एनएचएम संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों के ज्वाइनिंग आदेश जारी

Saturday, October 22, 2016

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भोपाल। मप्र संविदा कर्मचारी अधिकारी महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष रमेश राठौर ने बताया कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) मप्र के द्वारा विगत अप्रैल माह में संविदा कर्मचारियों को पद समाप्ति तथा अप्रैजल के नाम पर जिन संविदा कर्मचारियों को नौकरी से हटाने के आदेश जारी किये गये थे उन कर्मचारियों ने माननीय उच्च न्यायलय जबलपुर तथा उच्च न्यायलय की खण्डपीठों में सेवा से बर्खास्तखी के विरूद्व याचिकाएं दायर की थीं। 

माननीय उच्च न्यायालय के द्वारा सैकड़ों कर्मचारियों को एनएचएम के आदेश के विरूद्व स्थगन आदेश पारित किये गये थे । माननीय उच्च न्यायालय से स्थगन आदेश के बावजूद जिलों में बैठे जिला स्वास्थ्य अधिकारी तथा अन्य अधिकारी संविदा कर्मचारियों को ज्वाईन नहीं करा रहे थे । संविदा कर्मचारियों की बहाली तथा जिन कर्मचारियों को स्टे आर्डर न्यायालय की और से मिला है उनको ज्वाईन कराने के लिए म.प्र. संविदा कर्मचारी अधिकारी महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष रमेश राठौर के नेतृत्व में 4 अक्टूबर को विशाल धरना प्रदर्शन किया गया था तथा धरने प्रदर्शन के पश्चात् संविदा कर्मचारी अधिकारी महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष रमेश राठौर के नेतृत्व में एक प्रतिनिधि मण्डल स्वास्थ्य मंत्री रूस्तम सिंह से भी मिला था । मंत्री रूस्तम सिंह के द्वारा संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों के साथ अन्याय नहीं होने दिये जाने का आश्वासन दिया था। 

म.प्र. संविदा कर्मचारी अधिकारी महासंघ लगातार स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों की बहाली के लिए ज्ञापन दे रहा था । अरेरा हिल्स स्थित राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन म.प्र के मुख्यालय के संचालक वीएन चौहान के हस्ताक्षर द्वारा कल शाम एक आदेश जारी कर दिया गया है कि जो कर्मचारी सेवा समाप्त होने के बाद हाईकोर्ट का स्थगन आदेश लेकर आए हैं । उनको सेवा में ज्वाईन कराया जाए। इस आदेश से हजारों संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों की वापसी हो जाएगी । इस आदेश के जारी होने पर म.प्र. संविदा कर्मचारी अधिकारी महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष रमेश राठौर ने स्वास्थ्य मंत्री रूस्तम सिंह सहित राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अधिकारियों के साथ प्रदेश के समाचार पत्र तथा इलेक्ट्रानिक मिडिया का आभार व्यक्त किया है कि उन्होंने हटाये गये संविदा कर्मचारियों की समस्याओं को प्रमुखता से अपने समाचार पत्र तथा न्यूज चैनल में उठाया जिसकी वजह से सरकार ने संज्ञान लिया । 
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