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मैं तो राजनीति का घोषित झंडूबाम हूं: अमर सिंह

Tuesday, November 29, 2016

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नई दिल्ली। समाजवादी पार्टी के नेता अमर सिंह फिर सुर्खियों में हैं। पार्टी सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव के परिवार के विवाद के केंद्र में रहने के बाद अब अमर नोटबंदी पर पार्टी से अलग रुख अपना रहे हैं। वह इस मुद्दे पर खुलकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सपोर्ट में आ गए हैं। क्या हैं यादव परिवार से उनके ताजा समीकरण, क्यों कर रहे हैं मोदी का समर्थन और कौन है यूपी चुनाव में अब आगे, इन्हीं सवालों पर अमर सिंह से बात की एनबीटी के नरेन्द्र नाथ और पूनम पाण्डे ने।

मुलायम सिंह से आप किस मुद्दे पर मिले?
नेताजी से मुलाकात कोई खबर नहीं है लेकिन नोटबंदी का मैंने जो समर्थन किया है, लोग उसके गलत राजनीतिक मायने निकाल रहे हैं। उस बारे में बात हुई। कुछ लोग बिना वजह विरोध कर रहे हैं।

मुलायम को पता है आपके रुख के बारे में? 
मुलायम सिंह ने सबसे पहले कहा कि काले धन के खात्मे का हम भी समर्थन करते हैं। मैंने आज तक कोई ऐसी बात नहीं की है, जो मुलायम सिंह के मन की बात ना हो। मैं जो बोल रहा हूं, वह मुलायम सिंह की सहमति और उन्हें विश्वास में लेने के बाद ही कह रहा हूं। सिवाय ममता बनर्जी के और राज्यसभा में नरेश अग्रवाल के, किसी ने नोटबंदी का विरोध नहीं किया। मैं अपने जीवन में कोई ऐसा काम नहीं करूंगा, जिसे टीवी पर देख मुलायम को दुख पहुंचे।

नरेश अग्रवाल समाजवादी पार्टी के ही नेता हैं, तो क्या वह पार्टी लाइन पर नहीं बोल रहे थे?
मुझे पता नहीं है। मैं पार्टी में छह साल के लिए निकाला गया था और अभी आया हूं। तो पार्टी में किसकी चल रही है, पार्टी की आत्मा कौन है, शरीर कौन है, इसके बारे में मुझे अभी ज्ञान नहीं है। 

सोमवार को कांग्रेस की बुलाई बैठक में हमारे कुछ नेता गए और मुलायम सिंह का बयान था कि हमारी अपनी नीति है, हम दूसरों की महफिल में दूल्हा बनने क्यों जाएं? 
अब जो गए मैं उनको भी गलत नहीं बोल सकता, मैं मुलायम सिंह को भी गलत नहीं बोल सकता हूं। एक बार मैं छह साल के लिए निकाला जा चुका हूं। अब मैं इधर जाऊं या उधर जाऊं, बड़ी मुश्किल में हूं कि किधर जाऊं। लेकिन मैं एक नागरिक के नाते, अपनी बात जरूर कहूंगा। मुलायम सिंह ने नोटबंदी का विरोध नहीं किया है। उन्होंने काले धन का समर्थन बिल्कुल नहीं किया है। उन्होंने शादी में होने वाली दिक्कत, किसान को खाद और बीज की दिक्कत, 2000 के नोट के छुट्टे ना मिलने की दिक्कत और गांवों में एटीएम में नोट ना पहुंचने जैसी समस्याओं की बात कही है।

क्या सोचते हैं मोदी के कदम के बारे में?
मैं मोदी का हृदय की गहराइयों से अभिनंदन करता हूं, क्योंकि उन्होंने नोटबंदी की। मोदी ने एक अवसर सबको दिया कि कालेधन से मुक्त हो जाइए, किसी को कुछ नहीं कहूंगा। चेतावनी भी दी कि नहीं किया तो खून के आंसू रुलाऊंगा। लोगों ने कहा कि ये जुमले हैं। उनको उकसाया भी कि कहां है काला धन, निकालो मोदी जी। जब आपने एक सोए शेर को जगाया तो वह दहाड़ेगा, सामने जो मिलेगा उसको खाएगा।

बीजेपी का आरोप है कि एसपी सहित सभी दलों के नेताओं की ब्लैक मनी डूब रही है?
जहां तक मेरा सवाल है तो मैं किसी दल में सात साल तक रहा ही नहीं। किसी दल के फंड का प्रबंधन किया ही नहीं। मेरे पास न तो खनन उद्योग है, न 2जी, 4जी में रहा, न संचार मंत्री रहा, न यूपी का खनन मंत्री रहा, मेरे पास न तो पीडब्लूडी रहा है, न सिंचाई रहा है। बल्कि यूपी की सत्ता के शीर्ष में बैठे लोग हमारे मुखर सार्वजनिक विरोधी हैं, मुलायम सिंह और शिवपाल यादव के अलावा मुझे वहां चाहने वाला कोई है ही नहीं। तो इसलिए जब मेरा- न ऊधौ का लेना, न माधो को देना है, तो...मेरी सारी चीजें खंगाली जा चुकी हैं। मैं खुद स्वच्छ हूं, मेरे पास कोई हजार-पांचसौ की गड्डियां नहीं हैं।

