वारासिवनी मंडी घोटाला: सचिव ने पुलिस को दस्तावेज नहीं सौंपे

Thursday, April 6, 2017

आनंद ताम्रकार/बालाघाट। कृषि उपज मंडी वारासिवनी में कृषक भोजनालय में भोजन कूपन की आड़ में ठेकेदार मंडी कर्मचारियों अधिकारियों एवं मंडी समिति के अध्यक्ष की संलिप्तता से लाखों रूपयों का घोटाला प्रकाश में आया है। इस मामले से संबंधित विवेक ऐडे (विक्की) प्रो.ओमसांई कृषक भोजनालय वारासिवनी से 10 लाख 47 हजार 954 रूपये की वसूली किये जाने हेतु उसे अनेकों बार मंडी द्वारा सूचना पत्र भेजा गया था लेकिन ठेकेदार विक्की ऐडे ने राशि जमा नही कराई।

इस आधार पर मंडी सचिव द्वारा 18/12/2016 एवं 10 मार्च 2017 को थाना प्रभारी पुलिस थाना वारासिवनी को प्रथम सूचना पत्र प्रस्तुत किया गया था। जिसके आधार पर वारासिवनी पुलिस थाना प्रभारी द्वारा मामले से संबधित दस्तावेज प्रस्तुत करने हेतु मंडी सचिव को पत्र लिखा गया लेकिन मंडी सचिव ने आज तक संबंधित दस्तावेज पुलिस को उपलब्ध नही कराये। यह घोटाला मंडी समिति के संलिप्त कर्मचारियों, अधिकारियों की सांठगांठ एवं वरिष्ठ अधिकारियों के संरक्षण में किया गया है इस लिये मंडी समिति संलिप्त लोगों को बचाने में भी जुटी हुई है।

यह उल्लेखनीय है कि मंडी समिति वारासिवनी के सचिव द्वारा दिनांक 8/9/2013 पत्र क्रमांक 1004 के माध्यम से सूचना के अधिकार के तहत जानकारी उपलब्ध कराई थी की ओमसांई भोजनालय कृषि उपज मंडी समिति वारासिवनी के प्रोप्राइटर विवेक ऐेडे द्वारा मंडी प्रागण में ओमसांई कृषक भोजनालय मंडी वारासिवनी के परिसर में केंटिन उपलब्ध ना होने के कारण मंडी समिति के कृषक विश्राम गृह में जिसका क्षेत्रफल 10ग20 वर्गमीटर के कमरे में  चलाई जा रही थी जिसमें 5 बडी टेंबल और बेंच्र लगी हुई थी जिसमें कृषक भोजन करते थे।

जानकारी में यह भी अवगत कराया गया है कि निविदा स्वीकृति के पश्चात रंगलाल बिसेन प्रभारी सचिव, महेन्द्र कुमार वैध सचिव, सैयाद मोहम्मद अली सचिव, श्रीमति अर्चना ठाकूर सचिव के कार्यकाल में ठेकेदार विवेक ऐडे को भुगतान किया गया है एवं भुगतान का अनुमोदन तत्कालीन अध्यक्ष अजय देवनाथ बिसेन द्वारा किया गया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार इस मामले में संलिप्त लोगों द्वारा सांठगांठ करते हुये मात्र अनुबंध पत्रों के आधार पर 30 लाख रूपये से अधिक का भुगतान लगभग 2 लाख से ज्यादा फर्जी कूपन की आड़ में कर दिया गया जबकि मंडी में उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर मात्र 40 हजार कूपन ही छापवाये गये है। इस प्रकार अनुबंध पत्रों की आड में कृषकों के नाम से कूपन जारी कर बिना भोजन करवाये लाखों रूपये की राशि भुगतान स्वरूप ठेकेदार को जारी कर दी गई।

यह उल्लेखनीय है कि संबंधित ठेकेदार के पास ठेका अवधि में भोजन कराये जाने के लिये आवश्यक भोजन सामग्री, कर्मचारी, तथा लकडी इत्यादि से संबंधित कोई हिसाब किताब ही नही है। मंडी समिति अध्यक्ष विजय सहारे ने अवगत कराया की पुलिस द्वारा मांगे गये समस्त दस्तावेज उपलब्ध कराये जा रहे है।

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