बढती महंगाई और असंतुष्ट वेतन भोगी | EMPLOYEE

Tuesday, April 18, 2017

राकेश दुबे@प्रतिदिन। देश के वेतन भोगी वर्तमान वेतन पद्धति को अच्छा नहीं मानते। वेतन भोगियों के बीच हाल ही में हुए एक सर्वेक्षण से पता चला कि 70 प्रतिशत से अधिक लोग अपनी आमदनी को लेकर खासे असंतुष्ट हैं। इन लोगों का मानना है कि उनकी सैलरी बाजार मानकों के अनुरूप नहीं है। एक छोटा सा तबका अलग सोच वाला भी है। करीब 28 प्रतिशत लोग यह तो मानते हैं कि बाजार मानकों के मुताबिक उनका वेतन ठीकठाक है, लेकिन वे भी संतुष्ट नहीं हैं।

सबका मानना है कि इसकी वजह है जिम्मेदारियों का बोझ। उनका मानना है कि उन पर जितना दायित्व डाल दिया गया है उसके मद्देनजर उनका वेतन कम है। यह बात सही है कि अपने वेतन से संतुष्ट व्यक्ति खोजना आज की दुनिया में लगभग नामुमकिन ही है। मगर किसी भी इंडस्ट्री में अगर वर्कफोर्स अपने काम की परिस्थितियों से या वेतन से एक हद से ज्यादा असंतुष्ट है तो यह उस इंडस्ट्री के लिए चिंता की बात हो जाती है। इस लिहाज से देखें तो दूसरी श्रेणी के असंतोष को, यानी उन लोगों को जो बाजार के मानकों से ज्यादा, पर अपने पैमानों पर कम कमाते हैं, थोड़ी देर के लिए टाला जा सकता है। मगर जो पहली श्रेणी है, यानी उन लोगों की जिनका वेतन बाजार के मानकों पर भी कम बैठता है, उनकी बात तो करनी ही पड़ेगी।

सरकारी सेवकों को तो सातवें वेतन आयोग के चलते अच्छी खासी बढ़ोतरी मिली ही, इस दबाव में प्राइवेट सेक्टर के भी कई क्षेत्रों में वेतन बढ़ाया गया। बावजूद इसके, अगर 70 प्रतिशत कर्मचारियों को लगता है कि उनका वेतन बाजार के मानकों के हिसाब से कम है तो इसकी एक बड़ी वजह है आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी। महंगाई दर के आंकड़े जो भी कहते हों, व्यावहारिक अनुभव यह है कि सामान्य इस्तेमाल की चीजों की कीमतें बढ़ी हैं। एक और बात यह है कि इस बढ़ोतरी में कई तरह की भिन्नताएं हैं। 

यानी एक वस्तु की कीमत एक जगह कुछ तो दूसरी जगह कुछ और है। बहरहाल, कर्मचारियों को हाथ आने वाली रकम और बाजार में जरूरी वस्तुओं पर खर्च होने वाली रकम के बीच कुछ तालमेल सुनिश्चित करना तो जरूरी है। चाहे इसकी पहल सरकार की पहल कर सकती है उपभोक्ता वस्तुओं की दरों तो देश में एक समान करने की कोशिश की जा सकती है। देश संगठित और असंगठित क्षेत्र के वेतन की समानता पर विचार किया जा सकता है। महंगाई की दरों के अनुरूप महंगाई भत्ता सभी क्षेत्रों में स्वत: बढ़ जाए, इसकी भी अभियंत्रिकी भी तैयार करना चाहिए।
श्री राकेश दुबे वरिष्ठ पत्रकार एवं स्तंभकार हैं।        
संपर्क  9425022703        
rakeshdubeyrsa@gmail.com
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