भारत सडक हादसों का सिरमौर

Wednesday, April 12, 2017

राकेश दुबे@प्रतिदिन। दुनिया भर में सबसे ज्यादा सड़क हादसे भारत में होते हैं। इनमें मारे जाने और घायल होने वालों की संख्या भी सर्वाधिक यहीं है। जैसा कि खुद केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने पिछले हफ्ते लोकसभा में बताया, भारत में सालाना पांच लाख सड़क हादसे होते हैं जिनमें डेढ़ लाख लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ता है। घायल होने वालों की तादाद इससे कई गुना अधिक होती है। यों अल्कोहल की अनेक बुराइयां गिनाई जा सकती हैं, पर इसका सबसे घातक प्रभाव सड़क यात्रा में दिखता है। नशे में गाड़ी चलाने वाला दूसरों की जान के लिए भी खतरा होता है और अपने लिए भी। बिना किसी इरादे के वह कुछ ऐसा कर जा सकता है जो अपराध में घटित होता है। इस सब के बावजूद शराब पीकर गाड़ी चलाने की प्रवृत्ति पर नकेल कसने की गंभीर कोशिश नहीं हुई।

हालांकि मोटर वाहन अधिनियम, 1988 में शराब पीकर या उसके प्रभाव में गाड़ी चलाने का दोषी पाए जाने पर जुर्माने और जेल भेजने, दोनों का प्रावधान था। पर संभावित सजा की अवधि बहुत कम थी और जुर्माना भी अब के लिहाज से बहुत कम था। इसलिए देर आयद दुरुस्त आयद की तर्ज पर केंद्र ने तीस पहले बने अधिनियम में संशोधन करने का फैसला किया है। पिछले हफ्ते लोकसभा में पेश किए गए संशोधन विधेयक के मुताबिक शराब पीकर गाड़ी चलाने पर दस हजार रु. जुर्माना भरना पड़ेगा। जुर्माने की राशि बढ़ाने का मकसद साफ है। पर मकसद केवल कानून को और सख्त बना देने से नहीं सधता।

भारत में सड़क सुरक्षा की बाबत दो मुख्य समस्याएं रही हैं। एक यह कि यहां सड़क पर चलने का सलीका विकसित नहीं हो पाया है। अधिकतर लोग न तो यातायात संबंधी नियम-कायदों का लिहाज करते हैं न उनसे डरते हैं। इस मानसिकता का एक बड़ा कारण भ्रष्टाचार है। अधिकारी अक्सर कुछ ले-देकर छोड़ देते हैं। एक समय नशे में गाड़ी चलाने वालों में अधिकतर व्यावसायिक वाहनों के ही चालक होते थे। मगर शहरीकरण और शराब की उपलब्धता बढ़ने से शराब पीकर गाड़ी चलाने की प्रवृत्ति का विस्तार हुआ है। नियम-कायदों की अनदेखी ड्राइविंग लाइसेंस की मंजूरी में भी बड़े पैमाने पर देखी जाती है। बड़ी संख्या में अपात्रों के भी लाइसेंस बन जाते हैं। रही-सही कसर सड़कों की खराब हालत और यातायात-नियमों के लचर क्रियान्वयन से पूरी हो जाती है। सरकारें समय-समय पर सड़क सुरक्षा सप्ताह मनाने जैसी कवायद जरूर करती रही हैं, पर उनमें औपचारिकता और आडंबर का ही अंश ज्यादा दिखा है।
 श्री राकेश दुबे वरिष्ठ पत्रकार एवं स्तंभकार हैं।        
संपर्क  9425022703        
rakeshdubeyrsa@gmail.com
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