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TOP N TOWN: 500 करोड़ का मालिक विजय रामानी अंडरग्राउंड

Thursday, September 1, 2016

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भोपाल। Ramani Ice Cream Co Pvt Ltd एवं Ramani Group of Companies के मालिक विजय रामानी आयकर छापे के साथ ही भूमिगत हो गए हैं। परिवारजन उनके ठिकाने का पता तक नहीं बता रहे हैं। जिसके कारण आयकर की कार्रवाई में समस्याएं आ रहीं हैं। जब तक विजय रामानी सामने नहीं आ जाते, कार्रवाई को पूर्ण नहीं कहा जा सकता।  रामानी और उनके साझेदार तेजेंदर ब्रदर्स को करीब 500 करोड़ का आसामी बताया जा रहा है। माना जा रहा है कि बड़े पैमाने पर टैक्स चोरी हुई है। 

आईस्क्रीम की कालीकमाई से खड़ा किया रियल एस्टेट का कारोबार
आईसक्रीम के बड़े कारोबारी रामानी बंधुओं ने रियल एस्टेट में भी बड़ी रकम लगाई है। छापामारी में 100 से अधिक अफसरों की टीम पिछले 8 साल का डाटा निकाल रही है। भोपाल और आस-पास जो प्रापर्टी खरीदी गईं, उनका ब्योरा निकाला गया है। विजय रामानी के परिजन उनके बारे में विभाग को सही जानकारी नहीं दे रहे। कभी कहते हैं कि बैंकाक गए, तो कभी बताते हैं मालूम ही नहीं। गलत जानकारी देने पर आयकर विभाग परिजन पर कार्रवाई भी कर सकता है।

10 करोड़ का बंगला 3 करोड़ का दिखाया
विभाग का कहना है कि ऐसे साक्ष्य भी हैं जिनसे साबित हो रहा है कि टैक्स बचाने के लिए प्रोजेक्ट्स की लागत मूल्य में अंतर दिखाया गया है। तेजेंदर सिंह एवं रामानी बंधुओं की आलीशान कोठियां देख आयकर अफसर हैरान हैं। राजधानी के अरेरा कालोनी ई 4/35 स्थित तेजेंदर सिंह के मकान को लेकर विभाग का आकलन है करीब 8-10 करोड़ रुपए लगाया गया है, लेकिन दस्तावेजों में यह रकम एक तिहाई से भी कम दिखाई गई है। इस पर टैक्स वसूली की जाएगी। अन्य सभी प्रॉपर्टी का भी मूल्यांकन हो रहा है। 

अफसरों को भेजे महंगे उपहारों की डीटेल्स मिलीं
विभागीय सूत्रों का कहना है कि रामानी और तेजेंदर सिंह के दस्तावेजों में बड़े अफसरों को लाखों रुपए की गिफ्ट एवं रिश्वत देने का ब्योरा भी दर्ज है। इस जानकारी को डिकोड किया जा रहा है।करोड़ों रुपए का भुगतान कैश में किए जाने के कागज भी मिले हैं। विभाग कम्प्यूटर, लैपटॉप सहित अन्य सभी डिजिटल डाटा की कॉपी लेने में जुटा है। 

केमिकल से पता चलेगा टैक्सचोरी का आंकड़ा 
रामानी की गोदामों में मिले मटेरियल और केमिकल की जांच भी कराई जा रही है। विभाग का कहना है कि इससे स्पष्ट होगा जो आइसक्रीम बन रही थी उसमें केमिकल तय मान से कितना कम-ज्यादा है। इससे लागत में टैक्स चोरी का खुलासा भी होगा।
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