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सुप्रीम कोर्ट ने मप्र में आदिवासियों पर अत्याचार की रिपोर्ट मांगी

Sunday, August 14, 2016

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भोपाल। सुप्रीम कोर्ट ने मध्यप्रदेश के 3 जिले हरदा, बैतूल एवं खंडवा में वनविभाग के अधिकारियों द्वारा आदिवासियों पर किए जा रहे अत्याचारों की रिपोर्ट मांगी है। आदिवासियों की शिकायतों की जांच शिकायत निवारण प्राधिकरण (जीआरए) करेगा। सुप्रीम कोर्ट ने इसके लिए 3 माह का समय दिया है। 

'श्रमिक आदिवासी संगठन' ने हाईकोर्ट के एक आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी। हाईकोर्ट ने संगठन की उस याचिका को रद्द कर दिया था जिसमें आरोप लगाया गया था कि वन और पुलिस विभाग के कुछ अधिकारी 'सामंतो' की तरह व्यवहार करते हैं और आदिवासियों को अपना गुलाम मानते हैं।

मुख्य न्यायमूर्ति टी एस ठाकुर के नेतृत्व में न्यायमूर्ति आर भानुमती और न्यायमूर्ति उदय उमेश ललित की पीठ ने राज्य के हरदा, बैतुल और खंडवा के जीआरए को इन मुद्दों को देखने और संबद्ध जिला न्यायाधीशों को अपनी रिपोर्ट तीन महीने के भीतर देने का निर्देश दिया है। न्यायालय ने मध्य प्रदेश सरकार को भी निर्देश दिया है कि वह "जीआरए को वित्तीय और मानव संसाधन के रूप में हरसंभव सहायता दे ताकि वे अपने काम को पूरा कर सकें।" 

याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि शीर्ष न्यायालय के अगस्त 2012 के आदेश के आधार पर इन तीन जिलों में जीआरए की स्थापना तो हो गई थी लेकिन इन प्राधिकरणों ने अभी तक कोई उल्लेखनीय काम नहीं किया है। 

याचिका में दावा किया गया कि हरदा के जीआरए ने तो आज तारीख तक काम करना भी शुरू नहीं किया है, जबकि बैतूल के जीआरए ने बीते तीन साल में केवल एक ही आदेश पारित किया है और अन्य शिकायतों पर अभी कोई फैसला ही नहीं लिया है। अदालत को बताया गया कि खंडवा जिले के जीआरए के पास ज्यादा शिकायतें नहीं आई हैं।
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