सर्जिकल स्ट्राइक के बाद 'कवर्ट ऑपरेशन' की तैयारी, आदेश का इंतजार

Tuesday, October 4, 2016

नई दिल्ली। भारत की सुरक्षा ऐजेन्सियां अब पाकिस्तान के चप्पे चप्पे में छुपे आतंकवादियों को मार गिराने के लिए तैयार हैं। पूरे पाकिस्तान में भारतीय ऐजेन्सियों का नेटवर्क रेडी पोजीशन में है। बस प्रधानमंत्री के आदेश का इंतजार किया जा रहा है। आदेश मिलते ही पाकिस्तान के तमाम शहरों में छुपे भारत के मोस्टवांटेड आतंकवादियों का सफाया कर दिया जाएगा। 

सुरक्षा एजेंसियों के हौसले बुलंद
दरअसल मोदी सरकार के सर्जिकल स्ट्राइक के फैसले के बाद सुरक्षा एजेंसियों के हौसले बुलंद हैं। उन्हें विश्वास है कि पाकिस्तान के भीतर देश के दुश्मनों को खत्म करने के लिए सरकार 'कवर्ट ऑपरेशन' को हरी झंडी दे देगी। वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, राजनीतिक इच्छा शक्ति की कमी के कारण पाक के भीतर छिपे दुश्मनों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर पा रहे थे।

पहले भारत सरकार ऐसे अपराधियों और आतंकियों का डोजियर पाकिस्तान को थमाकर चुप बैठ जाती थी। यही कारण है कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आइएसआइ के संरक्षण में आतंकी आकाओं के हौसले लगातार बढ़ते चले गए। मोदी सरकार के आने के बाद पाकिस्तान को डोजियर देने का सिलसिला बंद हुआ और अब सर्जिकल स्ट्राइक कर भारत ने अपना रुख साफ कर दिया है।

दक्षिण भारत के पुलिस आॅफीसर्स पाकिस्तान में एक्टिव
गृह मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस साल जनवरी में ही दावा किया था कि दक्षिण भारत के एक राज्य की पुलिस अपने एजेंट को पाकिस्तान के किसी भी आतंकी संगठन में शामिल करने में सक्षम हो गई है। पिछले दो साल में आइएस से लेकर अलकायदा और आइएम के ज्यादातर आतंकियों की गिरफ्तारी का श्रेय इसी राज्य की पुलिस को जाता है। इन आतंकियों को अपने मंसूबे को अंजाम देने से पहले ही गिरफ्तार कर लिया गया।

आज तक मौका ही नहीं मिला
इतनी क्षमता हासिल करने के बाद पाकिस्तान के भीतर कोई भी कवर्ट ऑपरेशन मुश्किल नहीं है। वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, भारतीय एजेंसियां 1970 के करीब से ही पाकिस्तान के भीतर कवर्ट ऑपरेशन करने में सक्षम थीं, लेकिन अपनी क्षमता के प्रदर्शन का उन्हें कोई मौका ही नहीं दिया गया।

मनमोहन सरकार ने दाउद को बचाया था 
तीन साल पहले एजेंसियों ने कराची में माफिया सरगना दाऊद इब्राहिम को मारने का पूरा प्लान तैयार कर लिया था। इसके लिए सात एजेंट को अलग-अलग देशों के पासपोर्ट पर पाकिस्तान पहुंचा भी दिया गया था लेकिन अंतिम समय में इस ऑपरेशन को रद कर दिया गया और सभी एजेंट वापस लौट आए।

क्या है कवर्ट ऑपरेशन
इस तरह के अभियानों में एजेंटों की पहचान गुप्त होती है और टारगेट को खत्म करने के बाद उन्हें चुपचाप वापस निकाल लिया जाता है। कोई भी सरकार इसकी जिम्मेदारी नहीं लेती। इजरायल अपने दुश्मनों को खत्म करने के लिए लंबे समय से इस तरह के अभियान करता रहा है। इजरायली एजेंसियों के साथ करीबी रिश्ता इसमें भारतीय एजेंसियों के काम आ सकता है।

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