क्या अखिलेश सरकार के अंदर करप्शन है?
मैं कुछ नहीं बोलूंगा। लेकिन बहुत कुछ सामने आना चाहिए। एक अधिकारी हैं यूपी के, जो मायावती के कार्यकाल में भी रहे, अखिलेश के कार्यकाल में भी, वह 14 सालों तक बैठे रहे, कोर्ट के हस्तक्षेप के बावजूद एक जगह पर डटे हैं, क्यों? इसका पता लगाना चाहिए। वही ठेकेदार जो मायावती के समय में थे, वे अब भी हैं। जो लोग मायावती के कार्यकाल में शराब बेच रहे थे, अब भी वही बेच रहे हैं। शिशु आहार जो पहले लोग देखते थे, अब भी वही हैं। आम तौर पर लोग शराब की बोतल नई बना लेते हैं, ताकि उसका स्पष्टीकरण दे सकें, लेकिन यहां तो शराब भी वही है, बोतल भी वही, बिल्ला भी वही...सिर्फ शासन बदल गया है।

आप नोटबंदी का समर्थन कर रहे हैं, लेकिन अखिलेश ने कहा है कि यूपी चुनाव को ध्यान में रखकर नोटबंदी का फैसला लिया गया?
भले ही किसी ने भी बोला हो, लेकिन कोई यूपी के लिए इतना बड़ा कदम नहीं उठाएगा। क्योंकि सूरत के हीरे के व्यापारी भी दुखी हैं और पीएम के क्षेत्र बनारस में, मऊ में बुनकर भी दुखी हैं, क्योंकि उन्हें दिहाड़ी नहीं मिल रही। पीएम एक शेर पर सवार हुए हैं। उन्होंने साहस नहीं, दुस्साहस किया है।

अखिलेश की आपसे क्या नाराजगी है?
मैं इस पर कुछ बोलना नहीं चाहता, क्योंकि मुलायम सिंह ने मुझे भाई कहा है। तो वे मेरे भाई के बेटे हैं। मैं सीएम अखिलेश के खिलाफ बहुत कुछ बोल सकता हूं, मुझे उनसे कोई डर नहीं है। लेकिन मुलायम सिंह के बेटे अखिलेश के लिए मैं एक शब्द नहीं कहूंगा।

आरोप ये भी लग रहे हैं कि आपको लेकर एसपी में जो विवाद हुआ, उसकी वजह से आप ऐसा कर रहे हैं?
मुझे लेकर कोई विवाद नहीं हुआ। क्योंकि मैं समाजवादी पार्टी का अध्यक्ष नहीं था। अध्यक्ष अखिलेश यादव थे और उन्हें भी मैंने अस्पताल के बिस्तर पर अध्यक्ष बनवाया था। अगर मेरा विवाद किसी से है तो वह शिवपाल यादव से है। उनको मैंने अध्यक्ष पद से हटवाकर उनके साथ अन्याय किया। मुलायम सिंह ने मेरे कहने पर अखिलेश को अध्यक्ष बनाया और शिवपाल को हटाया। तो शिवपाल ने तो मुझे गालियां नहीं दीं, उन्होंने अखिलेश का स्वागत किया। अबकी बार अखिलेश की जगह शिवपाल अध्यक्ष बन गए, पहले चाचा को हटाकर भतीजा बना, अबकी भतीजे को हटाकर चाचा बने और एक अन्य चाचा ने इन चाचा को बनाने के लिए पत्र दिया। अब इसमें मेरी क्या भूमिका है। अगर मुलायम सिंह यह कह दें कि मैंने अखिलेश यादव के विरुद्ध एक शब्द भी कभी कहा हो, तो मैं सजा भुगतने को तैयार हूं।

नोटबंदी का उत्तर प्रदेश चुनाव पर क्या असर होगा?
यह सही है कि बिहार और दिल्ली की पराजय के बाद यूपी में अगर बीजेपी नहीं आती है, तो मोदी के राजनीतिक व्यक्तित्व को बड़ा झटका लगेगा। यूपी में जीत बीजेपी के लिए जरूरी और अपरिहार्य है। मेरा मानना है कि पहली बार मोदी ने गरीब और अमीर के बीच ध्रुवीकरण किया है। पीएम ने जो 50 दिन का समय मांगा है, अगर इस 50 दिन में स्थिति नियंत्रित हो गई, तो निश्चित रूप से इसका फायदा उन्हें मिलेगा।

कांग्रेस के साथ गठबंधन की चर्चा चल रही थी, क्या हुआ? आप बीच में इसके लिए मुलायम को समझाने भी गए थे?
समाजवादी पार्टी में मेरी हैसियत जीरो बट्टा सन्नाटा है। मैं स्पष्ट कहना चाहता हूं कि मैं एसपी की राजनीति का घोषित झंडूबाम हूं। पार्टी में मुलायम सिंह की बात भी नहीं सुनी जाती। एक व्यक्ति जिसे सीएम आवास में पकड़-पकड़ कर मारा गया, उसे पार्टी से निकाला, वह मंत्री कैबिनेट से मुख्यमंत्री ने नहीं निकाला। रामगोपाल यादव की वापसी के बाद, निकाले गए मुलायम सिंह के समर्थक मंत्री अब भी बाहर हजरतगंज की हवा खा रहे हैं। मैं बहुत खेद के साथ कह रहा हूं कि मुलायम सिंह की सारी आज्ञाओं का पालन हो रहा हो, ऐसा अभी नहीं है। लेकिन फिर भी मैंने गठबंधन की पहल की। मुलायम भी गठबंधन चाहते हैं। लेकिन रामगोपाल यादव गठबंधन नहीं चाहते हैं। अखिलेश यादव को भी लगता है कि उन्होंने इतना विकास कर लिया कि सारी सीटें उन्हें ही मिल जाएंगी। गठबंधन इसी कारण से नहीं हुआ।
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