पुलिसवाले ने फोन करके दरवाजा खुलवाया, लड़की किडनैप, रेप की कोशिश

Wednesday, March 15, 2017

ग्वालियर। बेहट में 10 वीं के छात्रा के दादा के मोबाइल पर सिपाही के नंबर से कॉल कर दरवाजा खुलवाया। किशोरी के दरवाजा खोलते ही घर के बाहर खड़े चार लोग अपहरण कर किशोरी का मुंह दबाकर अपहरण कर राहुली के जंगल में ले गए। आरोपियों ने किशोरी के साथ दुष्कृत्य का प्रयास किया लेकिन इसी बीच पुलिस के सायरन की आवाज सुनकर जंगल में छोड़कर भाग गए। ये आरोप किशोरी व उसके माता-पिता ने लगाया है। 

एफआरबी में तैनात सिपाही राघवेंद्र का कहना है कि किशोरी के घर उसका आना-जाना अवश्य है। लेकिन उसे लड़की गुंजना में सड़क पर रोती मिली थी। घटना के बाद परिवार के लोगों ने थाने के स्टाफ पर धमकाने का भी आरोप लगाया है। इस पूरे मामले की जांच सीएसपी (आईपीएस) वाहिनी सिंह कर रही है।

बेहट में गांव में रहने वाले 10 वीं के छात्रा व उसके माता-पिता ने मंगलवार की दोपहर को महिला थाने पहुंचकर घर से अपहरण कर दुष्कृत्य के प्रयास की घटना बताई। घटना में पुलिस के जवानों के नाम आते ही सीएसपी वाहिनी सिंह भी महिला थाने पहुंच गईं। उन्होंने किशोरी से बंद कमरे में बात कर घटना की संबंध में पूछा। और मोबाइल पर रिकॉडिंग भी की।

दादा के मोबाइल पर कॉल दरवाजा खुलवाया
किशोरी व उसके माता-पिता ने बताया कि रात में जमाई राजा नाटक देखने के बाद परिवार के लोग सोने चले गए। किशोरी का बुधवार का पेपर होने के कारण वह पढ़ रही थी। रात 11 बजे के लगभग बीएसएफ से हवलदार के पद से रिटायर उसके दादा के मोबाइल पर सिपाही राघवेंद्र के सरकारी नंबर से कॉल आया। पहले उसके बड़ी बहन ने कॉल रिसीव नहीं किया। लेकिन दूसरी तरफ से कोई जवाब नहीं दिया। दूसरी बार कॉल आने पर किशोरी ने रिसीब ने किया। कॉल करने वाले व्यक्ति ने कहा कि उन्हें दादा से जरूरी बात करनी हैं, दरवाजा खोल दो। किशोरी ने दादा के बगैर बताए दरवाजा खोलने चली गईं।

दरवाजा खोलते मुंह पकड़कर जंगल में ले गए
किशोरी ने बताया कि उसके दरवाजे खोलते ही चार लोग सामने आए। जो कि मुंह पर कपड़ा बांधे हुए थे। एक ने हाथ से मुंह दबा दिया और दो लोगों ने उसके हाथ-पैर पकड़कर पुरानी सी बड़ी गाड़ी में डालकर जंगल में ले गए।

पुलिस का सायरन सुनते ही छोड़कर भाग गए
किशोरी ने बताया कि चारों लोग उसके साथ गलत काम करने का प्रयास कर रहे थे। तभी पुलिस के सायरन(100 डायल) के सायरन की आवाज सुनकर उसे छोड़कर भाग गए। राहुली के जंगल से बाहर आई। इसी बीच एफआरबी आ गई। जिसमें राघवेंद्र था। एफआरबी के पिछली सीट पर उसे बैठा लिया। इसी बीच ये लोग आपस में बात कर रहे थे। ये हमारा भी नाम ले सकते हैं। अपने पास इसके गायब होने की अधिकारिक सूचना भी नहीं है। ये चार लोगों पर आरोप लगा रही है। अपन को भी फंसा सकती है। इसके बाद इन लोगों ने सड़क पर ये कहकर उतार दिया कि यहीं खड़ी रहना अभी आते हैं। उसके बाद एफआरबी उसके दादा को साथ लेकर आई।

हवलदार सहित 2 लोग आए
सड़क पर किशोरी को खड़ा देखकर बेहट थाने में पदस्थ हवलदार व एक अन्य व्यक्ति आया। उसने उनको भी सबकुछ बताया। हवलदार का कहना था कि पहले इसकी सूचना 100 डायल को दे दो।

सिपाही का ही नंबर निकला
पुलिस अधिकारियों ने किशोरी द्वारा बताए नंबर पर कॉल करने पर वह सिपाही राघवेंद्र का निकला। महिला पुलिस अधिकारी इस बात से आश्चर्यचकित थी कि किशोरी का सिपाही का नंबर कैसे याद है। उसकी याददाश्त को परखने के लिए भाई का नंबर पूछने पर नहीं बता पाई।

सिपाही ने ये दी सफाई
सिपाही राघवेंद्र का कहना है कि इनका घर थाने से एक किलोमीटर की दूरी पर होने के कारण थाने के स्टाफ का इनके घर आना-जाना रहता है। चाय बगैर पीते में हैं। मैं भी जाता हूं। किशोरी सड़क पर रोती मिली थी। वह उसे घर छोड़ने आ रहा था लेकिन इसके घर के बाहर लोगों को देखा। जिनके हाथों में डंडे व लाठियां थीं। कही घरवाले उसी पर आरोप नहीं लगाने लगे। क्योंकि किशोरी के संबंध में उनके पास कोई अधिकारिक सूचना नहीं थी। इसलिए गाड़ी बैक कर ले गए। और किशोरी को सड़क पर उतारकर उसके घर गए। जहां उसके दादा ने किशोरी के गायब होने के संबंध में बताया और कहा कि गाड़ी का पेट्रोल भी खत्म हो गया। वह दादा को साथ लेकर गए और किशोरी को लाकर उसके घर छोड़ा।

धमकी देकर गए पुलिस वाले
माता-पिता का आरोप है कि किशोरी के मिलने के बाद पुलिस कर्मी धमकी देकर गए कि अब किसी से कुछ मत कहना। लड़की घर आ गई है। अब जाकर सो जाऊ। लड़की नींद में कहीं चलीं गईं थीं। अगर शिकायत की तो जान से मार देंगे। पुलिस छह घंटे से पड़ताल कर रही है। पुलिस पता कर रही है कि वाकई सिपाही के मोबाइल से कॉल आया था कि नहीं।

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