सिंहस्थ घोटाला: लोकसभा और विधानसभा में खर्च का हिसाब अलग अलग कैसे

Thursday, August 11, 2016

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भोपाल। सिंहस्थ 2016 के खर्चों को लेकर सरकार लगातार निशाने पर बनी हुई है। कांग्रेस की ओर से एक नई जानकारी प्रस्तुत की गई है। बताया गया है कि मप्र सरकार ने विधानसभा में जो सिंहस्थ खर्चों का ब्यौरा दिया था, और अब लोकसभा में जो डीटेल्स पेश की गईं हैं, उनमें 2476 करोड़ रुपए का अंतर है। एक ही आयोजन के खर्चों की डीटेल्स अलग अलग कैसे हो सकतीं हैं। क्या यह 2476 करोड़ का घोटाला है। 

प्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता केके मिश्रा ने आज यहां जारी अपने बयान में कहा कि प्रदेश विधानसभा के माह जुलाई, 16 में संपन्न सत्र के दौरान कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक डॉ. गोविंद सिंह द्वारा ध्यानाकर्षण सूचना क्रमांक 249 के उत्तर में राज्य सरकार ने बताया है कि उज्जैन में संपन्न सिंहस्थ-2016 के आयोजन हेतु वर्ष 2010-11 से वर्ष 2016-17 तक कुल रूपये 2771.65 करोड़ रूपये की राशि व्यय की जाना प्रस्तावित था। जिसमें केंद्र सरकार से प्राप्त रूपये 100 करोड़ की राशि भी शामिल है। सिंहस्थ-2016 में अब तक कुल रूपये 2000.93 करोड़ रूपये की राशि का व्यय किया गया है। 

ठीक इसके विपरीत देश की लोकसभा में प्रश्न क्र. 112 के प्रत्युत्तर में केंद्र सरकार ने इस आयोजन को लेकर विभागवार आवंटित एवं व्यय राशि का महायोग 3303.58 करोड़ रूपये, स्वीकृत राशि में से 435.36 करोड़ रू. नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण, 165.85 करोड़ रू. मप्रसवि निगम एवं 5.39 करोड़ रू. वन विभाग के बजट से कुल व्यय 606.60 करोड़ रू., तदानुसार व्यय 432.00 करोड़ रू., 131 करोड़ व 3.93 करोड़ रू., कुल रू. 566.93 करोड़ तत्संबंधी विभागों द्वारा खर्च बताया है, जो कुल व्यय के रूप में 4477.11 करोड़ रू. होता है।

मिश्रा ने कहा कि एक ओर जहां राज्य सरकार प्रदेश विधानसभा में 2000.93 करोड़ रूपये की राशि का व्यय बता रही है, वहीं केंद्र सरकार लोकसभा में 4477.11 करोड़ रूपये की राशि व्यय होना बता रही है। ऐसी स्थिति में 2476.18 करोड़ रूपयों की बड़ी व्यय राशि का अंतर किसने, किस मद से और कहा व्यय किया, अनुसंधान का विषय है। 

इन गंभीर विरोधाभासों के बीच प्रदेश की जनता राज्य सरकार पर विश्वास करें या केंद्र सरकार पर? उन्होंने सिंहस्थ के आयोजन को लेकर कथित तौर पर (ई)-मानदार प्रचारित करने वाली राज्य सरकार से वास्तविक खर्च को लेकर अपनी स्थिति सार्वजनिक करने का आग्रह करते हुए कांग्रेस के उस आरोप को पुनः दोहराया है कि झूठे आंकडे़ परोसकर राज्य सरकार इस आयोजन के नाम पर हुए करोड़ रू. के भ्रष्टाचार से बच नहीं सकेगी।
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