पदोन्नति में आरक्षण के विरोध में मप्र के कर्मचारियों का मोदी के नाम खुला ज्ञापन

Friday, August 5, 2016

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माननीय प्रधानमंत्री जी,
भारत सरकार
नई दिल्ली

विषय:- मध्यप्रदेश में शासकीय सेवाओं में पदोन्नति में आरक्षण को लेकर मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा दिये गये फैसले का सम्मान करने तथा सामान्य, अल्पसंख्यक एवं पिछड़े वर्ग के कर्मचारियों के साथ न्याय करने बाबत।

महोदय,
मध्यप्रदेश में राज्य सरकार की चतुर्थ श्रेणी से प्रथम श्रेणी तक की सेवाओं में पदोन्नति नियम-2002 द्वारा वर्ष 2002 से पदोन्नति में आरक्षण लागू था। पदोन्नति में आरक्षण की उक्त व्यवस्था के कारण सामान्य, अल्पसंख्यक और पिछड़े वर्ग के कर्मचारियों को सेवा में आगे बढ़ने के अवसर या तो समाप्त हो गये या बहुत कम हो गये। पदोन्नति में रोस्टर लागू होने के परिणामस्वरूप द्वितीय, तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के सामान्य वर्ग के हजारों कर्मचारी बगैर पदोन्नति के एक ही पद से सेवानिवृत्त हो गये तथा यदि किसी को पदोन्नति का लाभ मिला भी तो वह उसके लिए कुण्ठा का कारण बन गया क्योंकि सामान्य, अल्पसंख्यक और पिछड़े वर्ग के कर्मचारियों के साथ भर्ती हुये या उनके काफी बाद उसी पद पर भर्ती हुये अनुसूचित जाति और जनजाति के कर्मचारी उनके अधिकारी बन गये। मध्यप्रदेश में अनेक प्रकरण ऐसे है जिसमें चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी द्वितीय या प्रथम श्रेणी तक पंहुच गये है जबकि सामान्य वर्ग के कर्मचारियों को पदोन्नति में अपने ही आरक्षित वर्ग के साथियों से काफी पीछे रहना पड़ा है।

पदोन्नति में आरक्षण को लेकर संविधान में निहित प्रावधानों की राज्य सरकार द्वारा गलत व्याख्या करके अनुसूचित जाति और जनजाति के कर्मचारियों को पदोन्नति में अनुचित आरक्षण दिया गया है इसीलिये मध्यप्रदेश के कर्मचारियों ने माननीय उच्च न्यायालय, जबलपुर में याचिका दायर कर इसे समाप्त करने की मांग की गई थी ताकि भारतीय संविधान के समानता के अधिकार में उल्लेखित भावनाओं के अनुरूप सभी कर्मचारियों को आगे बढ़ने के समान अवसर प्राप्त हो सके। माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा एम.नागराज प्रकरण में 2012 में ही पदोन्नति में आरक्षण की मौजूदा व्यवस्था को समाप्त करने का आदेश दिया जा चुका है। इस संबन्ध में अनेक राज्यों के उच्च न्यायालय द्वारा भी आदेश दिये गये है तथा मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा भी 30 अप्रेल 2016 को मध्यप्रदेश पदोन्नति नियम 2002 को निरस्त करते हुये आरक्षण के आधार पर पदोन्नत किये गये सभी कर्मचारियों को पदावनत करने के निर्देश दिये है।

न्यायालय का सम्मान करना हमारे देश की परंपरा रही है क्योंकि हमारे प्रजातांत्रिक मूल्य विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर ही निर्भर करते है। आपके नेतृत्व में भारत ने दुनियां में अपनी नई छाप छोड़ी है तथा मौलिक अधिकारों की पैरवी करने वाले अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस जैसे पश्चिमी देश आज भारत के नैतृत्व को स्वीकार करने लगे है। जहां एक ओर आप अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि को नई चमक प्रदान कर रहे है वहीं आपकी पार्टी के मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चैहान संविधान में प्रदत्त समानता के अधिकार को ठोकर मारकर उच्च न्यायालय के निर्णय को न सिर्फ सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दे रहे है बल्कि सड़कों पर भी चुनौती देने से नही चूक रहे है।

उच्च न्यायालय के पदोन्नति में आरक्षण समाप्त करने के निर्णय पर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री ने अनुसूचित जाति जनजाति कर्मचारी संगठनों के मंच पर जो बयान दिया है, वह ऐसा है --‘‘मेरे अनुसूचित जाति के भाईयों और बहनों, कोई माई का लाल पदोन्नति में आरक्षण को समाप्त नही कर सकता। मेरी सरकार आपके साथ है। शिवराज सिंह आपके साथ है।’’ 

माननीय प्रधानमंत्री जी, आप देश के प्रधानमंत्री है। हमारे भी प्रधानमंत्री है। आप सिर्फ अनुसूचित जाति, जनजाति के प्रधानमंत्री नही है। इसलिये आप से देश के सभी सामान्य वर्ग के लोगों को अपेक्षा है कि आप सरकारी नौकरियों और पदोन्नति में जाति के आधार पर देश में बरते जा रहे इस भेदभाव पूर्ण व्यवहार को समाप्त करेंगे।

अतएव निवेदन है कि मध्यप्रदेश सरकार द्वारा जाति के आधार पर कर्मचारियों से किये जा रहे भेदभाव को समाप्त करने हेतु राज्य सरकार को उचित और कठोर निर्देश देने की कृपा करें। मध्यप्रदेश के सामान्य, अल्पसंख्यक और पिछड़े वर्ग के कर्मचारी आपके सदैव आभारी रहेंगे।
सपाक्स, मध्यप्रदेश

यदि आप भी पदोन्नति में आरक्षण का विरोध करते हैं एवं यह अपील प्रधानमंत्री माननीय नरेन्द्र मोदी तक पहुंचाना चाहते हैं तो कृपया नीचे कमेंट बॉक्स में अपना नाम, पदनाम एवं जिला लिखें। यदि आप किसी सामाजिक या कर्मचारी संगठन के पदाधिकारी हैं तो कृपया उसका भी उल्लेख करें। यही इस अपील पर आपके हस्ताक्षर माने जाएंगे और 7 दिवस बाद यह अपील माननीय प्रधानमंत्री महोदय के कार्यालय की ओर भेज दी जाएगी। 
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