संक्रामक अस्पताल और अमानुष डाक्टर

Thursday, November 3, 2016

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राकेश दुबे@प्रतिदिन। देश की राजधानी दिल्ली समेत देश के विभिन्न हिस्सों से ऐसी कई खबरें आ चुकी हैं, जो यह  बताती हैं कि डॉक्टरी अब मिशन नहीं रही, बल्कि पेशा बन गई है। अस्पताल में मरीज को भरती करने में हीलाहवाली, इलाज में लापरवाही, आपरेशन के दौरान मरीज के शरीर में कैंची-तौलिया आदि छोड़ देना और मरीज की मौत हो जाने के बाद उसके शव के साथ अमानवीय व्यवहार के मामले अक्सर प्रकाश में आते रहते हैं। मौत के बाद अस्पताल प्रशासन मरीज का शव तब तक घरवालों के सुपुर्द नहीं करते, जब तक इलाज की पाई-पाई अदा न हो।

गली-गली खुले नर्सिंग होम्स की हालत और भी बदतर है। अधिकतर नर्सिंग होम्स की कार्यप्रणाली यह है कि वे इलाके में और आसपास प्राइवेट प्रैक्टिस करने वाले डॉक्टरों का नेटवर्क संचालित करते हैं, ये डॉक्टर चाहे डिग्रीधारी हों या झोलाछाप, और ये उन्हें मरीजों को तब हैंडओवर करते हैं, जब मामला उनके हाथ से निकल जाता है। नर्सिंग होम एक बार फिर मरीज पर प्रयोग (एक्सपैरिमेंट) करते हैं, परिवारजनों को नोचते-खसोटते व लूटते हैं। और जब उनके हाथ से भी तोते उड़ जाते हैं, तो वे मरीज को बड़े निजी, सरकारी, अर्द्ध-सरकारी अस्पताल स्थित अपने संपर्कों के हवाले कर देते हैं।

सरकारी अस्पताल तो भगवान भरोसे चल रहे हैं। हाल में खबर आई कि दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान यानी एम्स में भारत-तिब्बत सीमा बल के सब-इंस्पेक्टर नरेश कुमार एक अदद बेड के लिए तरस गए। हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले के मूल निवासी नरेश की दास्तान जब अखबारों में छपी, तब कहीं जाकर उन्हें बेड नसीब हुआ। जब सीमा की रक्षा में लगे जवानों के प्रति डॉक्टरों-अस्पतालों का यह रवैया है, तो बाकी आमजन की बात कौन कहे। 

दरअसल, अकर्मण्यता और अकुशलता नामक मानवीय अवगुण वह देशव्यापी बीमारी है, जिसने पूरे सिस्टम को बर्बाद कर रखा है। बहुधा लोग अपने कार्यक्षेत्र से संबंधित आवश्यक ज्ञान अर्जित नहीं करना चाहते, और जिन्हें काम आता है, वे करना नहीं चाहते। अस्पतालों में अक्सर देखा गया है कि वार्ड ब्वाय और सफाईकर्मियों से इलाज संबंधी ऐसे काम कराए जाते हैं, जिनका उन्हें रंचमात्र ज्ञान नहीं होता। नतीजा मरीजों की मौत अथवा उनकी हालत पहले से बदतर हो जाने की शक्ल में सामने आता है।

डॉक्टरों तथा अस्पतालों की मनमानी, लापरवाही और अमानवीय व्यवहार के खिलाफ विभिन्न अदालतों द्वारा कई बार फटकार लगाई जा चुकी है, कई बार दंडात्मक कार्रवाई भी हो चुकी है। बावजूद इसके, न डॉक्टर सबक ले रहे हैं और न अस्पताल।
श्री राकेश दुबे वरिष्ठ पत्रकार एवं स्तंभकार हैं।        
संपर्क  9425022703        
rakeshdubeyrsa@gmail.com
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