मप्र: मेडिकल कॉलेजों को NEET के जाल से बाहर ​रखने की प्लानिंग

Monday, March 6, 2017

भोपाल। मप्र में मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए व्यापमं घोटाला सीबीआई जांच की जद में है। सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुना दिया है कि सभी कॉलेजों में एडमिशन नीट के जरिए ही होंगे परंतु मप्र के अफसरशाही ने नीट के जाल से बाहर निकलने की युक्ति खोज निकाली है। अब सभी कॉलेजों को ऑटोनामस कर दिया जाएगा। इस तरह से वो नीट की शर्तों से मुक्त हो जाएंगे और एडमिशन अपनी मर्जी के अनुसार परीक्षा कराकर ले सकेंगे। 

रविवार को चिकित्सा शिक्षा विभाग के आयुक्त मनीष रस्तोगी और सभी मेडिकल कॉलेजों के डीन की बैठक भी हुई, जिसमें कानून के प्रावधानों पर चर्चा की गई। रास्ता खोज लिया गया कि कैसे सुप्रीम कोर्ट और नीट के झंझट से बचा जाए। अधिकारियों के मुताबिक आईआईटी की तरह ऑटोनामस बनाने से मेडिकल कॉलेज अपने स्तर पर फैसला ले सकेंगे। इससे वो पूरी तरह से आजाद हो जाएंगे। एडमिशन से लेकर भर्ती और खरीदी तक हर किस्म की आजादी मिल जाएगी। 

यह समस्याएं गिनाईं 
अधिकारियों के मुताबिक अभी मेडिकल कॉलेजों में भर्ती या खरीदी के लिए राज्य सरकार की अनुमति लेनी होती है। इससे फैसले लेने में देरी होती है और व्यवस्थाएं बिगड़ती है। ऑटोनामस बॉडी बनने से कॉलेज की गवर्निंग बॉडी सभी फैसले लेगी। कॉलेज अपने हिसाब से विभिन्न् प्रकार की जांच और इलाज की फीस तय कर सकेंगे।

ये लालच दिखाए गए 
इससे उनकी आमदनी बढ़ेगी और डॉक्टरों को ज्यादा तनख्वाह मिलेगी। सभी मेडिकल कॉलेजों को एक अलग बॉडी कॉरपोरेट बनाया जाएगा। इसके साथ ही एक राज्य स्तरीय संस्था बनाई जाएगी, जो इन मेडिकल कॉलेजों पर नियंत्रण रखेगी। मेडिकल कॉलेजों की फीस एक जैसी होगी, अभी कॉलेजों में अलग-अलग फीस है।

ये है मुद्दे की बात 
सूत्रों के मुताबिक मेडिकल कॉलेज को ऑटोनामस बनाने के बाद राज्य के मेडिकल कॉलेजों की परीक्षाएं भी अलग से हो सकती हैं। एम्स और पीजीआई मेडिकल कॉलेजों की तर्ज पर ये परीक्षाएं हो सकती हैं। अभी राज्य के मेडिकल कॉलेजों में नीट के जरिए प्रवेश मिल रहा है। याद दिला दें कि मप्र में 1 करोड़ रुपए तक मेडिकल सीटें बेचने के आरोप लग चुके हैं। घोटाला प्रमाणित हो चुका है। इन्हीं समस्याओं के चलते सुप्रीम कोर्ट ने नीट का प्रावधान किया परंतु अब सुप्रीम कोर्ट का भी तोड़ निकाल लिया गया। 

मनमाना इलाज का खर्च तय कर सकेंगे 
मेडिकल कॉलेजों को ऑटोनामस का दर्जा देने के बाद मेडिकल कॉलेजों को जांच और इलाज का खर्च अपने हिसाब से तय करने की छूट मिलेगी। सूत्रों के मुताबिक ऐसे में कॉलेज में सुविधा बढ़ाने के लिए कॉलेजों को आमदनी बढ़ानी होगी। इसके लिए कॉलेज अस्पताल में होने वाली जांच और इलाज के खर्चे में बढ़ोतरी कर सकता है।

इनका कहना है
अभी इस कानून पर विचार चल रहा है। कई मंजूरियां बाकी हैं। इस संबंध में एक ही बैठक हुई है।
मनीष रस्तोगी, आयुक्त, चिकित्सा शिक्षा विभाग

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