क्या यही है शिवराज जी की नजरों में भाजपा के दलित कार्यकर्ता की कीमत

Tuesday, November 8, 2016

सोहन लाल। दिनांक 6 नवंबर 2016 को मप्र के मुख्यमंत्री शिवराज नौगाँव जिला छतरपुर के पास ग्राम धौररा एक भाजपा नेता के घर शोकसंवेदना प्रकट करने गए थे। मगर अफसोस कि मुख्य मंत्री को नौगाँव से 7 किमी दूर दौरिया जाने का समय नही मिला। जहां अभी 10 दिन  पहले चुनावी रंजिश के कारण भाजपा कार्यकर्ता हंसराज अहिरवार हत्याकांड को अंजाम दिया गया  था। यह है मुख्य मंत्री की नजरों मे दलित भाजपा कार्यकर्ता की कीमत।

दौरिया मे भी हंसराज जी के सम्मान मे श्रद्धांजलि सभा थी। जहां हजारो की संख्या मे हंसराज जी के चाहने वालो ने उन्हे श्रद्धापूर्वक श्रद्धांजलि अर्पित की। हंसराज जी की विधवा और नाबालिग बच्चे इंतजार करते रहे कि शायद अपनी रियाया समझकर शिवराज उनके भी आॅसू पोछने आएगा पर ऐसा नही हुआ। जबकि हंसराज जी का पूरा परिवार दहशत मे है और भय ग्रस्त है क्योंकि हत्याकांड का मास्टर माइंड धीरज सहित 6 मुख्य आरोपी आज भी फरार है जिनकी हत्या करने मे अहम भूमिका रही।

यदि ऐसा ही हत्याकांड बहिन मायावती के मुख्यमंत्री रहते हुए उप्र मे घटित हुई होती तो यही भाजपा के नेता यही मीडिया आसमान सर पर उठा लेती। राहुल से लेकर उदित राज, पासवान सभी के दौरे पे दौरे हुए होते। पर चुनाव तो उप्र मे हैं और वहा दलित चुनौती बनकर खडे हैं वह बाबासाहब के दिए हुए संदेश  ''सत्ता की मास्टर चाबी " की कीमत जानने लगे है और यही बात मनु की औलादो को पसंद नही है।

यह है घटनाक्रम 
27 अक्टूबर की दौरिया निवासी हंसराज पिता मकुंदी अहिरवार उम्र 40 साल नौगांव से अपने गांव जा रहा था। करीब चार किमी की दूरी पर उसके गांव के ही एक दर्जन लोगों ने उसे पकड़ लिया। पहले तो उन लोगों ने उसे डंडों से पीटा। जब वह बेहोश हो गया तो आरोपी उसे मरा समझकर भाग गए। नौगांव से लौट रहे हंसराज के भतीजे ने चाचा को घायल हालत में देखा तो नौगांव पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने हंसराज को स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया लेकिन हालत गंभीर होने से उसे जिला अस्पताल रैफर कर किया जहां उसने दम तोड़ दिया। 

हंसराज ने 6 दिन पहले पुलिस से कहा था मुझे जान का खतरा : 
दौरिया गांव में दो पक्षों में लंबे समय से चुनावी रंजिश को लेकर विवाद चल रहा है। एक सप्ताह पहले दूसरे पक्ष ने गांव में ही हंसराज पर हमला किया था। लेकिन वह किसी तरह भाग गया था। दूसरे ही दिन हंसराज अहिरवार ने थाने में जाकर रमेश यादव, महेश यादव, राहुल पाल, अंजुल ठाकुर की शिकायत कर पुलिस को उस पर फायर किए गए कारतूस के खाली खोके भी दिए थे। थाना प्रभारी ने मनगढ़ंत कहानी मानते हुए महज आवेदन लेकर हंसराज को चलता कर दिया था। 

13 लोगों पर दर्ज हुआ हत्या का केस : 
एसडीओपी उमेश तोमर ने बताया हंसराज अहिरवार ने नौगांव अस्पताल में इलाज के दौरान बयान में 13 लोगों के नाम लिए हैं। आरोपियों में धीरज सिंह दौरिया, राहुल पाल, रमेश यादव, महेश यादव, नन्हें राजा, अंजुल ठाकुर, त्रिलोक सिंह, स्वरूप सिंह, गोविंद काछी, अनिल प्रजापति, रामपाल ठाकुर, जयप्रताप ठाकुर और जसवंत ठाकुर पर हत्या का मामला दर्ज किया गया है। 

थानाप्रभारी लाइन अटैच 
हंसराज द्वारा 6 दिन पहले की गई शिकायत पर कार्रवाई न करने के मामले में एएसपी नीरज पांडेय ने थाना प्रभारी को लाइन अटैच कर दिया है। इसके अलावा फरार 13 आरोपियों को पकड़ने डीएसपी के नेतृत्व में चार थाना प्रभारियों की टीमें बनाई गई हैं। 
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