राजनीति में नहीं आएगा कैलाश विजयवर्गीय का बेटा

Wednesday, September 14, 2016

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भोपाल। भाजपा के महासचिव एवं इंदौर के दिग्गज भाजपा नेता कैलाश विजयवर्गीय का कहना है कि आकाश की राजनीति में कोई रुचि नहीं है। वह मेरे कहने पर ही महू जाता है। उसकी आध्यात्मिक क्षेत्र में रुचि बढ़ती जा रही है। बता दें कि पिछले विधानसभा चुनाव से ही आकाश विजयवर्गीय को कैलाश का उत्तराधिकारी माना जा रहा है। कैलाश के समर्थक भी आकाश का स्वागत कर रहे हैं। अनेक अवसरों पर होर्डिंग्स में आकाश के फोटो प्रमुखता से प्रकाशित किए जा रहे हैं परंतु कैलाश विजयवर्गीय के इस बयान के बाद लगता है आकाश विजयवर्गीय ने पापा के पदचिन्हों पर चलने से इंकार कर दिया है। बताया जाता है कि आकाश विजयवर्गीय भगवान शिव का परमभक्त है और आकाश का ज्यादातर समय भगवान शिव की आराधना एवं शिवभक्तों की मदद करने में ही बीत रहा है। 

कैलाश विजयवर्गीय इंदौर में नईदुनिया से विशेष बातचीत कर रहे थे। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार और संगठन जिस तरह से काम कर रहे हैं, उससे अफसरशाही तो निरंकुश हो ही रही है, कार्यकर्ताओं में भी निराशा का भाव आता जा रहा है। ये स्थिति 2018 के विधानसभा चुनावों के लिए खतरनाक भले ही न हो लेकिन संकेत अवश्य है। भाजपा ने प्रदेश में गुडगवर्नेंस का वादा किया है, उस पर वह कितना खरा उतर रही है, इसका आत्मावलोकन शीर्ष पर बैठे पदाधिकारियों को करना चाहिए। 

भाजपा कार्यकर्ता ठगा महसूस कर रहा है
​कैलाश ने कहा कि एक वर्ष से सरकार की कार्यप्रणाली देख-समझ रहा हूं। बीच-बीच में मुख्यमंत्री को अवगत भी करवाता रहा। इसके बाद भी अफसरों का रवैया ठीक नहीं रहा तो सार्वजनिक रूप से आईना दिखाया। अफसरों में दंभ आ गया है कि सरकार वे चला रहे हैं। उन्होंने कार्यकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा शुरू कर दी। अफसरों के रवैये से कार्यकर्ता ठगा महसूस कर रहे हैं, इसलिए मुझे आवाज उठाना पड़ी।

पदाधिकारी को संगठन की कम, सरकार की चिंता ज्यादा होती है 
उन्होंने कहा कि संगठन में बैठे हुए लोग सरकार की चिंता ज्यादा कर रहे हैं और संगठन की कम। जबकि सरकारें संगठन के कारण बनती हैं। सरकार के कारण संगठन नहीं बनता है। पता नहीं ये छोटी सी बात समझ क्यों नहीं आ रही। हमने गुड गवर्नेंस की बात कही है। शिवराजजी ने ईमानदारी से प्रदेश के हर वर्ग के लिए काम किया है, लेकिन मुख्यमंत्री की सज्जनता का लाभ अधिकारी ज्यादा ही उठा रहे हैं। सरकार बनने में मुश्किल तो नहीं आएगी, क्योंकि कांग्रेस प्रदेश में बची नहीं है, लेकिन हमने गुड गवर्नेंस का वादा किया है, क्या वह हम पूरा कर पा रहे हैं, इस पर विचार करना चाहिए।
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