HIGH COURT जज ने सुप्रीम कोर्ट के 7 न्यायाधीशों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया

Friday, March 17, 2017

कोलकाता। पश्चिम बंगाल के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) सुरजीत कर पुरकायस्थ ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर शुक्रवार को कलकत्ता हाई कोर्ट के जस्टिस सीएस कर्नन को वारंट सौंप दिया। अवमानना मामले में सुप्रीम कोर्ट से जारी जमानती वारंट मिलने के बाद जस्टिस कर्नन ने राजारहाट न्यूटाउन स्थित निवास पर ही "अदालत" बिठाकर अपने खिलाफ जारी वारंट को खारिज कर दिया। इसके साथ ही वारंट जारी करने वाले सुप्रीम कोर्ट की सात सदस्यीय पीठ के सभी न्यायाधीशों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का आदेश भी दे डाला।

इससे पहले डीजीपी कोलकाता पुलिस आयुक्त राजीव कुमार, विधाननगर पुलिस आयुक्त ज्ञानवंत सिंह व एडीजी (सीआइडी) समेत कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों एवं कर्मियों के साथ जस्टिस कर्नन के निवास पर पहुंचे और उन्हें सुप्रीम कोर्ट की ओर से गत 10 मार्च को जारी किया गया जमानती वारंट सौंपा।

वारंट के अनुसार जस्टिस कर्नन को 31 मार्च को सुप्रीम कोर्ट में हाजिर होना है। हालांकि जस्टिस कर्नन 10 हजार रुपये के निजी मुचलके पर जमानत पा सकते थे। देश के न्यायिक इतिहास में यह इस तरह का पहला मौका है।

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस कर्नन को अवमानना के मामले में गत 13 फरवरी को अदालत में हाजिर होने का निर्देश दिया था। इस पर जस्टिस कर्नन ने उलटे मामले की सुनवाई कर रहे सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जेएस खेहर व छह अन्य न्यायाधीशों के खिलाफ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार रोकथाम कानून 1989 के तहत मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया और अदालत में हाजिर भी नहीं हुए। उन्होंने आरोप लगाया कि दलित होने के कारण उन्हें निशाना बनाया जा रहा है।

सुप्रीम कोर्ट के जजों पर चले मुकदमा
जस्टिस कर्नन के अनुसार, हाई कोर्ट के वर्तमान जज के खिलाफ इस तरह से वारंट जारी नहीं किया जा सकता। उन्होंने शुक्रवार को कहा-"मेरे खिलाफ जमानती वारंट जारी कर सुप्रीम कोर्ट ने पूरी दुनिया के सामने खुद को हंसी का पात्र बना लिया है। सात सदस्यीय पीठ के सातों न्यायाधीश कानून नहीं जानते। सुप्रीम कोर्ट अपना दिमाग नहीं लगाता। यही कारण है कि न्याय व्यवस्था पर लोगों का विश्वास दिन-ब-दिन कम होता जा रहा है।

सातों न्यायाधीशों को इस्तीफा देना होगा और उनके खिलाफ मुकदमा चलाया जाना चाहिए। मैं अपने आदेश के सात दिनों के अंदर न्यायाधीशों से 14 करोड़ रुपये की मानहानि राशि की मांग करता हूं। मैं इस मामले में भी कानूनी परामर्श ले रहा हूं। मैंने सात न्यायाधीशों की पीठ को पत्र लिखकर मान्य कारण बताकर वारंट को खारिज कर दिया है।" उन्होंने इसके लिए आठ मार्च से अपने न्यायिक और प्रशासनिक कार्यों पर लगी रोक को भी एक प्रमुख कारण बताया है।

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