अब मानवाधिकार आयोग के राजनीतिकरण की शुरूआत

Sunday, November 6, 2016

नईदिल्ली। यह पहली बार होने जा रहा है जब राजनीति से सीधे तौर पर जुड़े किसी व्यक्ति को नेशनल ह्यूमन राइट कमीशन (NHRC) का मेंबर चुना जा सकता है। भारतीय जनता पार्टी के उपाध्यक्ष अविनाश राय खन्ना की नियुक्ति सदस्य के तौर पर करने की कवायद शुरू हो गई है। बता दें कि मानवाधिकार आयोग में इस तरह की नियुक्तियों का भाजपा विरोध करती आई है। भाजपा तो राजनीति से अप्रत्यक्ष संपर्क रखने वाले जजों की नियुक्ति पर भी आपत्ति उठाती आई है। 

मिली जानकारी के मुताबिक, अविनाश को जिस पोस्ट पर रखा जा रहा वह पिछले दो साल से खाली पड़ी थी। अविनाश भारतीय जनता पार्टी के उपाध्यक्ष हैं। वह जम्मू कश्मीर में पार्टी के इंचार्ज भी हैं। वह इस साल के अप्रैल तक राज्य सभा के सदस्य भी रहे हैं। खबर आ रही है कि अगले कुछ दिनों में उनको सदस्य के रूप में चुन लिया जाएगा। 

गौरतलब है कि NHRC के मेंबर चुनने के लिए हाई लेवल मीटिंग होती है। उस मीटिंग की अध्यक्षता प्रधानमंत्री करते हैं। उनके अलावा मीटिंग में लोकसभा के स्पीकर, केंद्रीय गृहमंत्री, लोकसभा के विपक्षी नेता, राज्यसभा के विपक्ष के नेता और राज्यसभा के डिप्टी चेयरमैन शामिल होते हैं। सूत्रों ने बताया कि पिछले महीने यह मीटिंग हुई थी। मीटिंग में अविनाश के अलावा कुछ और नामों पर चर्चा की गई थी लेकिन उनमें से अविनाश का नाम फाइनल किया गया। पैनल के एक सदस्य ने बताया कि अविनाश का नाम बिना किसी विरोध के फाइनल किया गया था।

सदस्य ने आगे बताया कि नेशनल ह्यूमन राइट कमीशन के संविधान के मुताबिक भारत का कोई भी पूर्व चीफ जस्टिस NHRC का चेयरपर्सन चुना जा सकता है। इसके अलावा चार फुल टाइम मेंबर होते हैं। उनमें सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज, हाई कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस के अलावा दो और सदस्य शामिल होते हैं लेकिन उन दो लोगों को मानव अधिकार से संबंधित ज्ञान होना चाहिए। 

NHRC के एक पूर्व सदस्य ने अविनाश का नाम सामने आने पर विरोध जाहिर किया। उन्होंने कहा, ‘किसी राजनेता के इसमें शामिल होने पर कोई रोक नहीं है लेकिन फिर भी उनको चुनना सवालों के घेरे में है। यह गलत संदेश देता है। क्या कमेटी को कोई ऐसा नहीं मिला जिसका राजनीति से कोई संबंध ना हो?’

गौरतलब है कि जब बीजेपी विपक्षा में थी तब उसकी तरफ से सरकार पर दवाब डाला जाता था कि वह किसी ऐसे को ना चुने जिसके राजनीति से संबंध हों। 2013 में तब के राज्यसभा के विपक्ष के नेता अरुण जेटली ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज Cyriac Joseph को ना चुनने के लिए कहा था। इसके लिए जेटली ने लिखित में दिया था कि जोफस कुछ राजनीतिक और धार्मिक संगठनों के करीबी हैं। 
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