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मोदजी, जापानी बुलेट ट्रेन की जरूरत किसे है

Sunday, November 13, 2016

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आकार पटेल/वरिष्ठ पत्रकार/बीबीसी हिंदी। अहमदाबाद से मुंबई दर्जनों ट्रेनें जाती हैं। पहली ट्रेन आधी रात के ठीक बाद और आखिरी आधी रात के ठीक पहले। अहमदाबाद से मुंबई की दूरी 524 किलोमीटर है और इसे पूरी करने के लिए दिन भर ट्रेनें जाती हैं। अहमदाबाद में एक एयरपोर्ट हैं और यहां से हर दिन 10 उड़ानें हैं। 6 लेन की एक्सप्रेसवे के साथ अहमदाबाद और मुंबई स्वर्णिम चुतर्भुज राजमार्ग नेटवर्क का हिस्सा है। ट्रेन के मुक़ाबले रोड के जरिए अहमदाबाद से मुंबई कम समय में पहुंचा जा सकता है। शायद भारत का यह सबसे बेहतर रूट है।

मैं ये सब इसलिए लिख रहा हूं क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जापान में हैं। जापानी प्रधानमंत्री शिंजो अबे के साथ मोदी बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट पर आखिरी मुहर लगा चुके होंगे। बुलेट ट्रेन अहमदाबाद से मुंबई दौड़ेगी और कुछ दिनों में इसके डिजाइन का काम शुरू हो जाएगा। इस प्रोजेक्ट में कुल लागत एक लाख करोड़ की आएगी। आधिकारिक रूप से इसकी लागत 97,636 करोड़ बताई गई है लेकिन रिपोर्ट्स के मुताबिक 10 हज़ार करोड़ अतिरिक्त खर्च हो सकता है।

हमें जानना चाहिए कि इसमें लागत की जो रकम है वह भारत के स्वास्थ्य बज़ट की तीन गुनी है। भारत वह मुल्क है जहां के 38 फ़ीसदी बच्चे कुपोषित हैं और दो साल की उम्र में ही उनका शारीरिक विकास रुक जाता है।  इसका मतलब यह हुआ कि ये बच्चे स्वस्थ बच्चों के मुकाबले शारीरिक और बौद्धिक रूप से कमजोर होंगे और कभी इनका जीवन संपूर्ण नहीं होगा।

इनसे कोई मुनाफा नहीं होने जा रहा
बुलेट ट्रेन की जो लागत होगी वह भारत में हर साल शिक्षा पर खर्च होने वाले बजट की रकम से ज़्यादा है। दुनिया में भारत का उन देशों में शुमार है जहां की साक्षरता दर सबसे निचले पायदान पर है। इसके साथ ही हमारे यहां शिक्षा की गुववत्ता भी बेहद ख़राब है। इस बारे में मैं पहले भी लिख चुका हूं।

परिवहन उद्योग के भीतर भी कई पहलू हैं। हमारा निवेश वहां नहीं है जहां लोगों को सबसे ज्यादा ज़रूरत है। 2005 में मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की बीजेपी सरकार ने राज्य परिवहन की बसों को बंद कर दिया। इन सरकारों का तर्क था कि बसों से मुनाफा नहीं हो रहा था। 

लेकिन ग़रीबों के पास विकल्प क्या है? ज़ाहिर है बुलेट ट्रेन और दूसरी परियोजनाओं से भी मुनाफे की उम्मीद नहीं है। अहमदाबाद और मुंबई में वल्लभभाई पटेल और छत्रपति शिवाजी की विशालकाय मूर्तियां राष्ट्रीय गर्व के लिए हैं। इनसे कोई मुनाफा नहीं होने जा रहा।

बुलेट ट्रेन के पक्ष में तर्क दिया जा रहा है कि दो अन्य गुजराती शहरों में भी इसकी सेवा मिलेगी. इसी रूट में सूरत और वड़ोदरा भी आएंगे. वड़ोदरा की दूरी अहमदाबाद से 110 किलोमीटर है. दूसरी तरफ़ रोड से सूरत की अहमदाबाद से दूरी 120 किलोमीटर है। वड़ोदरा से मुंबई के लिए बहुतेरे फ्लाइट्स हैं।

मेरे माता-पिता सूरत में रहते हैं इसलिए मैं वहां अक्सर जाता हूं. पहले बेंगलुरु से यहां के लिए महज एक फ्लाइट थी और अब एक भी नहीं है. 6 नवंबर, 2014 को सूररत एयरपोर्ट पर स्पाइसजेट बोइंग फ्लाइट दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। रिपोर्ट के मुताबिक़ रनवे पर एक भैंस टहल रही थी और जेट उसी से टकरा गई थी. भैंस रनवे पर इसलिए आ गई थी क्योंकि एयरपोर्ट की चहारदीवारी टूटी हुई थी। बोइंट 737 एयरक्राफ़्ट के इंजन को आंशिक रूप से नुकसान पहुंचा था। इसमें भैंस मारी गई थी।

सरकार अमीरों के ट्रांसपोर्ट पर खर्च करना चाहती है 
रिपोर्ट के मुताबिक नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने इस मामले में जांच का निर्देश दिया। इस जांच में नागरिक उड्डयन के महानिदेशक और एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया का शामिल किया गया। देश भर के एय़रपोर्ट्स की सुरक्षा की समीक्षा हुई।

नागरिक उड्डयन मंत्री गजपति राजू ने दो घंटे की मीटिंग कर यह आदेश दिया था। सूत्रों का कहना है कि देश के सारे एयरपोर्ट की चहारदिवारी कंक्रीट होनी चाहिए न कि ईंट की दीवार। ऐसा लगता है कि सरकार केवल अमीरों के ट्रांसपोर्ट सिस्टम खर्च करना चाहती है।

ऐसी धारणा है कि अर्थव्यवस्था बढ़ेगी तो अंततः देश को फायदा होगा. यदि ऐसा है तो हमे सूरत के एयरपोर्ट को सुरक्षित बनाना चाहिए ताकि बाकी दुनिया से संपर्क आसान हो सके न कि केवल मुंबई के लिए बुलेट ट्रेन चलाई जाए। इस भैंस प्रकरण से भारत की अक्षमता सामने आती है। 10 हजार करोड़ की अतिरिक्त रकम एलवेटिड कॉरिडोर के लिए है।

इसका मतलब यह हुआ कि बुलेट ट्रेन भारत की अव्यवस्था से ऊपर होगी। यह परियोजना दिखावे के लिए है। यह पैसे की बर्बादी है जिसका इस्तेमाल स्वास्थ्य और शिक्षा पर किया जा सकता था। जाहिर है बुलेट ट्रेन का इस्तेमाल भारत की बहुसंख्यक आबादी नहीं करेगी। इस बुलेट ट्रेन का इस्तेमाल मुंबई और अहमदाबाद के बीच रहने वाले लोग भी नहीं कर पाएंगे क्योंकि यह हिस्सा बाकी भारत से पहले से ही शानदार तरीके से जुड़ा हुआ है। ( पढ़ते रहिए bhopal samachar हमें ट्विटर और फ़ेसबुक पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं।)
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