कांग्रेस MLA RAMNIWAS RAWAT: बाहरी आदिवासियों का मूलनिवासी बनवाना चाहते हैं

Saturday, March 11, 2017

भोपाल। सरकार पर सबसे ज्यादा सवाल उठाने वाले कांग्रेस के धाकड़ विधायक एवं ज्योतिरादित्य सिंधिया केंप के दमदार नेता रामनिवास रावत दूसरे राज्यों के आदिवासियों को मप्र का मूलनिवासी बनवाना चाहते हैं। इसके लिए उन्होंने विधानसभा में प्रश्न लगाकर दवाब भी बनाया परंतु जब जांच की गई तो पता चला कि वो सभी बाहरी हैं और आरक्षण का लाभ लेने के लिए मप्र आए हैं। 

पत्रकार अमरनाथ गोस्वामी की रिपोर्ट के अनुसार पिछले तीन साल में श्योपुर जिले में 2358 लोगों ने मूल निवासी प्रमाण पत्र बनवाने के लिए आवेदन दिया। जब जांच की गई तो 1566 आवेदक जिला बांसवाड़ा राजस्थान व दाहोद गुजरात के मूल निवासी पाए गए। इसके अलावा 554 आवेदक मप्र के धार, कुक्षी, सरदारपुर, झाबुआ, पेटलावद, मेघनगर, आलीराजपुर, भावरा, थांदला, जोबट, कठ्ठीवाड़ा, रतलाम आदि क्षेत्रों के होने पर संबंधित अनुविभागीय अधिकारी राजस्व को भेजे गए हैं।

ज्ञात हो कि मप्र में मूल निवासी होने की पुष्टि के लिए संबंधित के परिवार की वर्ष 1950 की निवास स्थिति देखी जाती है। ये जानकारी मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा विधानसभा में शुक्रवार को दिए गए लिखित जवाब में सामने आई है। सवाल रामनिवास रावत ने लगाया था।

जवाब में बताया गया कि पिछले तीन साल में श्योपुर में 4, कराहल में 2347, विजयपुर में 7 आवेदकों सहित कुल 2358 आवेदकों ने मप्र का मूल निवासी बनने आवेदन किया। इनमें से जांच के बाद 238 आवेदकों के जाति प्रमाण पत्र बनाए गए।

सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा
रामनिवास रावत ने प्रश्न लगाते हुए पूछा था कि श्योपुर जिले में निवासरत भील, भिलाला एवं पटेलिया अनुसूचित जनजाति वर्ग के आवेदकों के मूल निवासी प्रमाण पत्र क्यों नहीं बनाए जा रहे? उनका कहना था कि प्रमाण पत्र न बनने से ये लोग सरकारी नौकरी में आरक्षण व शासन की अन्य योजनाओं के लाभ से वंचित हैं।

ये है हकीकत 
क्षेत्र से जुड़े जानकारों के अनुसार मप्र व छत्तीसगढ़ के विभाजन के बाद मप्र में अनुसूचित जाति संवर्ग के लोगों की संख्या सीमित रह गई है। इसके चलते शासकीय नौकरी हो या कॉलेजों में प्रवेश का मामला हो, इस संवर्ग के लोगों को आसानी से नौकरी मिल जाती है। कई बार तो सीटें भी खाली रह जातीं हैं। यही बात दूसरे प्रदेश के अनुसूचित जन जाति संवर्ग के लोगों को मप्र खींच कर ला रही है। दूसरे प्रदेश में अनुसूचित जाति संवर्ग की संख्या प्रदेश की तुलना में ज्यादा होने से वहां उन्हें नौकरी या प्रवेश का आसान रास्ता नहीं मिलता।

इस शार्टकट के फेर में राजस्थान व गुजरात के तमाम आदिवासी किसी न किसी तरह मप्र का आदिवासी बनने के फेर में हैं। यही कारण है कि हर साल बड़ी संख्या में दूसरे प्रदेशों से आने वाले राजस्थान से सटे श्योपुर जिले में कुछ समय रहने के बाद यहां का मूल निवासी बनने आवेदन कर रहे हैं।

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