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मंडियों में कारोबार ठप, सड़कों पर रखा है अनाज, भूखा घूम रहा किसान

Saturday, November 12, 2016

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भोपाल। किसानों को कालेधन के खिलाफ सरकारी लड़ाई की बड़ी कीमत चुकानी पड़ रही है। मंडियों में कारोबार ठप पड़ा हुआ है। बस दो चार दिन के चक्कर में किसानों की आवक लगातार बनी हुई है लेकिन नगदी ना होने के कारण कारोबार नहीं हो पा रहा है। सरकार ने आरटीजीएस, ड्राफ्ट, बैंकर्स चैक के विकल्प सुझाए हैं लेकिन वो छोटे किसानों को मंजूर नहीं। प्रतिदिन 2 लाख टन से घटकर मंडिया 12 हजार टन पर सिमटकर रह गईं हैं। मप्र की 257 मंडियों में से सिर्फ 82 में ही कारोबार हुआ। हालात बेकाबू होते देख इमरजेंसी मीटिंग कॉल की गई। जिसमें चैक से पेमेंट करने की मंजूरी दी गई। इधर किसानों की जेब में रखी नगदी खत्म हो गई है। वो भूखे घूम रहे हैं। 

15 दिसम्बर तक हालात खराब रहेंगे
बैठक में कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि स्थिति सामान्य होने में 15 दिन लग जाएंगे। किसानों को उपज का भुगतान नकद होता है और नकदी की कमी के कारण परेशानी पैदा हो गई है। इसके मद्देनजर तय किया गया कि नकद, आरटीजीएस, ड्राफ्ट, बैंकर्स चैक के साथ अब अकाउंट पेयी चैक से भी भुगतान होगा। जो किसान दाम कम होने से फसल नहीं बेचना चाहते हैं, उन्हें 15 दिसंबर तक मंडी के गोदामों में नि:शुल्क अनाज रखने दिए जाएंगे। वहीं, अन्य जगह के गोदामों में सोयाबीन रखने पर 25 प्रतिशत और बाकी फसलों में 15 प्रतिशत की सब्सिडी भंडारण शुल्क में दी जाएगी।

तत्काल राहत का कोई उपाय सरकार के पास नहीं
प्रमुख सचिव कृषि डॉ. राजेश कुमार राजौरा ने बताया कि नकद राशि की कमी को देखते हुए चैक से भुगतान को मंजूरी दी गई है। साथ ही कई अन्य सुविधाएं देने का निर्णय बैठक में लिया गया है। इसके प्रचार-प्रसार के लिए अभियान भी चलाया जाएगा। बैठक में अपर मुख्य सचिव वित्त एपी श्रीवास्तव, प्रबंध संचालक मंडी बोर्ड राकेश श्रीवास्तव, सचिव वित्त अमित राठौर, आयुक्त सहकारिता कविन्द्र कियावत सहित अन्य अधिकारी मौजूद थे।

257 में से सिर्फ 82 मंडियों में हुआ कारोबार
सूत्रों का कहना है कि मंडियों में उपज लेकर आने वाले किसानों की संख्या दो दिन में घटी है। 257 मंडियों में सिर्फ 82 में ही कारोबार हुआ। इसमें भी सागर संभाग की 36 मंडियों में एक भी खरीदी नहीं हुई। भोपाल संभाग में 1, उज्जैन संभाग में 5 और ग्वालियर संभाग में सिर्फ 3 मंडियां में ही काम हुआ। मक्का और मूंग समर्थन मूल्य से नीचे बिकने की बात भी सामने आई।
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