अब कॉलेजों को ही डंक मार रहे हैं कॉलेजों के दलाल

Saturday, August 20, 2016

भोपाल। जैसे अमेरिका का पैदा किया गया ओसामा बिन लादेन अमेरिका के लिए ही खतरा बन गया था। ठीक वैसे ही मप्र के बड़े प्राइवेट कॉलेजों द्वारा पैदा किए गए दलाल अब उन्हीं के लिए खतरा बन गए हैं। कॉलेज लेवल काउंसलिंग के लिए हुई बैठक में खुद कॉलेज संचालकों ने माना कि ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराने वाले छात्रों को दलाल वेरिकेशन के दौरान बहला फुसलाकर कम फीस में किसी दूसरे कॉलेज में एडमिशन का झांसा देने लगते हैं। 

एजुकेशन हब के रूप में विकसित हो रही प्रदेश की राजधानी के प्राइवेट इंजीनियरिंग कॉलेजों में एडमिशन के नाम पर कॉलेजों के दलाल सक्रिय हैं। छाेटे शहरों से आने वाले छात्रों को बहला-फुसला कर किसी खास कॉलेज में एडमिशन लेने का दबाव बनाने के बाद अब ये दलाल डराने-धमकाने भी लगा है। हाल ही में एडमिशन से जुड़ी दो घटनाओं ने प्राइवेट इंजीनियरिंग कॉलेजों में दलालों की सक्रियता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। 

दलालों की सक्रियता से भी इंकार नहीं
प्रदेश के करीब 187 सरकारी व निजी इंजीनियरिंग कॉलेजों में एडमिशन के लिए चल रही ऑनलाइन काउंसलिंग में शिक्षा माफिया के सक्रिय होने की बात सामने आई है। पुलिस को इसकी भनक तब लगी जब दलालों और शिक्षा माफिया के बीच मारपीट और फायरिंग जैसे मामले सामने आए। पुलिस ने छानबीन की तो प्रकरण के तार छात्रों को किसी खास कॉलेज में एडमिशन दिलाने से जुड़े मिले। तकनीकी शिक्षा विभाग से जुड़े अधिकारी वैसे तो एडमिशन में शिक्षा माफियाओं की भूमिका से सहमत नहीं है, लेकिन दलालों की सक्रियता से भी इंकार नहीं कर रहे हैं। ये दो घटनाएं इसी से जुड़ी हुई है: 

बदमाशाें ने इंजीनियरिंग छात्र को चलती कार में चार घंटे तक पीटा
3 अगस्त को चार बदमाशों ने इंजीनियरिंग के एक छात्र को चलती कार में चार घंटे तक पीटा। पुलिस की छानबीन से पता चला कि आरोपियों ने छात्र को इंजीनियरिंग कॉलेज में दाखिला दिलाने के नाम पर बुलाया था। इस दौरान बदमाशों ने उसका मोबाइल फोन और रकम भी छीन ली। एटीएम से भी रुपए निकलवाए। इसके बाद छात्र के परिजनों से एक लाख रुपए की फिरौती भी मांगी।

कार और बाइक सवार युवकों ने एक-दूसरे पर किया फायर
13 अगस्त को रायसेन रोड स्थित ओरिएंटल कॉलेज के पास फायरिंग हुई। पिपलानी और बिलखिरिया पुलिस के अनुसार कार और बाइक सवार युवकों ने एक दूसरे पर फायर किया। पुलिस को शक है कि एडमिशन माफिया की आपसी रंजिश के कारण यह वारदात हुई थी। घटना जिस इलाके में हुई थी वहां इंजीनियरिंग कॉलेजों की संख्या काफी है।

कहां से आए ये दलाल
दरअसल इन दलालों को भोपाल के बड़े कॉलेजों ने ही पैदा किया है। ज्यादा से ज्यादा एडमिशन और कम से कम खर्च के टारगेट ने दलालों को पैदा किया। तमाम सारे विज्ञापन अभियान चलाने से बेहतर था दलालों का नेटवर्क बना दो। जब एडमिशन आए तभी कमीशन देना होगा। इस आसान रास्ते ने अब उन्हीं कॉलेज संचालकों के सामने संकट पैदा कर दिए हैं जिन्होंने दलाली सिस्टम की शुरूआत की थी। अब ये दलाल पूरे सिस्टम पर भारी पड़ते जा रहे हैं। 

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