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तो क्या भोपाल जेल में ताला खरीदी घोटाला हुआ है ?

Saturday, November 5, 2016

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भोपाल। बार बार दावा किया जा रहा है कि जेल में बंद आतंकियों ने टूथब्रश से चाबियां बनाईं और ताला खोलकर भाग गए। आज एक नई कहानी सामने आई है, उसमें टूथब्रश से चाबी बनाने की पूरी विधि का भी खुलासा हुआ है। यहां समझ यह नहीं आ रहा कि जेल में क्या प्लास्टिक के ताले लगे थे जो टूथब्रश की चाबियों से खुल गए। कैसे ताले थे जो कमजोर चाबियों को जवाब नहीं दे पाए। क्या मप्र की जेलों में ताला खरीदी घोटाला हुआ है। 

जेलकांड को लेकर ताजा खुलासा हुआ है कि आतंकवादियों ने 40 दिन तक खाने में अतिरिक्त रोटियों की मांग की। फिर इन रोटियों को सुखाकर जलाया गया। रोटियों की आग पर टूथब्रश रखे गए इसके बाद मेल्ट हो चुके टूथब्रश को ताले के अंदर डालकर आतंकी प्लास्टिक की डुप्लीकेट चाबी बनाने में सफल रहे।

समझ नहीं आता, किसी अपराध की बात चल रही है या बच्चों को नानी कहानी सुना रही है। ऐसा कैसे संभव हो सकता है कि जेल के मोटे मोटे तालों में टूथब्रश मेल्ट करके डाला जाए और वो चाबी बन जाए। छोटे बच्चों की गुल्लक के ताले भी इतनी आसानी से नहीं खुलते, जितने आसानी से जेल के ताले खुल गए। मामला कुछ और ही है, लेकिन लोगों को कंफ्यूज किया जा रहा है। साम्प्रदायिकता भड़काने के आरोपियों को आतंकवादी बता दिया। अब सवाल उठाओ तो देशद्रोही कहलाओगे। उन गद्दारों से कोई कुछ नहीं कह रहा, जिन्होंने आतंकियों को जेल में ड्रायफ्रूट्स खिलाए, अतिरिक्त रोटियां दीं। जलाने के लिए माचिस और लाइटर दिए। पहनने के लिए सरकारी जूते दिए और सीसीटीवी कैमरे बंद करके कमजोर व बीमार गार्डों को ड्यूटी पर लगाया। 

अब सिर्फ 2 बातें हो सकतीं हैं। या तो टूथब्रश वाली कहानी फर्जी है या फिर जेल में ताला खरीदी घोटाला हुआ है। यदि टूथब्रश वाली कहानी सही है तो ताला खरीदी घोटाले की जांच होनी चाहिए। पता नहीं अभी भी जेलों में कितने ताले होंगे जो टूथब्रश से खुल जाएंगे। यदि घोटाला नहीं हुआ तो उस गद्दार की तलाश होनी चाहिए जो चुपके से गार्ड की ड्यूटी बदलते समय बैरक का ताला खोलकर चला गया। वो तो रमाशंकर यादव समय पर आ गए, नहीं तो शायद दूसरी बैरक का ताला भी खुल जाता। 
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