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“आनर किलिंग” [झूठी शान] के खिलाफ सख्त कानून बने

Sunday, August 14, 2016

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राकेश दुबे@प्रतिदिन। देश के मुख्य सूचना आयुक्त झूठी शान में हत्याओं के खिलाफ आदेश ऐसे मामलों की रोकथाम में अगर कोई भूमिका निभाता है तो निश्चित ही स्वागतयोग्य है। देश में ऐसी वारदातों में वृद्धि देखी गई है। नए कानूनी और प्रशासनिक पहल की दरकार है। नए आदेश के मुताबिक अगर विशेष विवाह कानून के तहत नवदंपति को ऐसी आशंका जाहिर करके पुलिस और सरकारी तंत्र की सुरक्षा हासिल हो जाती है, तो इन वारदातों में कमी की संभावना बन सकती है। आखिर किसी लड़के या लड़की के मां-बाप या परिवार की इजाजत के बगैर शादी करने पर कथित सामाजिक मान-सम्मान की वजह से गुस्सा शुरुआत में ज्यादा होता है। जो वक्त बीतने के साथ अमूमन शांत हो जाता है। कुछेक मामले ऐसे जरूर हो सकते हैं, जिनमें नाराजगी कभी नहीं जाती लेकिन उन्हें अपवाद मानकर चला जा सकता है। अमूमन यह देखा गया है कि कुछ दिन बाद गुस्सा शांत होने पर दंपति को स्वीकार कर लिया जाता है।

इसलिए विवाह के फौरन बाद सुरक्षा मुहैया कराने का उपाय कारगर हो सकता है, बशर्ते यह ठीक से लागू किया जा सके। यह भी देखा गया है कि पुलिस और प्रशासन में लोगों की रुचि भी ऐसे मामलों में कम होती है, क्योंकि उनका नजरिया भी समाज में प्रचलित धारणाओं के अनुरूप ही होता है। इसलिए इस पर सख्ती से अमल आस्त करने के लिए कोई कानूनी कदम उठाया जाए तो बेहतर हो सकता है।

बढ़ते शहरीकरण और लड़कियों में शिक्षा तथा अपने अधिकारों के प्रति जागरूकता से अपनी पृष्ठभूमि या सामाजिक दायरे से बाहर मेल-जोल बढ़ रहा है। इसलिए पुरानी मान्यताएं तेजी से टूट रही हैं। ऐसे दौर में स्त्रियों के खिलाफ उत्पीड़न की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। कन्या भ्रूण हत्या और बलात्कार की बढ़ती घटनाएं इसकी गवाह हैं। इनकी रोकथाम के लिए हाल में कड़े कानून बनाए गए हैं। बलात्कार के मामलों में तो वयस्कता की दहलीज पर खड़े किशोर अपराधियों पर भी वयस्कों की तरह मुकदमा चलाने का कानून बन गया है। इसलिए ‘ऑनर कीलिंग’ के मामले में भी सख्त कानून समय की मांग है।

असल में जाति और धर्म की जकड़नें तभी टूटेंगी जब सामाजिक जागरूकता के साथ सरकारी नीतियों-कार्यक्रमों में प्रोत्साहन या सजा के प्रावधान कड़े होंगे। हालांकि, यह भी विचारणीय है कि प्रधान सूचना आयुक्त के निर्देश को केंद्रीय और राज्य सरकारी मशीनरी कितनी गंभीरता से लेती है। इसलिए बेहतर यही है कि इस मामले में केंद्र और राज्य सरकारें पहल करें।
श्री राकेश दुबे वरिष्ठ पत्रकार एवं स्तंभकार हैं।        
संपर्क  9425022703        
rakeshdubeyrsa@gmail.com
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