सरकार, जनता की पीड़ा तो महंगाई है

Monday, August 1, 2016

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राकेश दुबे@प्रतिदिन। वित्त मंत्री अरुण जेटली सांत्वना दें या राहुल गाँधी ‘अरहर मोदी’ का नारा दें। इस सारे मामले को देश की जनता गंभीरता से ले रही है क्योंकि देश की जनता से बेहतर कोई महसूस नहीं कर सकता। यह वही तबका है, जो 2014 में भाजपा के लिए सिर्फ इसी उम्मीद में की कांग्रेस के दस साल के शासन से उपजी तमाम सड़ांध को भाजपा की सरकार ही छूमंतर कर देगी। परिवर्तन लाया था। मगर दो साल से ज्यादा हो गए, भाजपा गठबंधन को सत्ता सुख भोगे। बेहतरी की आस में जी रही जनता का भरोसा वर्तमान सरकार से शैन:-शैन: टूट रहा है।

जनता जो सपने आने वाले दिनों की बुन रही थी, वह छिन्न-भिन्न होते दिख रहे है। यह विश्वास अचानक से नहीं दरका है। दरअसल, नरेन्द्र मोदी ने प्रधानमंत्री बनने से पहले ताल ठोककर महंगाई कम करने का वादा किया था, आज की तस्वीर उससे बिल्कुल उलट है। सबसे ज्यादा परेशानी का सबब दालों की कीमत है। दालों के दामों में जहां तीन गुना की वृद्धि हुई है, वहीं आलू और बाकी सब्जियों की कीमतों में भी दोगुना बढ़ोतरी देखी गई है। इसे विकास की संज्ञा दी जाना तो तकलीफ की बात है,दुर्भाग्य से मोदी की सरकार यही कर रही है।

एक बार को यह मान भी लें कि महंगाई को लेकर नारे गढ़ना आंकड़ों का विकल्प नहीं है. फिर भी यह तो गंभीर चिंता की बात है कि गरीब जनता की दाल-रोटी के लिए सरकार ने क्या योजना तैयार की है। इसके ब्रेम कोई नहीं बोल रहा है।

यहां तक कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में पेट्रो पदार्थ की कीमतों में कमी का फायदा सरकार अपने भंडार भरने में तो कर रही है। किंतु इसका फायदा जनता को कैसे मिले, इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा। तो, सरकार इस लांछन से नहीं बच सकती कि हमें तो महंगाई की ऊंची दर संप्रग सरकार से विरासत में मिली थी या सब्जियों की कीमतों में बेतहाशा बढ़ोतरी की वजह मानसून है. सरकार को जमाखोरों पर कार्रवाई को लेकर ज्यादा सख्ती दिखानी चाहिए।

मांग और आपूर्ति के फासले को सरकार से ज्यादा तेजी से व्यापारियों ने भांप लिया। नतीजतन दाल की कीमतें आसमान छूने लगीं. वैसे, आरोप-प्रत्यारोप के बीच बढ़ती महंगाई की असली तस्वीर को समझना आसान नहीं है। हर दल सत्ता में आने के बाद इसी नुस्खे को आजामाता है. वह जनता के बारे में सोचने के दिखावे तो करता है. मगर जनता के दुख हरने की कला किसी दल को नहीं आती है।
श्री राकेश दुबे वरिष्ठ पत्रकार एवं स्तंभकार हैं।        
संपर्क  9425022703        
rakeshdubeyrsa@gmail.com
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