मुलसमानों का विश्व धर्म सम्मेेलन: 55 एकड़ का इंच इंच ठसाठस था, मांगी अमन की दुआ

Monday, November 28, 2016

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भोपाल। तीन दिनी 69वें इज्तिमा का समापन सोमवार को सामूहिक दुआ के साथ हुआ। अंतिम दिन की नमाज व दुआ में शामिल होने के लिए लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। इसके चलते इज्तिमा स्थल पर 55 एकड़ की जगह में लगाया गया पंडाल भी छोटा पड़ गया। आनन-फानन में और अधिक पंडाल लगाए गए।

ईटखेड़ी में हुए तब्लीगी इज्तिमा के कारण शहर की स्कूल-कॉलेज व मिनी बसों के रूट बदले गए। बसों को करोंद चौराहे से इज्तिमा स्थल ईटखेड़ी तक चलाया गया। लोगों को इज्तिमा स्थल तक पहुंचाने और वापस लेकर आने के लिए परिवहन अधिकारी ने बसों की व्यवस्था की है। रविवार को दोपहर से बसों का अधिग्रहण शुरू कर दिया था।

इस आयोजन के लिए 175 स्कूल-कॉलेज बसों का अधिग्रहण किया गया है। इसी तरह 70 मिनी बसों को रूट बदलकर इज्तिमा स्थल के लिए रवाना कर दिया गया है। आरटीओ का कहना है कि धर्मावलंबियों को आयोजन स्थल तक पहुंचाने और वापस स्टेशन तक छोड़ने के लिए 200 से ज्यादा बसों का अधिग्रहण किया गया है।

कायनात को समझना मुश्किल
गुजरात से आए मौलाना शौकत अहमद ने कहा कि खुदा के बनाए नियमों में दखलअंदाजी न करें। जब हम एक उम्र पार करने के बाद खुद के बारे में और अपने शरीर के बारे में नहीं जान पाते कि हम कौन हैं, तो फिर कायनात को समझ पाना कितना मुश्किल है।

सामूहिक निकाह हुए
रविवार को शाम 5 बजे मौलाना अब्दुल मलिक, काजी सैयद हुसैन व हाफिज जूनैद आदि 500 लोगों के निकाह संपन्न कराए। दिल्ली मरकज के मौलाना जोहेर अहमद ने निकाह पढ़वाए। इसके बाद खुतबा पढ़ा। इस मौके पर दूल्हा व दुल्हन पक्षों के लोग बड़ी तादात में मौजूद थे।

तब्लीगी इज्तिमा में देश के तमाम स्थानों से आए उलेमाओं ने लाखों की संख्या में मौजूद लोगों को तमाम नसीहतें दी। मुंबई से आए मौलाना मुश्ताक अहमद ने कहा कि जिसने यह कायनात बनाई है, उसे भूलकर सुकून से रह पाना नामुमकिन है। इसलिए कायनात को बनाने वाले से राब्ता रखो। इबादत, दुआ और नमाज उससे सीधे राब्ता (संवाद) कायम करने का एक बेहतरीन जरिया है।

55 एकड़ जगह कम पड़ी
इज्तिमा स्थल पर लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। जो धर्मावलंबी अब तक नहीं पहुंचे थे, वे सोमवार को समापन अवसर पर होने वाली दुआ में शामिल होने के लिए रविवार देर रात तक पहुंचे। इसके चलते 55 एकड़ में लगाया गया पंडाल भी छोटा पड़ गया। आनन-फानन में और अधिक पंडाल लगाए गए।
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