कर्मचारी समाचार| ये कैसा संविलियन: 70 हजार वेतन वाले को 18 हजार

Monday, November 7, 2016

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भोपाल। संविलियन के नाम पर सरकार फिर कर्मचारियों के साथ अजीब तरह का बर्ताव करने लगी है। संविलियन की प्रक्रिया तो शुरू कर दी परंतु एक विभाग से दूसरे विभाग में भेजे गए कर्मचारियों का वेतन 75 प्रतिशत तक घटा दिया गया। जिसे पुराने विभाग में 70 हजार रुपए वेतन मिलता था, संविलियन के बाद उसे 18 हजार रुपए दिया जाएगा। 

कैबिनेट से एप्रूवल के बाद राज्य सरकार के विभिन्न विभागों द्वारा संविलियन योजना के अंतर्गत तिलहन संघ तथा अन्य विभागों के अतिशेष घोषित कर्मचारियों को संविलियन योजना में लाभ देने का काम किया जा रहा है। इसके लिए सहकारिता, सामान्य प्रशासन विभाग, स्वास्थ्य, किसान कल्याण और कृषि विकास, तकनीकी शिक्षा एवं प्रशिक्षण, राजस्व विभाग, महिला एवं बाल विकास, नगरीय विकास एवं आवास, जनसंपर्क, वाणिज्यिक कर में संविलयन योजना में कर्मचारियों व अधिकारियों का संविलियन किया जा रहा है। इसके साथ ही सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग, संसदीय कार्य, अल्पसंख्यक कल्याण एवं पिछड़ा वर्ग, वन, विधि एवं विधायी कार्य विभाग, मछुआ कल्याण एवं मत्स्य विभाग, योजना-आर्थिक एवं सांख्यिकी, उच्च शिक्षा, श्रम, लोक सेवा प्रबंधन विभाग में भी संविलयन की प्रक्रिया चल रही है।

संविलियन योजना में गई गड़बड़ी का अंदाजा इससे लगता है कि 5400 रुपए का ग्रेड पे हासिल करने वाले अधिकारियों को सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग विभाग में 2800 के ग्रेड पे पर नौकरी में रखा गया है। सहकारिता विभाग के तिलहन संघ से दूसरे विभागों में प्रतिनियुक्ति पर काम कर रहे डिप्टी मैनेजर और सहायक मैनेजर स्तर के इन अधिकारियों का ग्रेड पे अधिक होने के बाद भी इन्हें पांच ग्रेड पे से नीचे की नौकरी संविलियन योजना के नाम पर दी जा रही है। सूत्रों ने बताया कि इसके चलते वर्तमान में 70 हजार रुपए मासिक वेतन की पात्रता रखने वाले अधिकारी 18000 रुपए मासिक वेतन पाने की स्थिति में आ जाएंगे।

हाईकोर्ट का आदेश नजरअंदाज
संविलियन योजना में मनमर्जी के खिलाफ सहायक मैनेजर अभिनीत शर्मा, एमएस चौहान, प्रशांत केलापुरे, सुधाकर तिवारी, रजत तिवारी, केएन पारासर, एसयू शाहिद, अरुण पडोले, रमेश कुमार यादव, केएस अमुले, सुरेंद्र सिंह, एसपी सिंह यादव समेत दर्जन अधिकारियों व कर्मचारियों ने हाईकोर्ट में अपील दायर की थी। कोर्ट ने नियुक्ति आदेश नहीं जारी करने के लिए कहा। इसके बाद भी कई विभागों ने एक माह पहले मिले स्टेटस-को के आदेश को नजरअंदाज कर नियुक्तियों के आदेश जारी कर दिए हैं।

अफसरों पर लेन-देन का आरोप
इस पूरे मामले में विभाग प्रमुखों और उनके मातहतों पर लेन-देन के आरोप भी लगाए जा रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि जिन लोगों ने मलाईदार विभागों में पदस्थापना के लिए अफसरों से संपर्क कर लेन-देन कर लिया, उन्हें सही ग्रेड पे और सही विभाग दे दिए गए। वहीं जिन अधिकारियों व कर्मचारियों ने इसके लिए नियोक्ता अफसरों के यहां चक्कर नहीं काटे, उन्हें पहले से मिल रहे कम वेतन वाले पदों पर नियुक्तियां दे दी गईं और अब शिकायतें करने पर सुनवाई करने के लिए भी तैयार नहीं हैं।

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