पाकिस्तान की कसक काश्मीर - क्लिक करें | No 1 Hindi News Portal of Central India (Madhya Pradesh) | हिन्दी समाचार

पाकिस्तान की कसक काश्मीर

Thursday, September 8, 2016

;
राकेश दुबे@प्रतिदिन। वैसे तो किसी भी अन्य देश में भारतीय राजदूत का अपमान करने की कोई घटना, पाकिस्तान में हुई इस घटना के पहले नहीं हुई। पाकिस्तान जो कर रहा है, वह पडौसी के रूप में अनुचित है , पाकिस्तान भारत के गृह मंत्री के साथ भी ऐसा बर्ताव कर चुका है। भारत ने अब भी पूरी शालीनता के साथ पाक के राजदूत को तलब किया। इस पर समग्र विचार करने पर एक  कारण नगर आता है पिछले बीस दिनों में भारत की तरफ से जो कूटनीतिक कदम उठाना और उनसे पाकिस्तान की परेशानी बढ़ना। लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बलूचिस्तान में मानवाधिकार हनन का मसला उठा दिया। फिर जी-20 देशों के शिखर सम्मेलन में उन्होंने बिना नाम लिए पाकिस्तान में पल रहे आतंकवादी संगठनों की तरफ इशारा किया। उधर अमेरिका से भारत की नजदीकी लगातार बढ़ रही है। इसलिए भी पाकिस्तान कश्मीर के मसले पर भारत को उलझाए रखना चाहता है। मगर उसकी इन हरकतों से भारत पर कोई खास असर नहीं पड़ने वाला। उसकी रणनीति कश्मीर में अलगाववादी और कट्टरपंथी ताकतों को अलग-थलग करने की होनी चाहिए।

इस मामले में केंद्र के सारे दल साथ हैं, जम्मू-कश्मीर में भी विपक्षी दल राजनीतिक पहल के जरिए अमन का रास्ता तलाशने के हिमायती हैं। ऐसे में केंद्र सरकार अगर कश्मीर को लेकर कोई व्यावहारिक नीति बनाने और लगातार घाटी के लोगों का भरोसा जीतने का प्रयास करती है, तो पाकिस्तान के मंसूबों पर पानी फेरना मुश्किल नहीं। केंद्र ने हुर्रियत नेताओं को सरकार की तरफ से मिलने वाली मदद और उनकी आमदनी वगैरह पर नजर रखने का विचार बनाया है। यह उन पर नकेल कसने का एक उपाय हो सकता है, पर इस मामले में हर कदम बहुत सावधानी से उठाने की जरूरत है। अलगाववादियों के खिलाफ एकदम से कोई कड़ा उठाना पाकिस्तान को लाभ पहुंचा सकता है। छिपी बात नहीं है कि ये अलगाववादी नेता पाकिस्तान की शह पर घाटी में अस्थिरता पैदा करने का प्रयास करते हैं।

जब भी भारत अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आतंकवाद का मसला उठा कर पाकिस्तान को घेरने की कोशिश करता है, उसकी बौखलाहट बढ़ जाती है। नियंत्रण रेखा पर संघर्ष विराम का उल्लंघन और भारतीय उच्चायुक्त गौतम बंबावले का कार्यक्रम रद्द करना पाक अधिकारियों की इसी बौखलाहट का नतीजा है। हकीकत यह है कि घाटी के आम लोग खून-खराबे के बजाय बातचीत के जरिए हल तलाशने के हिमायती हैं। ऐसे में हुर्रियत नेताओं के प्रति नकारात्मक रुख बना है। पाकिस्तान को इसकी भी कसक है। कश्मीर एक ऐसा मसला है, जिसे पाकिस्तान हर वक्त भुनाना चाहता है।
श्री राकेश दुबे वरिष्ठ पत्रकार एवं स्तंभकार हैं।        
संपर्क  9425022703        
rakeshdubeyrsa@gmail.com
पूर्व में प्रकाशित लेख पढ़ने के लिए यहां क्लिक कीजिए
आप हमें ट्विटर और फ़ेसबुक पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं।
;

No comments:

Popular News This Week