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EURO BOND INDUSTRIES: बिना नोटिस 75 कर्मचारियों को बाहर निकाल दिया

Saturday, November 26, 2016

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जबलपुर। सरकार द्वारा औद्योगिक क्षेत्रों के लिये बनाये गये नियमों का किस कदर माखौल उड़ाया जा रहा है। इसकी बानगी औद्योगिक क्षेत्र हरगढ़ (सिहोरा) में देखने को मिल रही है जहां पर EURO BOND INDUSTRIES PVT. LTD प्रबंधन ने पहले तो किसानों से उनकी जमीन ले ली तथा परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने का वादा किया, परंतु अब काम नहीं होने के और घाटा में कंपनी होने की बात कहकर बिना नोटिस दिये कर्मचारियों को काम से निकाल दिया गया। 

हड़गढ़ औद्योगिक क्षेत्र में स्थित यूरो बाण्डस इंडस्ट्रीज में तमाम नियम कायदों को ताक पर रखते हुये वहां कार्यरत 75 से अधिक कर्मचारियों को नौकरी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है। वित्तीय तंगी का हवाला देकर बाहर किये गये कर्मचारियों को नौकरी से बाहर करने के पूर्व नोटिस तक नहीं दिया गया। आश्चर्य में डालने वाली बात यह है कि श्रम कानूनों का उल्लंघन करने के बावजूद आसपास के स्थानीय कर्मचारियों से जबरिया त्यागपत्र पर दस्तखत कराये जा रहे हैं।  जबकि दूसरे राज्यों के कर्मचारियों को यथावत रखा जा रहा है। 

प्रबंधन की नादिरशाही के शिकार हुये कर्मचारियों को केवल कलेक्टर रेट के आधार पर मजदूरी मिल रही है, वहीं अन्य राज्यों के कर्मियों को कारखाना अधिनियम के तहत सभी सुविधाओं के साथ भारी-भरकम वेतन भी दिया जा रहा है। कर्मचारियों के प्रति प्रबंधन के दोहरे मापदंड से अल्पवेतन भोगी स्थानीय कर्मचारियों के समक्ष परिवार के उदर पोषण की समस्या आ खड़ी हुई है। दुर्भाग्यजनक पहलू यह भी है कि नौकरी संकट में पड़ती देख कर्मचारियों ने अनुविभागीय दंडाधिकारी सिहोरा के समक्ष लिखित आवेदन प्रस्तुत कर न्याय की अपेक्षा की, किन्तु उन्हें न्याय नहीं मिल सका। हरिभूमि की टीम ने हड़गढ़ में जब सच्चाई पता लगाने का प्रयास किया तो वहां पर बहुत सी चौंकाने वाली जानकारी सामने आर्इं हैं। 

लिया जा रहा दबंगई का सहारा
पीड़ित कर्मचारियों ने बताया कि पिछले एक पखवाड़े से प्रबंधन की ओर से दो दबंगो का सहारा लेकर जबरिया इस्तीफे  पर हस्ताक्षर करवाये जा रहे हैं। प्रबंधन द्वारा कम्प्यूटर प्रिंटर से निकाले गये पेपर पर लिखा गया है कि कर्मचारी पारिवारिक समस्याओं के चलते अपनी मर्जी से इस्तीफा दे रहा है।  इस तरह की इबारत वाले पेपर पर जिन कर्मचारियों ने हस्ताक्षर कर दिये हैं उन्हें बाहर कर दिया गया, किन्तु प्रबंधन की धौंस के आगे न झुकने वाले कर्मियों को कथित दबंग तरह-तरह से धमकाने में लगे हैं।

सेलरी से कट रहा EPF
यूरो इंडस्ट्रीज प्रबंधन की तानाशाही से पीड़ित कर्मचारियों ने हरिभूमि को बताया कि कानूनन कर्मचारी भविष्य निधि के लिए काटी जानी वाली राशि में नियोक्ता और कर्मचारी का अशंदान बराबर होना चाहिए, लेकिन कर्मचारियों के वेतन से ही नियोक्ता का अंशदान काटा जा रहा है। कर्मचारियों ने यह भी बताया कि श्रम कानून के तहत कर्मचारियों को मिलने वाले ओव्हर टाइम, कर्मचारी बीमा सहित अन्य भत्तों  का लाभ भी नहीं दिया जा रहा है। ब्ल्यू डस्ट (आयरन ओट) के काम से होने वाली स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से बचने के सुरक्षा प्रबंध भी प्लांट में नहीं हैं।

कर्मचारी ने किया प्रदर्शन
यूरो बाण्डस प्रबंधन के मनमाने रवैये से नाराज कर्मचारियों ने सिहोरा कांग्रेस अध्यक्ष राजेश चौबे एवं पार्टी के पूर्व पार्षद तथा जिला महामंत्री अरशद खान को अपनी पीड़ा से अवगत कराया। इस पर नेता द्वय ने तत्काल प्रबंधन से बात की, लेकिन बात नहीं बनी, लिहाजा आक्रोशित कर्मचारी गेट पर ही धरने पर बैठ गये हैं। कर्मचारियों की मांग है कि इंडस्ट्रीज में वर्षो सेवाएं देने के बाद भी मनमाने तरीके से नौकरी से निकाला गया। यदि प्रबंधन वित्तीय संकट का हवाला देकर उन्हें निकाल रहा है तो सबसे पहले उनको हटाया जाना चाहिए जो प्रतिमाह 60 - 70 हजार रुपए का भारी-भरकम वेतन ले रहे है। साथ ही दूसरे राज्यों के उन कर्मचारियों को भी निकाला जाना चाहिए जो काम तो निकाले गये कर्मचारियों के बराबर करते हैं, किन्तु सेलरी 25-30 हजार रुपए ले रहे हैं।

इनका कहना है
कुछ समय से इंडस्ट्रीज वित्तीय संकट से जूझ रही है। जिसको लेकर बोर्ड आॅफ डायरेक्टर ने छटनी का निर्णय लिया। निकाले गये कर्मचारियों के साथ ही कई अन्य शीर्ष अधिकारियों को भी हटाया गया है। मैंने आज भी मुंबई स्थित हेडर्क्वाटर में बात की है, जिस पर दो-तीन दिन में निर्णय किये जाने के निर्देश मिले हैं।
ए.के. निकुंज
असिस्टेंट वाइस प्रेसीडेंट
यूरो बाण्डस इंडस्ट्रीज प्रा. लि.
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