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बच गईं उमा भारती, गिरफ्तारी वारंट स्थगित

Thursday, September 29, 2016

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भोपाल। केंद्रीय मंत्री उमा भारती के खिलाफ मानहानि के प्रकरण में कोर्ट ने गिरफ्तारी वारंट पर स्थगनादेश जारी किया है। गिरफ्तारी वारंट जारी होने के कुछ ही देर के बाद रिविजन याचिका पर सुनवाई करते हुए गिरफ्तारी वारंट पर कोर्ट ने यह आदेश दिया।

2003 के विधानसभा चुनाव के दौरान उमा भारती ने आरोप लगाया था कि मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने अपने पद क दुरुपयोग करते हुए 15 हजार करोड़ रुपए का घोटाला किया है। इन आरोपों को लेकर दिग्विजय सिंह ने उमा भारती पर मानहानि का मुकदमा दायर किया था। मामले में सीजेएम भू भास्कर यादव ने कोर्ट में पेश नहीं होने पर उमा भारती के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया। लेकिन गुरुवार देर शाम तक एडीजे रामकुमार चौबे की कोर्ट ने रिविजन याचिका पर सुनवाई करते हुए गिरफ्तारी वारंट पर स्टे लगा दिया।

वारंट जारी करते समय कोर्ट ने क्या कहा था ?
'आम जनता न्यायालयों पर ये आक्षेप लगाती है कि तारीख पर तारीख मिलती है किंतु एक वर्ष से स्वयं अभियुक्त न्यायालय को उपस्थित होने तारीख पर तारीख दे रही है। ऐसे अभियुक्त के साथ किसी भी प्रकार की सहानभूति न्याय व्यवस्था को विफल करने वाली है। इसलिए उनका हाजिरी माफी आवेदन खारिज किया जाता। चूंकि, अभियुक्त कैबिनेट मंत्री हैं और छोटे अधिकारी उन्हें गिरफ्तार करने से डरेंगे, इसलिए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के माध्यम से वारंट को तामिल कराया जाए।'

वारंट जारी होते ही हलचल तेज
गिरफ्तारी वारंट जारी होने के बाद शासन और प्रशासन में हलचल तेज हो गई। कई प्रशासनिक अधिकारी कोर्ट भी पहुंचे। उमा भारती के वकील हरीश मेहता ने गिरफ्तारी वारंट को लेकर एडीजे रामकुमार चौबे में रिवीजन याचिका लगाई। वकील हरीश मेहता ने कोर्ट को बताया कि उमा भारती भारत सरकार के जरूरी कामों में व्यस्त है, इसलिए उन्हें हाजिरी माफी दी जाए। देर शाम कोर्ट ने गिरफ्तारी वारंट पर स्टे लगा दिया। कोर्ट ने वकील की बातों को आधार मानते हुए स्टे का आदेश दिया।

तय समय सीमा में कोर्ट में पेश नहीं
बीते एक साल से चल रही मानहानि के मामले में दिग्विजय सिंह और उमा भारती की तरफ से समझौता करने के लिए आवेदन भी दिया गया था लेकिन तय समय सीमा 90 दिनों के बावजूद कोई भी कोर्ट में उपस्थित नहीं हुआ। ऐसे में उमा भारती को अपने मुल्जिम बयान दर्ज कराना था। गिरफ्तारी वारंट पर स्टे लगने के बाद अब अब मामले की अगली सुनवाई 17 अक्टूबर को होगी।
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