व्यापमं घोटाला: CBI जांच में फंस गए अजय गोयनका

Saturday, November 5, 2016

भोपाल। CHIRAYU MEDICAL COLLEGE के DIRECTOR DR. AJAY GOENKA व्यापमं घोटाले में लगभग पूरी तरह से जकड़ चुके हैं। फंस तो वो इससे पहले भी गए थे परंतु ताबड़तोड़ मीडिया मैनेजमेंट के चलते तत्समय वो सुर्खियां नहीं बन पाए थे। सीबीआई के पास अजय गोयनका के खिलाफ पर्याप्त मटीरियल जमा हो गया है। सबूतों की पुष्टि के लिए सीबीआई ने छापामार कार्रवाई भी की और बाकी बचे सवालों के जवाब जुटा लिए। 

शुक्रवार को सीबीआई की 15 सदस्यीय टीम दोपहर करीब 12 बजे एक साथ अलग-अलग जगहों पर पहुंची। टीम ने एडमिनिस्ट्रेशन ब्लॉक में पूछताछ शुरू की। बताया जा रहा है कि सीबीआई ने पीएमटी परीक्षा में सरकारी सीट को मैनेजमेंट कोटे में बेचे जाने के आरोप की प्राथमिक जांच के बाद ये कार्रवाई की। सीबीआई की टीम देर शाम तक यहां सरकारी और मैनेजमेंट कोटे की सीटों पर भर्ती किए गए छात्रों के दस्तावेजों की पड़ताल करती रही। सीबीआई की यह कार्रवाई झांसी रोड ग्वालियर थाने में दर्ज एफआईआई के चलते की गई है।

मैनेजमेंट कोटे से सीटें बेचने का घोटाला
सर्चिंग के दौरान सीबीआई को दस्तावेजों के अलावा नकदी, आभूषण और अन्य मूल्यवान संपत्ति भी मिली जिसकी अनुमानित कीमत करीब दो करोड़ रुपए बताई जा रही है। जानकारी के अनुसार पीएमटी वर्ष 2010 में पास हुआ विद्यार्थी जो ग्वालियर के एक मेडिकल कॉलेज में पढ़ रहा था, वह पीएमटी 2011 में भी बैठा और सरकारी कोटे पर उसे भोपाल के एक कॉलेज में दाखिला भी मिला लेकिन बाद में पैसों के लेन-देन के चलते सीट छोड़ दी गई। रिक्त सीट पर नियमानुसार मैरिट लिस्ट के हिसाब से दूसरे विद्यार्थी को दाखिला देना था, लेकिन कॉलेज ने मैनेजमेंट कोटे के जरिए मोटी रकम लेकर किसी अन्य का दाखिला करवा दिया।

शिवहरे ने भी लिया था पूछताछ में नाम
सीबीआई सूत्रों की मानें तो इस साल 1 मई को कानपुर के काकादेव इलाके से गिरफ्तार किए गए स्कोरर रमेशचंद्र शिवहरे ने सीबीआई की पूछताछ में कई खुलासे किए। उसने बताया कि चिरायु मेडिकल कॉलेज में भी सरकारी सीट पर दाखिला करवा कर एनवक्त में छोड़ी गई, जिससे कॉलेज वह सीट मैनेजमेंट कोटे में बेच सके। सीबीआई ने रमेश के खिलाफ छह मामलों में एफआईआर दर्ज की है। वो कानपुर में कोचिंग सेंटर चलाता था और यहीं से होनहार छात्रों की तलाश कर उन्हें पैसों का लालच देकर अलग-अलग परीक्षाओं में बैठने के लिए तैयार करता था। 2006 से 2013 तक मप्र में हुई प्रतियोगी परीक्षाओं और व्यापमं घोटाले में उसकी भूमिका रही है।

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