सामान्य तथा अनारक्षित वर्ग के ठलुआ कर्मचारियों के नाम खुलाखत

Friday, December 2, 2016

सभी महानुभवों को शुभ प्रभात,
मैं आज मुखातिब हूँ सामान्य तथा अनारक्षित वर्ग के ऐसे लोगों से जो सपाक्स की मुहिम से दूरी बनाकर स्वयं को होशियार मान बैठे हैं, उनका मानना है जो होगा सबके लिये होगा। हम अपना समय और पैसा क्यूँ बर्बाद करें।

मै ऐसे बुद्धि जीवियों को बताना चाहूँगा कि ऐसे ही ख्यालात अगर भगत सिंग और चन्द्र शेखर आजाद के भी होते तो आप स्वतन्त्र भारत मे सांस नहीं ले रहे होते, वैस सच्चाई यह भी है कि इंसान की मौत सांसों की मोहताज नहीं होती, क्यूँकि वो तभी हो जाती है जब इंसान अपना ज़मीर खो देता है। डर कर या किसी लोभ वश, अन्याय के खिलाफ तथा अपना हक पाने की जंग मे समाज का साथ ना देना भी ज़मीर खोने की श्रेणी मे आता है।

आपको स्वतन्त्रता की भी परवाह करने की विशेष आवश्यकता यूँ नहीं है, क्यूँकि सही मायनों मे वो आपके लोगों को प्राप्त ही नहीं है, वर्ग विशेष के लिये सरकारों द्वारा बनाये जाने वाले नित नये अलग अलग कानून अपने ही देश मे इस अनारक्षित वर्ग के लोगों को दोयम को दर्जे के नागरिक का जीवन जीने को मजबूर करते है। 

आप उपरोक्त कथन की मिमांसा करें अथवा कोई अमल का मन बनायें, ऐसी मेरी कतई मंशा नहीं है, मैं सिर्फ आपसे इतना कहना चाहता हूँ आप अपने इस कृत्य के लिये अपनी संतानो को दिया जाने लायक ज़बाब सोच कर रखें।

शोऐब सिद्दिकी
जय हिन्द, जय सपाक्स

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