सीरिया के कारण 3rh WORLD WAR के हालात, महाशक्तियों के बीच तनाव बढ़ा

Monday, April 10, 2017

नई दिल्ली। सीरिया के कारण सारी दुनिया तीसरे विश्वयुद्ध की तरफ तेजी से आगे बढ़ रही है। दुनिया की 2 महाशक्तियां अमेरिका और रूस अब एक दूसरे के आमने-सामने है। सीरिया की असद सरकार के बचाव के लिए रूस ने अपना एक जंगी पोत भी सीरिया भेज दिया है। वहीं अमरीका के विदेश मंत्री रेक्स टिलरसन ने सीरिया में विद्रोही ठिकानों पर हुए रासायनिक हमले के लिए रूस को ज़िम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा कि रूस इस बात पर सहमत हुआ था कि वह आश्वस्त करेगा कि सीरिया के रासायनिक हथियारों का ज़ख़ीरा खत्म हो जाए लेकिन ऐसा नहीं हुआ। दुनिया की इन दो बड़ी शक्तियों के आमने-सामने आ जाने के बाद ये कयास लग रहे हैं कि क्या दुनिया तीसरे विश्वयुद्ध के मुहाने पर है। अगर ऐसी स्थिति आती है तो कौन देश किसके साथ होगा ये सवाल भी कौंध रहा है।

अमेरिका के साथ कौन-कौन से देश?
सीरिया में जब 6 साल पहले अरब स्प्रिंग के प्रभाव में विद्रोह शुरू हुए थे तभी से अमेरिका असद विरोधी समूहों के पक्ष में खड़ा हो गया था। अरब का मामला है तो उसके पक्ष में सबसे पहले खड़ा दिखता है इस्राइल। इसा इसके अलावा नैटो के सहयोदी देश- ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी समेत कई देश अमेरिका के साथ हर अंतरराष्ट्रीय मामले पर साथ दिखते हैं। वहीं सीरिया का पड़ोसी देश तुर्की पहले से ही अमेरिका के साथ है। सीरिया बॉर्डर पर रूसी विमान के मार गिराने के कारण रूस के तुर्की का तनाव पहले से ही बढ़ा हुआ है। अमेरिका के सहयोगी ग्रुप-7 के सदस्य देशों के विदेश मंत्री इटली में मुलाकात कर रहे हैं। इस मीटिंग में इस बात पर चर्चा की जाएगी कि रूसी सरकार पर सीरियाई राष्ट्रपति बशर-अल-असद से दूरी बनाने का दबाव किस तरह बनाया जाए।

रूसी खेमे में कौन-कौन से देश शामिल
रूस, ईरान और सीरिया की सरकार अगले अमरीकी हवाई हमले की स्थिति में जवाब देने की मुद्रा में दिख रही है. अमेरिका बीते हफ्ते सीरिया के एयरबेस पर हमला कर चुका है. अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप अपने एक भाषण में सीरियाई राष्ट्रपति को तानाशाह तक कह चुके हैं. सीरियाई सरकार के मुख्य सैन्य सहयोगी रूस ने इन हमलों को अंतरराष्ट्रीय मानदंडों का उल्लंघन करने वाली और मनगढ़ंत आधार पर की गई आक्रामक कार्रवाई बताया. रूसी सरकार के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोफ़ ने अमरीका और रूस के पहले से खस्ताहाल संबंधों के गंभीर रूप से बिगड़ने की चेतावनी दी. हालांकि, रूस की संसद ड्यूमा ने संकेत दिए हैं कि अमरीकी कार्रवाई के बाद रूस अपने हमले तेज़ नहीं करेगा.

चीन और भारत की स्थिति अभी स्पष्ट नहीं 
चीनी सरकार ने सीरिया में बिगड़ते हालात पर चिंता जताई है. चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता ने कहा कि किसी देश, संस्था, व्यक्ति की तरफ़ से किसी भी हालत में रासायनिक हथियारों के इस्तेमाल का चीन विरोध करता है लेकिन सबसे ज़रूरी है कि सीरिया की हालत को और न बिगड़ने दिया जाए.

भारत ने सीरिया मामले पर कोई स्पष्ट रुख तो नहीं दिखाया है क्योंकि अमेरिका के साथ भी भारत के अच्छे रिश्ते हैं और रूस सबसे अहम सहयोगी है. वहीं सीरिया के साथ भी भारत के परंपरागत संबंध रहे हैं. हालांकि, भारत ने सीरिया, लीबिया जैसे देशों में अपने नागरिकों के जाने पर ट्रैवल एजवाइजरी जारी की है. भारत अमेरिका और सोवियत संघ के बीच शीत युद्ध के काल में भी तटस्थता की नीति को अपनाता रहा और किसी भी गुट में शामिल नहीं हुआ था.

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