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बालाघाट में 11 परिवारों का सामाजिक बहिष्कार

Monday, September 19, 2016

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सुधीर ताम्रकार/बालाघाट। न तो दुकानों से अनाज मिलना और न ही लोगों के घर आना-जाना। कुछ इस तरह की स्थिति बालाघाट जिले के बिरसा थाना क्षेत्र के भटलई गांव के एक दर्जन ग्रामीणों का बना हुआ है। दरअसल, गांव के कुछेक ग्रामीणों ने 11 परिवारों का सामुहिक रूप से समाज से बहिष्कार कर दिया है। जिसके बाद से इन पीडित परिवारों के घर कोई भी नहीं जा रहा है। उन्हें कोई भी सहयोग नहीं कर रहा है। पीडित परिवार ने इस मामले की शिकायत कर न्याय की गुहार लगाई है।

ग्राम भटलई में खड़े ये वही ग्रामीण है जिन्हें गांव के कुछ दंबग लोगों ने सामूहिक रूप से बहिष्कृत कर दिया है। गांव से बहिष्कृत होने की वजह से गांव का ये परिवार अपने ही घरों में कैद हो गए हैं। आलम यह है कि इन परिवार के घरों में न तो कोई आ रहा है और न ही इन्हें कोई मदद कर रहा है। इतना ही नहीं गांव में संचालित किराना दुकान व अन्य दुकानों से उन्हें जरुरत की सामग्री प्रदान नही कर रहा है। जिसके कारण वे अपने आप को प्रताडित समझ रहे हैं। पीडित परिवार ने इस मामले की शिकायत कलेक्टर, एसपी, मलाजखंड थाना में भी की है।  पीडित परिवारों के अनुसार बाबा हनुमान की पूजा-अर्चना करना इसकी वजह बन गई है। 

उन्होंने बताया कि वे वर्ष 1998 से मानव धर्म अपना लिये है जिसमें वे बाबा हनुमान की पूजा-अर्चना करते हैं। उनका अनुसरण करते हुए गांव के 11 परिवार के भी लोग भी बाबा हनुमान की पूजा-अर्चना करते है। इन सभी परिवार को समाज से बहिष्कृत करने का फरमान जारी कर दिया है। मौजूदा समय में सभी लोग अपने-अपने घरों में कैद हो गए हैं।

जानकारी के अनुसार गांव के 5-6 लोगों ने बैठक कर समाज से बहिष्कार करने का फरमान सुना दिया। जिसके बाद से कोई भी ग्रामीण न तो उनके घर आ रहा है और न ही उन्हें कोई सहयोग कर रहा है। इस मामले की शिकायत कर न्याय की गुहार लगाई गई है। वहीं बहिष्कृत किये गये ग्रामीणों के संबंध में मीडि़या की टीम ने ग्रामीणों से चर्चा की तो उन्होंने उनके उपर लगे सभी आरोपो को निराधार बाते हुये सभी आरोपी से इंकार कर रहे है।  इतना ही नहीं उनका कहन है कि इस तरह का कोई भी फरमान नहीं सुनाया गया है। सभी लोग स्वतंत्र हैं। कोई भी किसी के भी घर में आ जा सकता है। समाज से बहिष्कार किए जाने का असर शिक्षा के मंदिर में भी नजर आ रहा है। इन परिवारों के बच्चे प्राथमिक शाला में अध्ययन करते है जिनके साथ में मध्यान्ह भोजन में भी भेदभाव किया जा रहा है। मध्यान्ह भोजन में उन्हें अन्य बच्चों से अलग बिठाया जाता है। शाला में बच्चों के साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है। वहीं इस मामले की गंभीरता को देखते हुये बालाघाट के पुलिस अधीक्षक के द्वारा एडीषनल एसपी को पुरे मामले की जॉच की जिम्मेदारी सौंपी गई है। जल्द ही इस मामले की निष्पक्ष जॉच कर कार्यवाही की जायेगी।  

समाज से बहिष्कार किए जाने का असर शिक्षा के मंदिर में भी नजर आ रहा है। यहां पीडित परिवार के बच्चों के साथ शाला में सौतेला व्यवहार किया जा रहा है। पीडित सुरेश बिसेन ने बताया कि चमारू सिंह मेरावी की बच्ची प्राथमिक शाला भटलई में कक्षा पांचवी में अध्ययन कर रही है। लेकिन शाला में उसके साथ भी काफी भेदभाव किया जा रहा है। उसे अलग बैठाया जाता है। मध्याह्न भोजन भी अलग से दिया जा रहा है। इसकी शिकायत किए जाने के बाद अधिकारियों के एक दल ने इस मामले की जांच की है। 
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