हम भी रो रहे हैं, लेकिन कौन सुन रहा है: सुप्रीम कोर्ट

Saturday, August 27, 2016

नईदिल्ली। आप इसे सुप्रीम कोर्ट की सरकार के प्रति सबसे तल्ख टिप्पणी कह सकते हैं। इतिहास में इससे पहले ऐसी टिप्पणी नहीं आई। चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर ने एक याचिका की सुनवाई में कहा कि क्या हमारे आदेशों से रामराज आ जाएगा? क्या अदालत के कहने से भ्रष्टाचार खत्म हो सकता है? अगर हम कहें कि कोई कत्ल न हो, रेप न हो, तो क्या ऐसा हो जाएगा? कोर्ट सब बुराइयों को नहीं मिटा सकता, सुप्रीम कोर्ट की भी अपनी सीमाएं हैं।

स्वीकार कर ली याचिका: जस्टिस ठाकुर देशभर के फुटपाथ और सड़कों से अतिक्रमण हटाने संबंधी याचिका पर सुनवाई कर रहे थे। इस दौरान वे थोड़े नाराज भी हुए। उन्होंने कहा कि कोर्ट अतिक्रमण हटाने के लिए नहीं है। हालांकि याचिकाकर्ता की भावुक अपील के बाद प्रधान न्यायाधीश ने याचिका को स्वीकार कर लिया।

जस्टिस ठाकुर ने एक बार तो याचिका को खारिज कर दिया था। इस पर याचिकाकर्ता गिड़गिड़ाने लगा और कहा कि सर ऐसा मत कीजिए। यह बहुत बड़ी परेशानी है। हम खून के आंसू रो रहे हैं। इस पर प्रधान न्यायाधीश नाराज हो गए और कहा, ‘हम भी रो रहे हैं, लेकिन कौन सुन रहा है।’ उन्होंने पुलिस से कहा कि याचिकाकर्ता को कोर्ट से बाहर निकाल दे।

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