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सामान्य ज्ञान भाग 44 न्याय की जंजीर (महत्वपूर्ण तथ्य)

Monday, September 12, 2016

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न्याय की जंजीर जहॉगीर 
1-अकबर का उत्तराधिकारी सलीम हुआ। जो 24 अक्टुबर 1605 ई0 को नूरद्धीन मुहममद जहॉगीर बादशाही गाजी की उपाधि धारण कर गददी पर बैठा।
2-जहॉगीर का जन्म 30 अगस्त 1569 ई0में हुआ था।
3-अकबर ने अपने पुत्र का नाम सूफी संत शेख सलीम चिश्ती के नाम पर रखा।
4-जहॉगीर को न्याय की जंजीर के लिये याद किया जाता है।यह जंजीर सोने की बनी थी।जो आगरे के किले के शाहबुर्ज एवं यमुनातट पर स्थित पत्थर के खम्भे में लगवाई हुई थी।
5-जहॉगीर द्रारा शुरू की गई तुजुके- ए-जहॉगीरी नामक आत्मकथा को पूरा करने का श्रेय मौतबिन्द खॉ को है।
6-जहॉगीर के सबसे बडे पुत्रखुसरो ने 1606 ई0 में अपने पिता के बिरूद्ध विद्रोह कर दिया। खुसरो और जहॉगीर की सेना के बीच युद्ध जालंधर के निकट भैरावल नामक मैदान में हुआ।खुसरो को पकडकर कैद में डाल दिया गया।
7-खुसरो की सहायता देने के कारण जहॉगीर ने सिक्खो के 5 वे गुरू अर्जुनदेव को फॉसी दिलवा दी। खुसरो गुरू से गोइंदवाल में मिला था।
8-अहमदनगर के वजीर मलिक अम्बर के विरूद्ध सफलता से खुश होकर जहॉगीर ने खुर्रम को शाहजहॉ की उपाधि प्रदान की।
9-1622 ई0 में कंधारमुगलो के हाथ से निकल गया। शाह अब्बास ने इस पर अधिकार कर लिया। 
10-नूरजहॉ ईरान निवासी मिर्जा गयास बेग की पुत्री नूरजहॉ का वास्तविक नाम मेहरून्निसा था।1594 ई0में नूरजहॉ का विबाह अलीकुली वेग से सम्पन्न हुआ। जहॉगीर ने एक शेर मारने के कारण अलीकुली वेग को शेर अफगान की उपाधि प्रदान की। 1607 ई0 में शेर अफगान की मृत्यु के बाद मेहरून्निसा अकबर की बिधवा सलीमा बेगम की सेवा में नियुक्त हुई। सर्वप्रथम जहॉगीर ने नवरोज त्योहार के अवसर पर मेहरूनिनसा को देखा। और उसके सौन्दर्य पर मुग्ध होकर जहॉगीर ने मई 1611 में उससे विवाह कर लिया। विवाह के पश्चात जहागीर ने उसे नूरमहल एवं नूरजहॉ की उपाधि प्रदान की। नूरजहॉ के सम्मान में जहॉगीर ने चॉदी के सिक्के जारी किये।
11-जहॉगीर ने गियास बेग को शाही दीवान बनाया एवं इतमाद-उद-दौला की उपाधि दी।
12-लाडली बेगम शेर अफगान एवं मेहरून्निसा की पुत्री थी। जिसकी शादी जहॉगीर के पुत्र शहरयार के साथ हुई थी।
13-नूरजहॉ की मॉ अस्मत बेगम ने गुलाब से इत्र निकालने की बिधि खोजी थी।
14-महावत खॉ ने झेलम नदी के तट पर 1662 ई0 में जहॉगीर नूरजहॉ एवं उसके भाई आसफ खॉ को बन्दी बना लिया था।
15-जहॉगीर के पॉच पुत्र थे। 1,खुसरो 2,परवेज, 3,खुर्रम, 4,शहरयार, 5, जहॉदार।
16-28 अक्टुबर 1627 ई0 को भीमवार नामक स्थान पर जहॉगीर की मृत्यु हो गयी। उसे षहदरा लाहौर में रावी नदी के किनारे दफनाया गया।
17-मुगल चित्रकला अपने चरमोत्कर्ष पर जहॉगीर के शासनकाल में पहुॅची।
18-जहॉगीर के दरबार के प्रमुख चित्रकार थे। आगा रजा, अबुल हसन, मुहम्मद नासिर, मुहम्मद मुराद, उस्ताद मंसूर, एवं अबुल हसन को जहॉगीर ने क्रमशः नादिर-अल-उस एवं नादिरूजजमा की उपाधि प्रदान की।
19-जहॉगीर ने अपनी आत्मकथा में लिखा कि कोई भी चित्र चाहे वह किसी मृतक ब्यक्ति या जीवित ब्यक्ति द्रारा बनाया गया हो, मैं देखते ही तुरन्त बता सकता हूॅ। कि यह किस चित्रकार की कृति है। यदि किसी चेहरे पर ऑख किसी एक चित्रकार ने भैहे किसी और ने बनाई हो तो भी यह जान लेता हूॅ। कि ऑख किसने और भैहे किसने बनाई है।
20-जहॉगीर के समय को चित्रकाल काल का स्वर्णकाल कहा जाता है।
21-इतमाद -उद-दौला का मकबरा 1626 ई0 में नूरजहॉ बेगम ने बनवाया। मुगलकालीन वास्तुकला, के अन्तर्गत  निर्मित यह प्रथम ऐसी इमारत है, जो पूर्णरूप से बेदाग सफेद संगमरमर से निर्मित है। सर्वप्रथम इसी इमारत में पित्रदुरा नामक जडाऊ काम किया गया।
22-अशोक के कौशाम्बी स्तम्भ  वर्तमान में प्रयाग पर समुद्रगुप्त की प्रयाग प्रशस्ति तथा जहॉगीर का लेख उत्कीर्ण है।
23-जहॉगीर के मकबरा का निर्माण नूरजहॉ ने करवाया था।
24-जहॉगीर के शासनकाल में कैप्टन  हॉकिन्स सर टॉमस रो , विलियम, फिच एवं एडवर्ड टैरी जैसे यूरोपियो यात्री आये थे।
25-जहॉगीर के बाद सिहांसन पर शॉहजहा बैठा।
26-शाहजहॉ ने आसफ खॉ को वजीर पद एवं महावत खॉ को खान खाना की उपाधि प्रदान की।
27-इसने नूरजहॉ को दो लाख रूपये। प्रतिबर्ष की पेंशन देकर लाहौर जाने दिया। जहॉ 1645 ई0 में उसकी मृत्यु हो गयी।
28-अपनी बेगम मुमताज महल की याद में शाहजहॉ ने ताजमहल का निमार्ण आगरे में उसकी कब्रके  ऊपर करवाया।
29-ताजमहन का निमार्ण करने बाला मुख्य स्थापत्य कलाकार उस्ताद अहमद लाहौरी था।
30-मयूर सिहांसन का निमार्ण शाहजहॉ ने करवाया था। इसका मुख्य कलाकार बे बादल खॉ था।
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