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अब पंचायत मंत्री भी जुलानिया के जुल्म का शिकार

Wednesday, November 30, 2016

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भोपाल। इंदिरा आवास कुटीर के आवंटर में भारी गड़बड़ी सामने आई है। 40 परिवार वाले गांव में 50 कुटीरें स्वीकृत कर दी गईं जबकि 600 परिवार वाले गांव में 2 कुटीर स्वीकृत हुईं। यह गड़बड़झाला हुआ है पंचायत मंत्री गोपाल भार्गव की विधानसभा में। अब मंत्रीजी भी लिखापड़ी में परेशान हो रहे हैं। सीएम शिवराज सिंह से लेकर केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर तक तो पत्र लिखकर लिस्ट निरस्त करने की मांग की है। बताया जा रहा है कि यह लिस्ट राधेश्याम जुलानिया द्वारा तैयार करवाई गई है। 

भार्गव का कहना है कि उनके विभाग के अफसर अपने हिसाब से बैठक लेकर चीजें तय कर लेते है इसके चलते इस तरह की दिक्कत आ रही है। जब केंद्र में यूपीए की सरकार थी उस दौरान मध्यप्रदेश से अक्सर इंदिरा कुटीर आवंटन में भेदभाव के आरोप लगते रहे हैं। इस बार केंद्र सरकार ने उदारता बरती और साढ़े तीन लाख इंदिरा कुटीर मध्य प्रदेश को आवंटित कर दी लेकिन प्रदेश से जो प्रस्ताव विभिन्न ग्रामीण अंचलों में इंदिरा कुटीर को लेकर गया वह सही तरीके से तैयार होकर नहीं गया जिसके चलते असंतुलित रुप से क्षेत्रवार इंदिरा कुटीरों का आवंटन हो गया।

पहले मप्र से भेदभाव अब 7 गुना आवंटन
पहले मध्यप्रदेश में जहां पचास से साठ हजार इंदिरा कुटीर का आवंटन होता रहा था वहीं अब साढ़े तीन लाख इंदिरा कुटीर आवंटित की गई है। कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में कभी भी मध्यप्रदेश को जरुरत के मुताबिक इंदिरा कुटीर नहीं मिले। इसको लेकर राज्य सरकार और केन्द्र सरकार के बीच लगातार शीत युद्ध जैसी स्थिति बनी रही। मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान भी इंदिरा कुटीरों का मध्यप्रदेश की आबादी के हिसाब से आवंटन न किए जाने और कांग्रेस शासित राज्यों की अपेक्षा भाजपा शासित राज्यों में इंदिरा कुटीर आवंटन में भेदभाव किए जाने का आरोप लगाते रहे है।

मंत्री के विधानसभा क्षेत्र में ही भारी गड़बड़ी
पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री गोपाल भार्गव के विधानसभा क्षेत्र की पंचायत सागौनी बुंदेला के तीन गांव है वहां जहां 30-35 परिवार और दो सौ मतदाता है वहां चालीस से पचास कुटीरें स्वीकृत कर दी गई। वहीं पटना बुजुर्ग गांव में जहां छह हजार परिवार रहते है वहां इस साल केवल दो इंदिरा कुटीरें आवंटित की गई है। ट्रायबल के कई क्षेत्र ऐसे भी छूट गए है जहां एक भी इंदिरा कुटीर स्वीकृत नहीं की गई है। इस असमानुपातिक आबंटन को लेकर भार्गव केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र तोमर, केंद्रीय अधिकारियों, मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान, मुख्यसचिव तक को अवगत करा चुके है लेकिन अभी तक सूची में सुधार नहीं हुआ है। इसको लेकर उनकी विधानसभा क्षेत्र के कार्यकर्ताओं और नागरिकों में भी भारी असंतोष है। मंत्री भार्गव का कहना है कि उनके विभाग के अपर मुख्य सचिव राधेश्याम जुलानिया अपने स्तर पर बैठके लेकर सब तय कर देते है उसी का परिणाम है कि इंदिरा कुटीर आवंटन में यह असंतुलन सामने आया है।
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इस साल मध्यप्रदेश को साढ़े तीन लाख इंदिरा कुटीर आवंटित की गई हैं। लेकिन इनके आवंटन की जो सूची आई है उसमें भारी असंतुलन है। जहां अधिक परिवार रहते है वहां काफी कम कुटीर मंजूर हुई और जहां कम परिवार है वहां परिवारों की संख्या से अधिक कुटीर आवंटित कर दी गई। मैंने केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर को भी पत्र लिखकर अवगत कराया है। इस आवंटन सूची को निरस्त कर नए सिरे से समानुपातिक सूची जारी की जाना चाहिए।
गोपाल भार्गव, पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री
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