विनोद मिल मामले में HC से शिवराज सिंह सरकार को झटका

Thursday, April 13, 2017

इंदौर। उज्जैन में 20 साल पहले बंद हुई विनोद मिल मामले में शिवराज सिंह सरकार को हाईकोर्ट ने झटका देते हुए उसकी अपील खारिज कर दी है। अब इस मिल की जमीन को बेचकर ​4000 से ज्यादा कर्मचारियों को 67 करोड़ का भुगतान किया जाएगा। शिवराज सिंह सरकार ने इस मिल की जमीन पर अपना कब्जा बताया था जबकि यह मिल सिंधिया राज्य के समय दान दी गई थी। हाईकोर्ट की सिंगल बैंच ने 2004 में जमीन बेचकर मजदूरों को भुगतान करने का आदेश दे दिया था परंतु मप्र शासन ने अपील की। अब वो भी खारिज हो गई। 

इसके बाद से इसके 4353 मजदूर ग्रेजुएटी, वेतन और अन्य भुगतान के लिए भटक रहे हैं। मिल की करीब 82 बीघा जमीन को लेकर भी शासन और परिसमापक (ओएल) के बीच विवाद चल रहा था। मिल के मजदूर भी इसमें पक्षकार हैं। 12 जनवरी 2004 को सिंगल बेंच ने मिल की जमीन बेचने का आदेश दिया था। इसे चुनौती देते हुए शासन ने डिविजनल बेंच में अपील दायर की। बुधवार को जस्टिस एससी शर्मा और जस्टिस राजीवकुमार दुबे ने शासन की अपील खारिज कर दी। कोर्ट के इस फैसले के बाद मिल की जमीन बेचने का रास्ता साफ हो गया।

2012 में भी हो गया था फैसला 
जमीन को लेकर दायर शासन की अपील की सुनवाई के दौरान ही मजदूरों ने अपने भुगतान को लेकर हाई कोर्ट में अलग से याचिका दायर कर दी। 2012 में कोर्ट ने मजदूरों का 67 करोड़ रुपए का क्लेम स्वीकारते हुए मिल की संपत्ति बेचकर उन्हें इसका भुगतान करने का आदेश दे दिया। मिल की मशीनरी और अन्य संपदा बेचकर इसमें से करीब 17 प्रतिशत भुगतान 2012 में कर भी दिया गया।

बाकी रकम के लिए मजदूर सालों से कोर्ट के चक्कर काट रहे थे। मजदूरों की ओर से पैरवी करने वाले एडवोकेट धीरेंद्रसिंह पवार ने बताया कि सरकार की अपील खारिज होने के बाद मिल के जमीन बेचकर मजदूरों के किए जाने वाले 67 करोड़ के भुगतान को हरी झंडी मिल गई। अब परिसमापक जमीन बेचकर इसका भुगतान कर सकेंगे।

ग्वालियर स्टेट से मिली थी जमीन
पवार के मुताबिक मिल को 82 एकड़ जमीन ग्वालियर स्टेट से मिली थी। दान में मिली इस जमीन को वापस लेने का कोई प्रावधान नहीं था। यह शर्त जरूर थी कि मिल चाहे तो उसे लौटा सकती है। मिल बंद होने के बाद सरकार जमीन पर अपना कब्जा जताने लगी। सिंगल बेंच के फैसले के खिलाफ दायर सरकार की अपील 2004 से लंबित थी। कभी दस्तावेजों की कमी की वजह से तो कभी नंबर नहीं आने की वजह से इसकी सुनवाई टलती रही।

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