भारतीय उपभोक्ता और ई कामर्स बाज़ार

Monday, February 27, 2017

राकेश दुबे@प्रतिदिन। अमेरिकी लेखक राबर्ट हेन्लिन ने कहा है कि खैरात में मिले लंच जैसी कोई चीज नहीं होती। ”भारत में फ्लिपकार्ट, अमेजन और स्नैपडील जैसी ई-कॉमर्स कंपनियों का कारोबार इसलिए परवान चढ़ा, क्योंकि उनकी साइट पर भारी छूट दी जाती रही है। अमेजन डॉट इन की तरक्की में उसकी मूल कंपनी का भी हाथ है, जबकि फ्लिपकार्ट और स्नैपडील के साथ ऐसी बात नहीं रही है। इन दोनों कंपनियों को दूसरी बड़ी कंपनियों से निवेश लेना पड़ा, जिनकी नजर भारत, खासतौर से इसके विशाल खुदरा बाजार पर रही है।

वहीं उबर और ओला ड्राइवरों को खुद से जुड़ने को प्रेरित करती हैं। इसके लिए वे उन्हें कार खरीदने में मदद करती हैं और एक खास किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद प्रोत्साहन (इन्सेंटिव) देने का वादा भी करती हैं। ये कंपनियां अपने ग्राहकों को भी किफायती कीमत पर यात्रा-सुविधा का भरोसा देती हैं। इन दोनों कंपनियों में कई अन्य बड़ी कंपनियों का निवेश है। 

अब बात रिलायंस जियो की। इसने पिछले वर्ष सितंबर में अपने 4-जी टेलीकॉम नेटवर्क की शुरुआत की। इसके ग्राहकों की संख्या बढ़कर अब 10 करोड़ से ज्यादा हो गई है, जो स्वाभाविक तौर पर इसके ‘सब कुछ 31 मार्च तक मुफ्त’ के ऑफर की वजह से है। कंपनी की यह तरक्की इस बात का भी संकेत है कि भारतीय उपभोक्ता इंटरनेट डाटा (ज्यादातर वीडियो) के लिए काफी उत्सुक रहते हैं। खासकर जब तक वे मुफ्त में मिलते हैं।

अब इन कंपनियों में से कुछ अपनी रणनीतियां बदलने लगी हैं, तो कुछ उनके नक्शेकदम पर चलने की कोशिश में हैं। और जो फिलहाल ऐसा नहीं कर रही हैं, वे भी जल्द इसी राह चल पड़ेंगी। चूंकि इन तमाम कंपनियों में अंदाजन 40 अरब अमेरिकी डॉलर का निवेश है, इसलिए अरबों डॉलर का सवाल यह है कि क्या इन्हें उम्मीद के अनुरूप कीमत अदा करने वाले उपभोक्ता भरपूर तादाद में मिल सकेंगे?

ई-कॉमर्स कंपनियों के पक्ष में काफी कुछ बातें हो रही हैं। सबसे पहली बात तो पहुंच की है। आज कोई भी शख्स ऑनलाइन खरीदारी कर सकता है, बशर्ते उसके पास इंटरनेट या 3जी है, जो आमतौर पर उसे बाजार में नहीं मिलतीं या फिर उन्हें खोजने के लिए उसे कई दुकानों के चक्कर काटने पड़ते हैं। ऑनलाइन खरीदारी में उसे ट्रैफिक से भी जूझना नहीं पड़ता और पार्किंग की भी कोई समस्या नहीं झेलनी पड़ती। दुकान में खरीदारी में सहयोग न कर पाने वाले सेल्समैन भी एक समस्या हैं। लिहाजा ई-कॉमर्स कंपनियां यह उम्मीद पाल रही हैं कि टिकाऊ कारोबार के लिए उनके सामने कई रास्ते हैं। 4-जी नेटवर्क वाला स्मार्टफोन हो। कीमतों की रेंज व उत्पादों में विविधता भी एक मसला है। उपभोक्ता उन चीजों को भी ऑनलाइन ढूंढ़ सकता है। 
श्री राकेश दुबे वरिष्ठ पत्रकार एवं स्तंभकार हैं।        
संपर्क  9425022703        
rakeshdubeyrsa@gmail.com
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