कुपोषण तथा मातृ-शिशु मृत्यु पर श्वेतपत्र जारी करेगी शिवराज सरकार

Wednesday, September 14, 2016

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भोपाल। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने निर्देश दिये हैं कि प्रदेश से कुपोषण को समाप्त करने के लिये महिला-बाल विकास तथा स्वास्थ्य विभाग मिलकर अभियान चलायें। इस अभियान में समाज के सभी वर्गों का सहयोग लें। कुपोषण तथा मातृ एवं शिशु मृत्यु दर की स्थिति पर श्वेत-पत्र जारी करें। मुख्यमंत्री श्री चौहान आज यहाँ मंत्रालय में मंत्रीगण तथा वरिष्ठ अधिकारियों की संयुक्त बैठक में जन-संकल्प-2013, मंथन-2014 एवं दृष्टि-पत्र-2018 की समीक्षा कर रहे थे।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने इस वृहद बैठक में कहा कि टीम मध्यप्रदेश के रूप में विकास और जन-कल्याण के कामों की जिम्मेदारी आप सबके कंधों पर है। इसे पूरी गंभीरता से करें और मध्यप्रदेश को हर क्षेत्र में अव्वल बनायें। उन्होंने 19 विभाग से संबंधित बिन्दुओं की समीक्षा की। शेष विभागों की समीक्षा 20 सितम्बर को करेंगे। मुख्यमंत्री ने बैठक में संबंधित विभागों को जरूरी दिशा-निर्देश दिये। साथ ही कहा कि इन निर्देशों को नीतिगत फैसले मानकर कार्यवाही सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि हर तीन माह में इस तरह की समीक्षा बैठक होगी।

मंत्रीगण और अधिकारियों की समिति गठित
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि कुपोषण को दूर करना और मातृ एवं शिशु मृत्यु दर कम करना चुनौतीपूर्ण कार्य है। इस दिशा में आवश्यक व्यवस्था बनाने के लिये महिला-बाल विकास मंत्री, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री, अपर मुख्य सचिव वन, प्रमुख सचिव महिला-बाल विकास तथा प्रमुख सचिव लोक स्वास्थ्य विभाग की समिति गठित की। श्री चौहान ने कहा कि स्वागतम् लक्ष्मी अभियान को जन-अभियान बनायें। कुपोषित बच्चों के उपचार के फॉलोअप की बेहतर व्यवस्था करें। महिला स्व-सहायता समूहों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की योजना बनायें। महिला स्व-सहायता समूह कौन-कौन से उत्पाद बना सकते हैं इसकी विस्तृत कार्य-योजना बनायें।

बैठक में बताया गया कि महिला-बाल विकास विभाग द्वारा संचालित सामुदायिक नेतृत्व क्षमता कार्यक्रम में 16 हजार हितग्राही लाभान्वित हुए हैं। लाडो अभियान में बीते तीन साल में 3 हजार 779 बाल विवाह रोके गये हैं। प्रदेश के सभी 51 जिले में शौर्या दलों का गठन किया जा चुका है। उदिता योजना में 80 हजार आँगनवाड़ी में सेनेटरी नेपकिन उपलब्ध करवाने के लिये उदिता कार्नर बनाये गये हैं।
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