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ये है कलेक्टर की फटकार से बेहोश हुई महिला का सच

Thursday, September 8, 2016

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मुरैना। बुधवार को कलेक्टर से मिलने आई एक महिला बेहोश हो गई। बाद में बताया गया कि कलेक्टर ने उसे इस कदर फटकारा कि वो डर के मारे बेहोश हो गई। उसे अस्पताल दाखिल किया गया है। इस मामले में पता चला है कि महिला एसएएफ स्कूल में रसोइया का काम करती है और स्कूल में बने एक कमरे में परिवार सहित रहती है। स्कूल प्रबंधन को अब उस कमरे की जरूरत है अत: स्कूल ने उसे कमरा खाली करने के लिए कह दिया है। महिला चाहती थी कि कलेक्टर उसे कमरे में कब्जा रखने के लिए अनुमति दे दें। यहां बता दें कि शासन की कई योजनाएं निर्धन नागरिकों को आवास उपलब्ध करातीं हैं। वो खाली पड़ी सरकारी जमीन पर कच्चा कमरा बनाकर भी रह सकती है। 

जानकारी के अनुसार ममता पत्नी रतनसिंह सविता, एसएएफ मिडिल स्कूल में रसोइया के रूप में पदस्थ है।  अत: पूरे परिवार के भोजन का प्रबंध फ्री में हो जाता है। ममता का पति रतनसिंह सड़क किनारे बैठकर लोगों की दाड़ी-कटिंग करता है। ममता को स्कूल में खाना बनाने के एवज में प्रतिमाह एक हजार रुपए मिल जाते हैं। ममता के दो बेटे हैं। बड़ा बेटा 12वीं कक्षा में व छोटा 10वीं कक्षा में पढ़ रहा है।

उसे कमरा खाली करने के लिए कहा जा रहा है
बकौल ममता, वह स्कूल में ही बने एक खाली पड़े कमरे में रहकर अपना गुजारा कर रही है लेकिन दो महीने से उसे कमरा खाली करने के लिए कहा जा रहा है। महिला की फरियाद थी कि उसे स्कूल के कमरे में ही परिवार के साथ रहने की मोहलत दी जाए लेकिन फरियाद सुनने के बाद कलेक्टर ने कोई आश्वासन देने के बजाय उसे दुत्कारते हुए कहा कि वह कोई सरकारी कर्मचारी नहीं है जो स्कूल में रहने दिया जाए। 

महिला का बयान 
ममता के अनुसार कलेक्टर के तेवर इतने तीखे थे कि वह बुरी तरह घबरा गई। कांपती हुई ममता जैसे-तैसे कलेक्टर कार्यालय से बाहर तो आ गई लेकिन दरवाजे पर आते ही वह बेहोश होकर गिर पडी। कुछ समय पूर्व कलेक्टर एसएएफ स्कूल का निरीक्षण करने पहुंचे थे। उस वक्त उन्होंने खुद ममता से कहा था कि अगर कोई समस्या हो तो मुझसे आकर मिल लेना। बकौल ममता, मैं इसी उम्मीद में आज कलेक्टर से मिलने पहुंची थी कि मुझे यहां से कुछ राहत मिल सकेगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ। बकौल ममता, उन्होंने मेरी एक न सुनी और कहा कि तुम कोई सरकारी कर्मचारी नहीं हो जो तुम्हे रहने के लिए सरकारी भवन का प्रबंध करा दूं।

बेटे के पास होने तक रहने दो 
जिला अस्पताल में भर्ती ममता आंसू बहा रही थी। उसने बताया कि उसका परिवार अत्यंत गरीब है। ममता के अनुसार यदि मुझे स्कूल से निकाल दिया गया तो किराए से घर लेना पड़ेगा, जिसके लिए हमारे पास रुपए नहीं है। इसलिए मैं चाहती हूं कि बड़े बेटे के 12वीं पास करने तक स्कूल में रहने की मोहलत मिल जाए। बेटा 12वीं पास कर लेगा तो वह भी मेहनत करके घर खर्च में हाथ बटाएगा। तब हम कहीं किराए से घर लेकर रह लेंगे।

कलेक्टर का बयान 
विनोद शर्मा, कलेक्टर मुरैना का कहना है कि स्कूल भवन में रसोइया के रहने का कोई नियम नहीं है। मैने महिला को डांट नहीं लगाई, बस इतना कहा था कि तुम स्कूल भवन में नहीं रह सकती। महिला चार साल से स्कूल में कैसे रह रही थी, यह मुझे नहीं मालूम।
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