थापना में वरीयता के आधार पर पद-स्थापना ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से की जायेगी।

अतिशेष शिक्षकों के आदेश एजुकेशन पोर्टल से जनरेट किये जायेंगे। जिला अंतर्गत पद-स्थापना जिला शिक्षा अधिकारी, सहायक आयुक्त आदिवासी विकास के प्रस्ताव अनुसार जिला कलेक्टर के अनुमोदन के बाद सहायक अध्यापक, अध्यापक तथा वरिष्ठ अध्यापकों, को जिला पंचायत क्षेत्र में मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत, आयुक्त नगर पालिक निगम, मुख्य नगर पालिका अधिकारी, नगर पालिका परिषद, नगर पंचायत द्वारा तथा शिक्षक संवर्ग के जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा आदेश जारी किये जायेंगे। युक्ति-युक्तकरण के लिये निर्धारित इस नीति के किसी प्रावधान का पालन नहीं करते हुए यदि युक्ति-युक्तकरण की कार्यवाही की गई है तो जिला अंतर्गत पद-स्थापना के विरूद्ध अपील जिला कलेक्टर को प्रस्तुत की जायेगी तथा जिले के प्रभारी मंत्री के अनुमोदन से इसका निराकरण किया जायेगा। पद-स्थापना की समस्त कार्यवाही 15 अप्रैल से 10 मई 2017 तक होगी।

संविदा शाला शिक्षकों एवं गुरूजी के पद स्थानांतरणीय नहीं हैं। पद-स्थापना की यह नीति उनके संबंध में लागू नहीं होगी। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की अधिसूचना 9 अगस्त 2016 के अनुसार सहायक अध्यापक के लिये मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत को नियुक्तिकर्ता अधिकारी घोषित किया गया है। अत: सहायक अध्यापक की पद-स्थापना अतिशेष होने की स्थिति में जनपद पंचायत अंतर्गत होने के स्थान पर जिला पंचायत अंतर्गत होगी।

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