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मप्र के अनफिट पुलिस अधिकारी ने किया था सिमी आतंकियों का एनकाउंटर

Saturday, November 12, 2016

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भोपाल। भोपाल एनकाउंटर मामले को लेकर सवालों का सिलसिला लगातार जारी है। एक के बाद एक नई जानकारियां सामने आ रहीं हैं। अब बताया जा रहा है कि जेल से भागे फरार आतंकवादियों का एनकाउंटर करने वाली टीम का लीडर मैदानी कार्य के लिए पहले ही अनफिट करार दिया जा चुका है। दूसरा सवाल यह है कि यदि वो अनफिट था तो उसने एनकाउंटर कैसे किया लेकिन पहला सवाल यह है कि एक अनफिट पुलिस अधिकारी को आतंकवादियों की सर्चिंग के लिए भेजा ही क्यों गया। 

मात्र 8 घंटे में कैसे खोज लिया आतंकियों को 
बता दें कि यह एनकाउंटर आतंकियों की फरारी के 8 घंटे के भीतर कर लिया गया था। जहां आतंकवादी छुपे हुए थे वो रास्ता काफी खराब है। वहां पैदल जाना भी मुश्किल काम है। रास्ता बेहद पथरीला और ऊबड़-खाबड़ है। बावजूद इसके डीएसपी डीएस चौहान मौके पर पहुंचे और उन्होंने एनकाउंटर भी किया। 

डीआईजी ने दी थी अनफिट रिपोर्ट 
क्राइम ब्रांच के डीएसपी डीएस चौहान को अनफिट करार दिया गया था। इस संदर्भ में डीआईजी रमन सिंह सिकरवार ने मुख्यालय को अपनी रिपोर्ट भी भेजी थी। डीआईडी रमन सिंह सिकरवार ने 8 अगस्त को पुलिस मुख्यालय भेजे एक पत्र में लिखा कि चौहान अनफिट है और उनसे मैदानी कार्य की उम्मीद नहीं की जा सकती है। उन्होंने यह भी अनुशंसा की थी कि ऐसी स्थिति में चौहान को भोपाल जिले से बाहर पदस्थ किया जाना ज्यादा उचित होगा। 

क्या परेशानी है डीएस चौहान को 
जानकार बताते हैं कि डीएस चौहान को स्पाइनल यानी रीढ़ की हड्डी की परेशानी है। ऐसे में उन्हें चलने उठने में दिक्कत होती है। बताया यह भी जाता है कि उन्हें एक बार ब्रेन में क्लॉट भी हुआ था। डॉक्टर ऐसे लोगों को सड़कों पर वाहन चलाने से इंकार कर देते हैं। सफर करना इनके लिए खतरनाक होता है। ये लोग आॅफिस में बैठकर काम कर सकते हैं वो भी कुर्सी पर ज्यादा देर तक बैठ नहीं सकते। 

अब या तो डीआईजी की चिट्ठी और मेडिकल रिपोर्ट गलत हैं या फिर गोलमाल कुछ और ही है जो डीएस चौहान को ना केवल मैदानी पोस्टिंग दी गई बल्कि आतंकवादियों को खोजने जैसे महत्वपूर्ण टास्क पर लगाया गया और उनकी ही टीम ने एनकाउंटर भी किया। सच्चाई जो भी हो, सवाल तो खड़े हो ही गए हैं। ( पढ़ते रहिए bhopal samachar हमें ट्विटर और फ़ेसबुक पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं।)
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